यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: BJP नेता की पत्नी और बेटे की तलाश में जुटी पुलिस, आखिरी कॉल के बाद से बंद मिले फोन

यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: BJP नेता की पत्नी और बेटे की तलाश में जुटी पुलिस, आखिरी कॉल के बाद से बंद मिले फोन

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात हुए दर्दनाक स्लीपर बस अग्निकांड के बाद से कई परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। दिल्ली से महोबा जा रही राज कल्पना ट्रैवल्स की वातानुकूलित डबल डेकर बस में लगी भीषण आग के बाद अब तक 9 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस भयावह त्रासदी के बीच बुंदेलखंड के महोबा जिले से एक बेहद भावुक और चिंताजनक मामला सामने आया है। महोबा के प्रमुख दवा व्यापारी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिला कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता की पत्नी सुनीता गुप्ता और उनका 25 वर्षीय बेटा शशांक गुप्ता हादसे के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। दोनों के मोबाइल फोन बंद होने के कारण परिवार, रिश्तेदार और प्रशासनिक अमला लगातार उनकी तलाश में दिन-रात जुटा हुआ है।

गुरुग्राम से महोबा लौट रहे थे मां-बेटा, आखिरी कॉल के बाद बंद हुआ संपर्क

पारिवारिक सूत्रों और रिश्तेदारों से मिली जानकारी के मुताबिक, महोबा के चरखारी क्षेत्र के निवासी नीरज गुप्ता के बेटे शशांक दिल्ली-एनसीआर में एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे। उनकी मां सुनीता गुप्ता अपने बेटे के पास रहने के लिए दिल्ली-गुरुग्राम आई हुई थीं। बुधवार रात दोनों घर वापसी के लिए दिल्ली से महोबा जाने वाली इसी स्लीपर बस में सवार हुए थे।

परिवार ने बताया कि बुधवार रात करीब 9:36 बजे शशांक की अपने पिता नीरज गुप्ता से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी। शशांक ने पिता को बताया था कि वे बस में बैठ चुके हैं और यात्रा शुरू हो चुकी है। इसके बाद देर रात करीब 11:20 बजे जेवर टोल प्लाजा के पास बस में आग का गोला बन जाने का भीषण हादसा हो गया। गुरुवार सुबह से ही मां-बेटे दोनों के फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहे हैं, जिसके बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

9 में से शवों की पहचान की प्रक्रिया तेज, मॉर्चरी पहुंचे परिजन

हादसे की सूचना मिलते ही भाजपा नेता नीरज गुप्ता, उनके रिश्तेदार और पूर्व सांसद कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल समेत कई स्थानीय नेता और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लिए रवाना हो गए। परिवार के लोग अस्पतालों, बर्न वार्डों और राहत केंद्रों में दोनों की तलाश कर रहे हैं।

प्रशासन ने अब तक हादसे में जान गंवाने वाले 9 शवों में से अधिकांश की शिनाख्त कर ली है, जबकि बाकी शवों की पहचान के लिए कानूनी और चिकित्सीय प्रक्रिया जारी है। शवों के अत्यधिक झुलस जाने की वजह से पहचान करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, जिसके चलते पुलिस और डॉक्टरों की टीम डीएनए सैंपलिंग (DNA Testing) का सहारा भी ले रही है। परिजन लगातार पोस्टमार्टम हाउस और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क साधे हुए हैं।

चालक-परिचालक की घोर लापरवाही और ज्वलनशील सामान ने भड़काई आग

जांच में सामने आया है कि बस में सफर कर रहे कई यात्रियों ने आग भड़कने से पहले ही जलने की गंध और धुएं की शिकायत की थी। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि बस के चालक और परिचालक ने यात्रियों की चेतावनी को पूरी तरह अनसुना कर दिया और गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव करते हुए बस रोकने से साफ मना कर दिया। देखते ही देखते एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट हुआ और बस के अंदर तेजी से लपटें फैल गईं।

यह भी आरोप सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर बस में भारी मात्रा में कपड़े, धागे और ज्वलनशील सामग्री ले जाई जा रही थी, जिससे आग ने चंद मिनटों में विकराल रूप ले लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस चालक, परिचालक और मैनेजर को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ मां-बेटे की खोजबीन और मामले की आधिकारिक पुष्टि में लगा हुआ है।