अयोध्या के राम मंदिर अब तक क्यों नहीं गए पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह? 'जहां इज्जत नहीं, वहां मैं जाने वाला नहीं' कहकर छलका दर्द; जानें प्राण प्रतिष्ठा न्योते से लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन तक का पूरा विवाद
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में अब तक दर्शन न करने की मुख्य वजह का खुलासा करते हुए बड़ा राजनीतिक और भावनात्मक बयान दिया है। राम जन्मभूमि आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका और सीबीआई द्वारा पहली गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें राम मंदिर से जुड़े किसी भी आयोजन या ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "जहां इज्जत नहीं है, वहां बृजभूषण शरण सिंह जाने वाला नहीं है।" पूर्व सांसद ने खुलासा किया कि वे आखिरी बार 7 दिसंबर 1992 को राम मंदिर गए थे, और उसके बाद से अब तक वे वहां नहीं पहुंचे हैं। इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक एक नई बहस छिड़ गई है।
'आंदोलनकारियों को दरकिनार कर मुंबई के लोगों को बुलाया गया'
एबीपी न्यूज को दिए अपने विशेष साक्षात्कार में बृजभूषण शरण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के दिनों को याद करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने करीब 40 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें सबसे पहली गिरफ्तारी उनकी हुई थी। इसके बावजूद जब अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण संपन्न हुआ और भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया, तो आंदोलन में खून-पसीना बहाने वालों को अनदेखा कर दिया गया। पूर्व सांसद ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मुंबई और अन्य शहरों से ऐसे तमाम लोगों को न्योता भेजकर अग्रिम पंक्ति में बैठाया गया, जिनका न तो राम मंदिर आंदोलन से कोई वास्ता था और न ही सनातन विचारधारा से कोई लेना-देना था। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आंदोलन के समय गालियां दीं, उन्हें सम्मान दिया गया और जो अग्रिम पंक्ति में लड़े, उन्हें भुला दिया गया।
'मेरा विरोध भगवान राम से नहीं, हनुमान जी से चलता है काम'
अपने रुख को साफ करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनका विरोध भगवान श्री राम या उनकी आस्था से बिल्कुल भी नहीं है। उन्होंने कहा, "अयोध्या पावन नगरी है और वहां भगवान राम के लगभग पांच हजार मंदिर हैं। मैं अयोध्या जाता हूं और हर मंदिर में जाकर शीश नवाता हूं। मेरा विरोध केवल उस स्थान और व्यवस्था से है जहां स्वाभिमान और सम्मान नहीं मिलता।" उन्होंने हनुमानगढ़ी का जिक्र करते हुए कहा कि वे नियमित रूप से हनुमानगढ़ी मंदिर जाकर हनुमान जी के दर्शन करते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरा काम हनुमान जी से चल जाता है। हनुमान जी भगवान राम के अनन्य भक्त हैं और हम हनुमान जी के भक्त हैं। जब मेरा मन करेगा या प्रभु राम की प्रेरणा होगी, तब मैं मंदिर जाऊंगा, लेकिन जहां स्वाभिमान को ठेस पहुंचे, वहां जबरन नहीं जाऊंगा।"
राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अखिलेश यादव पर बृजभूषण का पक्ष
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों को लेकर भी बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में कोई बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बनने वाला है। चुनाव केवल वर्तमान सरकार के कामकाज और नीतियों के आधार पर ही लड़ा जाएगा। अखिलेश यादव पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने सॉफ्ट रुख अपनाते हुए कहा कि वे अखिलेश पर कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव हनुमान जी के बड़े भक्त थे, जबकि अखिलेश स्वयं को श्री कृष्ण का भक्त बताते हैं। हालांकि, उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अब इस पूरे मामले में ऐसे लोग भी राजनीति कर रहे हैं जो भगवान राम के अस्तित्व को नहीं मानते और सनातन संस्कृति का विरोध करते हैं।
अवध की राजनीति और कुश्ती संघ से लेकर दबदबे का सफर
देवीपाटन मंडल (गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती) और अवध क्षेत्र की राजनीति में बृजभूषण शरण सिंह का दबदबा दशकों पुराना रहा है। छह बार के सांसद रहे बृजभूषण सिंह भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में गिने जाने वाले बृजभूषण का यह बयान उनके समर्थकों के बीच गहरी छाप छोड़ रहा है। अयोध्या, गोंडा और कैसरगंज के स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि राम मंदिर ट्रस्ट और आयोजन समिति द्वारा स्थानीय व प्रमुख आंदोलनकारियों की उपेक्षा का मुद्दा लंबे समय से सुलग रहा था, जिसे बृजभूषण सिंह ने खुले मंच पर लाकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है।