'ब्राह्मण समाज के हितैषी होने का स्वांग न रचें': अखिलेश के 'उत्पीड़न' वाले आरोप पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का तीखा पलटवार; बोले— 'लोहिया के आदर्शों को भूल केवल परिवार की राजनीति कर रही सपा'

'ब्राह्मण समाज के हितैषी होने का स्वांग न रचें': अखिलेश के 'उत्पीड़न' वाले आरोप पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का तीखा पलटवार; बोले— 'लोहिया के आदर्शों को भूल केवल परिवार की राजनीति कर रही सपा'

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने तीखा पलटवार किया है। अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को 'ब्राह्मण समाज के हितैषी होने का स्वांग नहीं रचना चाहिए'। पाठक ने स्पष्ट किया कि किसी भी समाज का वास्तविक उत्थान और कल्याण किसी एक परिवार को सत्ता की गद्दी पर बैठाने से नहीं होता, बल्कि समाज के हर वर्ग को समान अवसर, न्याय और सम्मान देने से होता है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सपा नेतृत्व का पूरा राजनीतिक विमर्श केवल अपने परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है और जब भी चुनाव पास आते हैं, उन्हें वोट बैंक साधने के लिए प्रबुद्ध वर्ग और ब्राह्मण समाज की याद आने लगती है। पाठक ने कहा कि जनता अब भली-भांति समझ चुकी है कि कौन सच में समाज की सेवा कर रहा है और कौन केवल चुनाव जीतने के लिए हमदर्दी का नाटक रच रहा है।

'जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा': लोहिया के सिद्धांतों से भटकी सपा

सपा पर हमला बोलते हुए ब्रजेश पाठक ने महान समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया और 'छोटे लोहिया' के नाम से प्रसिद्ध दिवंगत जनेश्वर मिश्र के विचारों का हवाला दिया। पाठक ने कहा कि डॉ. लोहिया परिवारवाद के सबसे बड़े विरोधी थे और वे हमेशा कहा करते थे कि "जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा"। लोहिया जी का मानना था कि जब राजनीति में एक परिवार सबसे ज्यादा शक्तिशाली हो जाता है, तो पूरा समाज कमजोर होने लगता है।

उपमुख्यमंत्री ने अफसोस जताते हुए लिखा कि आज जो लोग डॉ. लोहिया और जनेश्वर मिश्र के नाम पर राजनीति करने का दावा करते हैं, उन्होंने ही सबसे पहले उनके आदर्शों, संस्कारों और सिद्धांतों को तिलांजलि दे दी है। वर्तमान समाजवादी पार्टी न केवल लोहिया के समाजवाद के पथ से पूरी तरह भटक चुकी है, बल्कि संसद और विधानसभाओं की गरिमा को भी तार-तार करने में जुटी है। जहां लोहिया और जनेश्वर जी सदन में जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस को प्राथमिकता देते थे, वहीं आज के सपाई दिल्ली और लखनऊ में केवल कुतर्क और हो-हल्ला मचाकर सत्र को बाधित करने का काम करते हैं।

'चुनाव तक याद आते हैं ब्राह्मण': जनेश्वर मिश्र जयंती और वोट बैंक की राजनीति पर तंज

सपा द्वारा जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर आयोजित 'प्रबुद्ध सम्मेलन' पर तंज कसते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के लिए ब्राह्मण समाज केवल 'वोट बैंक' का जरिया मात्र है। उन्होंने कहा कि चुनाव तक सपा नेता ब्राह्मण वोटों की खातिर तरह-तरह के प्रलोभन देंगे और बयानबाजी करेंगे, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे पूछेंगे कि "कौन ब्राह्मण? किसका ब्राह्मण? और कहां का ब्राह्मण?"। पाठक ने कहा कि पूज्य जनेश्वर जी की समाजवादी आत्मा आज अपनी ही जयंती पर यह राजनीतिक नाटक देखकर बेहद दुखी हो रही होगी।

डिप्टी सीएम ने अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि चंद राजनीतिक टिकटार्थियों और स्वार्थ की वजह से पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा को नीचा दिखाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, "सपा नेता मुझे चाहे जितनी गालियां दें या अपशब्द कहें, लेकिन उन्हें ब्राह्मण समाज के सम्मान और प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने का कोई अधिकार नहीं है"। पाठक ने दोहराया कि उनके सार्वजनिक जीवन का मूल्यांकन जनता करती है और उन्होंने हमेशा संगठन, संविधान और जनसेवा को ही सर्वोपरि रखा है।

2027 चुनाव और प्रबुद्ध वर्ग पर सियासी घमासान

गौरतलब है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि राज्य में पुलिस और प्रशासन द्वारा चुन-चुनकर ब्राह्मणों का उत्पीड़न किया जा रहा है। अखिलेश ने अपने 'PDA' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे में 'P' का मतलब 'पंडित' और 'पीड़ित' भी बताया था। इसी बयान के बाद से बीजेपी और सपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

ब्रजेश पाठक ने बीजेपी के राजनीतिक दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति "राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और अंत्योदय" के मूल मंत्र पर टिकी है। इसके विपरीत, सपा जैसी परिवारवादी पार्टियों का एकमात्र लक्ष्य सत्ता को एक ही कुनबे तक सीमित रखना है। पाठक ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की समझदार जनता इस बुनियादी अंतर को बहुत अच्छे से जानती है और 2027 के चुनाव में एक बार फिर विकास, सुशासन और राष्ट्रवाद की राजनीति पर ही अपनी मुहर लगाएगी।

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