ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होगी भारतीय टीम, एक्सपर्ट बोले 'अमेरिका-इजरायल के दबाव में है मोदी सरकार'

ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होगी भारतीय टीम, एक्सपर्ट बोले 'अमेरिका-इजरायल के दबाव में है मोदी सरकार'

पश्चिम एशिया (West Asia) में मचे भारी भूचाल के बीच भारत और ईरान के रिश्तों को लेकर कूटनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आगामी राजकीय अंतिम संस्कार (State Funeral) में शामिल होने के लिए भारत सरकार ने अपने प्रतिनिधिमंडल (Delegation) की घोषणा कर दी है.

आधिकारिक अपडेट के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल नहीं होंगे. उनकी जगह भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ईरान का दौरा करेंगे. भारत के इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जाने-माने एक्सपर्ट ब्रह्म चेलानी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे मोदी सरकार का 'कमजोर' कूटनीतिक कदम बताया है.

2024 में उपराष्ट्रपति गए, तो अब 'लो-लेवल' डेलीगेशन क्यों?— ब्रह्म चेलानी का सवाल

भू-राजनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट साझा करते हुए सरकार की इस नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने याद दिलाया कि साल 2024 में जब ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की एक हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हुई थी, तब भारत ने अपने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को तेहरान भेजा था.

चेलानी ने लिखा कि अयातुल्ला अली खामेनेई केवल ईरान के आध्यात्मिक गुरु नहीं थे, बल्कि वे वहां के राष्ट्रप्रमुख (Head of State) भी थे. ऐसे में उनके कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार में इतने निचले स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजना हैरान करने वाला है.

वॉशिंगटन और तेल अवीव को नाराज नहीं करना चाहती नई दिल्ली!

ब्रह्म चेलानी के विश्लेषण के अनुसार, इस कूटनीतिक कदम से साफ संकेत मिलते हैं कि इस जंग में भारत का झुकाव हमलावर देशों (अमेरिका और इजरायल) की तरफ बना हुआ है. एक बड़ा और हाई-लेवल डेलीगेशन न भेजकर नई दिल्ली दरअसल वॉशिंगटन (अमेरिका) और तेल अवीव (इजरायल) को यह संदेश देना चाहती है कि वह इस नाजुक मोड़ पर उनके खिलाफ नहीं खड़ी है.

ब्रह्म चेलानी का तर्क: "सरकार यह दलील दे सकती है कि वह एक समुद्री पड़ोसी के रूप में ईरान के साथ भारत के पुराने और रणनीतिक संबंधों का सम्मान करने के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल को 'संतुलित' कर रही है, ताकि अमेरिका और इजरायल के साथ रिश्ते पेचीदा न हों. हालांकि, आलोचक इसे इस बात के सबूत के तौर पर देखेंगे कि भारत अपनी 'ईरान नीति' को अमेरिका और इजरायल के हिसाब से प्रभावित होने दे रहा है."

अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में हुई थी खामेनेई की मौत

आपको बता दें कि इसी साल 28 फरवरी (2026) को तेहरान में अमेरिका और इजरायल के एक बड़े संयुक्त हवाई हमले (Precision Airstrike) में ईरान के 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव चरम पर पहुंच गया था. ईरान ने खाड़ी देशों में बने अमेरिकी मिलिट्री बेस पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं और होर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) को ब्लॉक कर दिया था, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहरा गया था. फिलहाल, इस तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत जारी है, जिसके बीच जुलाई के पहले हफ्ते (4 से 9 जुलाई) में खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की जा रही हैं.

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