अतीक के बेटे अली के काफिले में अचानक हलचल: झांसी से प्रयागराज आते वक्त रास्ते में रुका पुलिस का वज्र वाहन, सुरक्षा कारणों से बदला गया रूट

अतीक के बेटे अली के काफिले में अचानक हलचल: झांसी से प्रयागराज आते वक्त रास्ते में रुका पुलिस का वज्र वाहन, सुरक्षा कारणों से बदला गया रूट

माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को झांसी जिला जेल से प्रयागराज ले जा रहे पुलिस काफिले के दौरान अचानक हड़कंप मच गया। छोटे भाई आबान के जनाजे में शामिल होने के लिए कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज लाए जा रहे अली के वज्र वाहन और सुरक्षा गाड़ियों के काफिले को रास्ते में अचानक रोकना पड़ा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा और ट्रैफिक संबंधी आपात स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर काफिले का निर्धारित रूट अंतिम समय में बदल दिया गया है। अति-संवेदनशील बंदी होने के कारण पुलिस प्रशासन अली की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की ढील या रिस्क लेने के मूड में नहीं है।

झांसी से प्रयागराज के रास्ते में अचानक पुलिस वाहनों के रुकने और रूट बदले जाने की खबर सामने आते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। शुरुआती जानकारियों के अनुसार, पहले तय किए गए मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक जाम या सुरक्षा संबंधी संभावित खतरे के इनपुट्स मिलने के बाद यह त्वरित निर्णय लिया गया। पुलिस की गाड़ियां तुरंत वैकल्पिक मार्ग की ओर मुड़ गईं, जिससे अली को तय समय पर और बिना किसी सुरक्षा चूक के कसारी-मसारी कब्रिस्तान तक पहुंचाया जा सके।

सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट: कड़ी घेराबंदी में आगे बढ़ रहा है काफिला

झांसी जेल से तड़के रवाना हुए अली अहमद के काफिले के साथ भारी पुलिस बल, बुलेटप्रूफ गाड़ियां और आधुनिक हथियारों से लैस जवान तैनात हैं। काफिले के आगे और पीछे स्थानीय पुलिस थानों की गाड़ियां एस्कॉर्ट कर रही हैं। जिस रास्ते से काफिला गुजर रहा है, वहां के स्थानीय जिला पुलिस प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि बिना किसी बाधा के गाड़ियां तेजी से आगे बढ़ सकें।

अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से इस प्रकार के रूट चेंज (Route Change) और वाहनों को रोकने की प्रक्रिया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का हिस्सा होती है। चूंकि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के साथ अतीत में हुई घटना के बाद से ही परिवार के सदस्यों की कस्टडी ट्रांसपोर्टेशन बेहद संवेदनशील मामला बन चुका है, इसलिए पुलिस कप्तान और वरिष्ठ अधिकारी खुद पूरे मूवमेंट की रियल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

लखनऊ से आ रहे उमर और अली का कब्रिस्तान में होगा आमना-सामना

दूसरी ओर, अतीक के सबसे बड़े बेटे मोहम्मद उमर को भी लखनऊ जेल से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वज्र वाहन में प्रयागराज लाया जा रहा है। प्रयागराज के चकिया और कसारी-मसारी इलाके को पूरी तरह से छावनी में बदल दिया गया है। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पीएसी (PAC) की दर्जनों टुकड़ियों ने कब्रिस्तान और आसपास की गलियों को सील कर दिया है।

अदालत द्वारा दी गई सीमित समय की पैरोल के तहत दोनों भाइयों—उमर और अली—को केवल उनके छोटे भाई आबान के जनाजे की नमाज और दफन (सुपुर्द-ए-खाक) की रस्मों में शामिल होने की इजाजत दी गई है। कसारी-मसारी कब्रिस्तान में केवल पास धारक और बेहद करीबी पारिवारिक सदस्यों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जनाजे की प्रक्रिया पूरी होते ही दोनों को तुरंत पुनः संबंधित जेलों के लिए रवाना कर दिया जाएगा।

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