अतीक अहमद की बेनामी संपत्तियों का खुलेगा राज: हाई-प्रोफाइल SIT करेगी पड़ताल

अतीक अहमद की बेनामी संपत्तियों का खुलेगा राज: हाई-प्रोफाइल SIT करेगी पड़ताल

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के संगमनगरी प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके गैंग के आर्थिक साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने के लिए पुलिस प्रशासन ने एक और बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अतीक अहमद और उसके करीबियों की कथित बेनामी संपत्तियों (Benami Properties) की गहराई से जांच करने के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। यह कार्रवाई अधिवक्ता केपी श्रीवास्तव की ओर से की गई एक गंभीर और विस्तृत शिकायत के बाद अमल में लाई गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि माफिया अतीक अहमद और उसके परिजनों ने अपने बेहद करीबी मदन लाल भारतीया के नाम पर प्रयागराज के धूमनगंज क्षेत्र में कई कीमती बेनामी संपत्तियां खरीदी थीं। इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने संपत्तियों की सघन जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

एसआईटी (SIT) में शामिल हैं ये बड़े अधिकारी

इस जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए शासन व प्रशासन ने कई विभागों के आला अधिकारियों को इस विशेष टीम में शामिल किया है। एसआईटी के मुख्य सदस्यों में शामिल हैं:

  • मनीष कुमार शांडिल्य (पुलिस उपायुक्त नगर)

  • सत्यम मिश्र (एडीएम सिटी)

  • अरविंद राय (अपर नगर आयुक्त)

  • राकेश चंद्रा (एआईजी स्टाम्प)

  • विनीत कुमार सिंह (सचिव, प्रयागराज विकास प्राधिकरण - PDA)

SIT का एक्शन प्लान: इस हाई-प्रोफाइल टीम को संबंधित बेनामी संपत्तियों के बारे में गोपनीय और प्रामाणिक खुफिया जानकारी जुटाने, राजस्व (रजिस्ट्री और स्टाम्प) दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने तथा अवैध रूप से अर्जित पाई जाने वाली संपत्तियों को कुर्क या जब्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश के अनुसार, एसआईटी को तीन दिन के भीतर अपनी आधिकारिक जांच शुरू करनी होगी। इसके साथ ही, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए टीम को प्रत्येक सोमवार को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट (Weekly Progress Report) अपर पुलिस आयुक्त को सौंपनी होगी।

अतीक-अशरफ की मौत के 3 साल बाद भी 'खौफ' और 'कब्जे' के निशान

हैरान करने वाली बात यह है कि 15 अप्रैल 2023 की रात को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की सरेआम मौत हो जाने के तीन साल बाद भी प्रयागराज में उसके नाम और पुराने कारनामों का साया बरकरार है। अतीक ने अपने जीवनकाल में शहर और आसपास के इलाकों में इतनी जमीनों पर अवैध कब्जे किए थे कि आज भी जिला प्रशासन के पास आने वाली हर दूसरी शिकायत में उसका या उसके गुर्गों का नाम सामने आ रहा है।

प्रशासनिक अधिकारी इस बात को लेकर हैरान हैं कि अतीक के अपराध की जड़ें कितनी गहरी थीं कि उसकी मौत के इतने समय बाद भी जमीनों पर कब्जे के निशान और विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं।

जनसुनवाई की आधी शिकायतें माफिया ब्रदर्स के खिलाफ

सरकारी आंकड़ों और जनसुनवाई के पैटर्न पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली दिखती है:

  • 100 में से 50 शिकायतें: सदर तहसील में होने वाली जनसुनवाई में रोजाना आने वाली लगभग 100 शिकायतों में से 40 से 50 मामले सीधे तौर पर जमीन और संपत्ति पर अवैध कब्जे से जुड़े होते हैं, जिनमें अतीक अहमद या उसके भाई अशरफ का नाम दर्ज होता है।

  • प्रभावित इलाके: विशेष रूप से करेली, करैलाबाग, कटुहला, गौसपुर, और रसूलपुर जैसे क्षेत्रों की लगभग हर दूसरी शिकायत का संबंध माफिया नेटवर्क से ही निकलता है।

  • अफसरों का बयान: वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि माफिया ब्रदर्स की मौत के बाद अब उन लोगों में हिम्मत आ रही है, जो अतीक के डर से सालों तक चुप बैठे थे। लोग अब अपनी जमीनों के दस्तावेज लेकर धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। हाल ही में गौसपुर कटहुला में पांच बीघा जमीन पर माफिया के गुर्गों द्वारा किए गए अवैध कब्जे का मामला सामने आया था। ऐसे सभी मामलों की एक विस्तृत सूची (डेटाबेस) तैयार की जा रही है, ताकि पीड़ितों को उनकी जमीन वापस दिलाई जा सके और बेनामी संपत्तियों को सरकारी कब्जे में लिया जा सके।

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