'इलाके का दादा बन रहा ड्रैगन!' प्रशांत महासागर में चीन की मिसाइल से सहमी दुनिया, अमेरिका की उड़ी नींद
प्रशांत महासागर में चीन की एक बेहद भड़काऊ सैन्य कार्रवाई ने दुनिया भर के शक्तिशाली देशों की नींद उड़ा दी है। ड्रैगन ने अपनी परमाणु संचालित पनडुब्बी से एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। इस खतरनाक कदम ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। जहां अमेरिका ने इसे हथियारों की अंधी दौड़ बताया है, वहीं ताइवान और फिलीपींस जैसे पड़ोसी देशों ने चीन पर 'इलाके का दादा' (Bully) बनने का गंभीर आरोप लगाया है। आइए समझते हैं चीन के इस मिसाइल टेस्ट के पीछे की असली कहानी और इसके वैश्विक मायने।
डमी वारहेड के साथ प्रशांत महासागर में धमाका
चीनी सेना ने प्रशांत महासागर के जलक्षेत्र में एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसमें एक 'डमी वारहेड' (नकली हथियार) लगा हुआ था। बीजिंग की तरफ से इसे महज एक वार्षिक और नियमित सैन्य अभ्यास कहकर टालने की कोशिश की गई है। लेकिन पिछले दो सालों के अंदर यह दूसरी बार है जब चीन ने खुलेआम प्रशांत महासागर में इतनी लंबी दूरी की मिसाइल लॉन्च की है। इस परीक्षण ने साफ कर दिया है कि चीन अपनी नौसैनिक ताकत को आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है।
अमेरिका ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा- 'उल्टी दिशा में जा रहा चीन'
चीन के इस मिसाइल टेस्ट पर अमेरिका ने सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने स्पष्ट किया कि जब पूरी दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की जद्दोजहद कर रही है, तब बीजिंग इसके ठीक विपरीत काम कर रहा है। अमेरिका ने चीन के तेजी से बढ़ते और अपारदर्शी परमाणु जखीरे पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि हथियारों के नियंत्रण के लिए चीन को एक नियमित सूचना तंत्र विकसित करना चाहिए।
ताइवान और फिलीपींस का फूटा गुस्सा: 'यह दादागिरी है'
इस मिसाइल परीक्षण ने क्षेत्रीय देशों को सीधे तौर पर भड़का दिया है। ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव जोसेफ वू ने खुलासा किया कि यह घातक 'जेएल-2 (JL-2) मिसाइल' थी, जो समुद्र में गिरने से ठीक पहले फिलीपींस के हवाई क्षेत्र से गुजरी। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि चीन ने फिर साबित कर दिया है कि वह इस इलाके का 'दादा' है। वहीं, फिलीपींस ने इसे चीन की विस्तारवादी नीतियों का हिस्सा और सैन्य शक्ति का गैर-जिम्मेदाराना प्रदर्शन करार दिया है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड और सोलोमन आइलैंड्स ने भी इसे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया है।
ड्रैगन के बचाव में उतरा रूस
पूरी दुनिया की आलोचनाओं के बीच रूस ने अपने रणनीतिक साझेदार चीन का खुलकर बचाव किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इस मिसाइल टेस्ट को चीन का 'संप्रभु अधिकार' बताते हुए कहा कि बीजिंग की इस कार्रवाई से दुनिया के किसी भी देश को कोई खतरा नहीं है।
क्यों इतना खतरनाक है चीन का यह कदम?
रक्षा और भू-राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह परीक्षण चीन के सैन्य आधुनिकीकरण का एक बहुत बड़ा माइलस्टोन है। यह साबित करता है कि चीन अब सिर्फ जमीन से मार करने वाली मिसाइलों पर निर्भर नहीं है। पनडुब्बी आधारित परमाणु क्षमता हासिल करने का मतलब है कि चीनी नौसेना अब अपने जलक्षेत्र के बेहद करीब से भी सीधे अमेरिकी महाद्वीप को निशाना बना सकती है। पेंटागन की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास इस वक्त करीब 600 परमाणु वारहेड हैं, जिनके साल 2030 तक 1,000 के पार पहुंचने की आशंका है। प्रशांत महासागर अब अमेरिका और चीन के बीच अगली बड़ी रणनीतिक होड़ का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है।