मिडिल ईस्ट में रचा गया नया इतिहास: लेबनान ने कानून से पूरी तरह खत्म की मौत की सजा, संसद से पास हुआ ऐतिहासिक बिल
मध्य पूर्व (Middle East) और अरब दुनिया के कूटनीतिक इतिहास में 11-12 अगस्त 2026 की तारीख एक बड़े मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गई है। लेबनान की संसद (National Assembly) ने कानून में बड़ा संशोधन करते हुए देश से मृत्युदंड यानी मौत की सजा (Capital Punishment) को पूरी तरह से समाप्त करने वाला ऐतिहासिक विधेयक पारित कर दिया है।
इस बिल के पास होने के साथ ही लेबनान पूरी अरब लीग (Arab League) और मिडिल ईस्ट क्षेत्र का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने अपने कानून से मौत की सजा को हमेशा-हमेशा के लिए हटा दिया है। इस नए कानून के तहत अब लेबनान में सबसे संगीन अपराधों (जैसे देशद्रोह, आतंकवाद या हत्या) के लिए मौत की सजा के विकल्प के तौर पर कठोर श्रम के साथ आजीवन कारावास (Life Imprisonment with Hard Labour) का प्रावधान किया गया है।
22 साल से नहीं हुई थी कोई फांसी, अब कानून में भी मुहर
यद्यपि लेबनान में साल 2004 के बाद से किसी भी अपराधी को फांसी या गोली से उड़ाने (Execution) की सजा नहीं दी गई थी, फिर भी अदालतों द्वारा फांसी का फैसला सुनाया जाता रहा था। लेबनानी कानून के 41 अलग-अलग प्रावधानों में मौत की सजा शामिल थी।
इस ऐतिहासिक विधेयक को संसद में पेश करने के पीछे 'लेबनीज एसोसिएशन फॉर सिविल राइट्स' (LACR) और कई मानवाधिकार संगठनों की वर्षों की कानूनी लड़ाई रही। संसद में बहस के दौरान भारी बहुमत से इस बिल को मंजूरी दी गई। केवल हिजबुल्लाह (Hezbollah) के संसदीय गुट ने इस बिल का विरोध किया, क्योंकि वे विचाराधीन 'सामान्य माफी विधेयक' (General Amnesty Bill) के साथ इसकी टाइमिंग को लेकर सहमत नहीं थे। राष्ट्रपति जोसेफ औन के हस्ताक्षर के साथ ही यह विधेयक पूर्ण कानून का रूप ले लेगा।
लेबनान के न्याय मंत्री और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बताया 'मानवता की जीत'
लेबनान के न्याय मंत्री आदेल नासर (Adel Nassar) ने संसद भवन से इस फैसले को 'ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम' करार दिया। उन्होंने कहा कि मौत की सजा के प्रावधान के कारण कई यूरोपीय और पश्चिमी देश प्रत्यर्पण संधियों (Extradition Agreements) के तहत लेबनान को अपराधियों को सौंपने से इनकार करते थे। अब इस कानून के खत्म होने से लेबनानी न्याय प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा मजबूती और मान्यता मिलेगी।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क (Volker Turk) ने लेबनान सरकार के इस फैसले की दिल खोलकर सराहना करते हुए कहा कि, "युद्ध और अपार मानवीय क्षति झेल रहे देश में यह निर्णय जीवन के अधिकार के प्रति एक अटूट और सैद्धांतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" इसके साथ ही उन्होंने मध्य पूर्व के अन्य पड़ोसी देशों से भी लेबनान के इस साहसिक कदम का अनुसरण करने की अपील की।
दुनिया के 129 देशों में अब तक बंद हो चुकी है मौत की सजा
लेबनान इस कानून को पारित करके दुनिया का 129वां ऐसा देश बन गया है जिसने मौत की सजा को कानूनन समाप्त कर दिया है।
मिडिल ईस्ट जैसे अत्यधिक संवेदनशील इलाके में, जहाँ ईरान, सऊदी अरब और इजरायल जैसे देशों में मृत्युदंड का प्रावधान अब भी कड़ाई से लागू है, लेबनान का यह फैसला मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक नया अध्याय माना जा रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे वैश्विक संगठनों ने इसे मध्य पूर्व में कानून और इंसाफ के क्षेत्र में एक नई रोशनी करार दिया है।