इस्लामाबाद में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का भंडाफोड़, 258 विदेशी नागरिक गिरफ्तार; 40 चीनी और 170 वियतनामी शामिल, टूरिस्ट वीजा पर चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर का सिंडिकेट
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का सनसनीखेज पर्दाफाश हुआ है। पाकिस्तान की शीर्ष खुफिया एवं कानून प्रवर्तन संस्था फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के साइबर क्राइम विंग ने इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में एक पॉश रिहायशी इलाके में चल रहे अवैध स्कैम कॉल सेंटर पर बड़ी छापेमारी की है। इस व्यापक कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने मौके से 258 विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों में 40 चीनी नागरिक, 170 वियतनामी नागरिक और मलेशिया सहित कई अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के नागरिक शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह विदेशी गिरोह पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फर्जी निवेश योजनाओं, पोंजी स्कीम, क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर मासूम लोगों को अरबों रुपयों का चूना लगा रहा था। राजधानी के नाक के नीचे इतने बड़े पैमाने पर विदेशी नागरिकों द्वारा अवैध कॉल सेंटर चलाए जाने की खबर सामने आते ही पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र, विदेश मंत्रालय और आव्रजन विभाग में हड़कंप मच गया है।
गुलबर्ग ग्रीन की पॉश सोसाइटी में बना रखा था हाईटेक साइबर हब
संघीय जांच एजेंसी (FIA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया सूचना मिली थी कि इस्लामाबाद के बाहरी क्षेत्र में स्थित 'गुलबर्ग ग्रीन' (Gulberg Green) नामक एक आलीशान हाउसिंग सोसाइटी के भीतर कुछ संदिग्ध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके बाद एफआईए, स्थानीय पुलिस और खुफिया टीमों ने संयुक्त रूप से योजनाबद्ध तरीके से उस परिसर की घेराबंदी की और अचानक छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान मौके का दृश्य देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए। वहां कई मंजिला इमारत में अत्याधुनिक कंप्यूटर सर्वर्स, सैकड़ों हाई-एंड लैपटॉप्स, मल्टी-चैनल वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) एक्सचेंज, हाई-स्पीड इंटरनेट लीज्ड लाइन्स और विदेशी सिम कार्ड्स का पूरा जाल बिछा हुआ था। सैकड़ों विदेशी युवक-युवतियां हेडफोन लगाए विदेशी नागरिकों को कॉल करने और चैट ऐप्स के जरिए फंसाने के काम में जुटे हुए थे। सुरक्षा बलों ने पूरे परिसर को सील कर सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, डेटा सर्वर्स और मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं।
टूरिस्ट वीजा पर पाकिस्तान पहुंचे थे शातिर, कर रहे थे अवैध कारोबार
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि हिरासत में लिए गए अधिकांश विदेशी नागरिक साधारण 'टूरिस्ट वीजा' (पर्यटक वीजा) लेकर पाकिस्तान में दाखिल हुए थे। आव्रजन नियमों के अनुसार टूरिस्ट वीजा पर आए किसी भी विदेशी को देश के भीतर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक, नौकरी या संगठित गतिविधि करने की कानूनी अनुमति नहीं होती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह वीजा नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए संगठित वित्तीय अपराध सिंडिकेट चला रहा था। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि इन विदेशी नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी या संगठित आपराधिक गिरोहों के जरिए पाकिस्तान लाया गया था, जहां उन्हें मोटी तनख्वाह और कमीशन का लालच देकर साइबर ठगी के काम में लगाया गया था। पकड़े गए सभी 258 आरोपियों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रावलपिंडी की अडियाला जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों में वियतनाम और चीन के नागरिकों की सबसे बड़ी तादाद
एफआईए द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पकड़े गए 258 विदेशियों में राष्ट्रीयता के आधार पर सबसे बड़ा वर्ग वियतनाम का है।
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170 नागरिक वियतनाम से हैं।
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40 नागरिक चीन (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) के हैं।
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शेष नागरिक मलेशिया, थाईलैंड, लाओस और अन्य एशियाई देशों से ताल्लुक रखते हैं।
जांच अधिकारियों का मानना है कि चीनी नागरिक इस पूरे सिंडिकेट में सुपरवाइजर, टेक्निकल एडमिनिस्ट्रेटर और फाइनेंशियल ऑपरेटर के रूप में मुख्य भूमिका निभा रहे थे, जबकि वियतनामी और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई युवाओं को टारगेट कॉलिंग, सोशल मीडिया हनीट्रैप और इनवेस्टमेंट चैटिंग के लिए फ्रंट-लाइन वर्कर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
ठगी का तौर-तरीका: पोंजी स्कीम और फेक ट्रेडिंग का मायाजाल
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरोह मुख्य रूप से 'पिग बुचरिंग' (Pig Butchering Scam) और 'टास्क-बेस्ड इनवेस्टमेंट फ्रॉड' की तकनीक पर काम करता था।
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आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम, टिंडर और इंस्टाग्राम के माध्यम से यूरोप, अमेरिका, खाड़ी देशों और एशिया के नागरिकों से दोस्ती गांठते थे।
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शुरुआत में पीड़ितों को छोटी रकम निवेश करने पर भारी मुनाफा दिखाकर उनका भरोसा जीता जाता था।
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इसके बाद पीड़ितों से फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल्स और फर्जी क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स में लाखों डॉलर की भारी रकम जमा कराई जाती थी।
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जब पीड़ित अपनी मूल रकम और मुनाफा वापस निकालने का प्रयास करते थे, तो टैक्स और सर्विस चार्ज के नाम पर और पैसे ऐंठने के बाद उनके अकाउंट्स को हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया जाता था।
जुलाई 2025 में भी हुआ था 149 जालसाजों का पर्दाफाश
पाकिस्तान में अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटरों के खिलाफ यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले जुलाई 2025 में भी पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने एक ऐसे ही विशाल अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर 149 लोगों को गिरफ्तार किया था। उस अभियान में भी 71 विदेशी नागरिक पकड़े गए थे, जिनमें से ज्यादातर चीनी मूल के थे और पोंजी स्कीम्स तथा ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड से जुड़े थे।
दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों जैसे म्यांमार, कंबोडिया और लाओस में अंतरराष्ट्रीय दबाव और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सख्ती बढ़ने के बाद, चीनी साइबर माफिया ने अब पाकिस्तान जैसे कमजोर नियामकीय ढांचे वाले देशों को अपना नया सुरक्षित ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान की लचर वीजा प्रणाली और रिहायशी सोसायटियों में निगरानी की कमी का फायदा उठाकर ये गिरोह तेजी से अपनी जड़ें जमा रहे हैं।
संबंधित देशों के दूतावासों को सूचना, डिपोर्टेशन की तैयारी
पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस्लामाबाद स्थित चीन, वियतनाम और मलेशिया के दूतावासों को इस कानूनी कार्रवाई और उनके नागरिकों की गिरफ्तारी की औपचारिक राजनयिक सूचना दे दी गई है। एफआईए की फॉरेंसिक टीम सभी आरोपियों के पासपोर्ट, डिजिटल उपकरण, बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड्स और स्थानीय मददगारों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है।
जांच पूरी होने के बाद जिन आरोपियों के खिलाफ गंभीर साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत मिलेंगे, उनके खिलाफ पाकिस्तान की अदालतों में मुकदमा चलाया जाएगा, जबकि वीजा नियमों का उल्लंघन करने वाले अन्य विदेशी नागरिकों को उनके संबंधित देशों में डिपोर्ट (निर्वासित) करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा तंत्र और स्थानीय सांठगांठ पर सवाल
राजधानी इस्लामाबाद के वीआईपी और सुरक्षित माने जाने वाले गुलबर्ग ग्रीन इलाके में 250 से अधिक विदेशी नागरिक महीनों से रह रहे थे और इतनी बड़ी तकनीकी अवसंरचना का संचालन कर रहे थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन और स्पेशल ब्रांच को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या इस गिरोह को स्थानीय प्रभावशाली रियल एस्टेट कारोबारियों, पुलिसकर्मियों या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था?
एफआईए अब उस मकान मालिक, प्रॉपर्टी डीलर और स्थानीय मददगारों की तलाश कर रही है जिन्होंने इन विदेशी नागरिकों को बिना उचित पुलिस वेरिफिकेशन (Foreigner Registration) के इतनी बड़ी संपत्ति किराए पर दी थी और उन्हें इंटरनेट लीज्ड लाइन व लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराया था।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर किरकिरी और एफएटीएफ (FATF) की चिंताएं
पाकिस्तान की धरती से इस तरह के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड और डार्क वेब आधारित सिंडिकेट्स का चलना देश की वैश्विक साख के लिए बड़ा झटका है। वित्तीय अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के मानकों के लिहाज से भी यह एक बेहद संवेदनशील मामला है। यदि पाकिस्तान ने समय रहते इन अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट्स पर नकेल नहीं कसी, तो देश एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी के दायरे में आ सकता है।