कौन हैं साधना गुल्लापुडी? अमेरिकी वीजा फ्रॉड के झूठे आरोपों में फंसी भारतीय मूल की इंजीनियर, जानें एक्स पर पाकिस्तान कनेक्शन

कौन हैं साधना गुल्लापुडी? अमेरिकी वीजा फ्रॉड के झूठे आरोपों में फंसी भारतीय मूल की इंजीनियर, जानें एक्स पर पाकिस्तान कनेक्शन

सोशल मीडिया के इस आधुनिक दौर में फेक न्यूज और साइबर बुलिंग किस कदर किसी बेकसूर की जिंदगी में भूचाल ला सकती है, इसका ताजा और झकझोर देने वाला उदाहरण अमेरिका के टेक्सास शहर से सामने आया है। अमेरिका में रह रही भारतीय मूल की मेधावी बायोमेडिकल इंजीनियर और प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना साधना गुल्लापुडी (Sadhana Gollapudi) अचानक सोशल मीडिया पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद के केंद्र में आ गईं। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वायरल पोस्ट में उन पर 'वीजा फ्रॉड' (Visa Fraud) करने, अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन करने और 12 सालों से अवैध रूप से अमेरिका में रहने के बेहद संगीन आरोप मढ़े गए। देखते ही देखते यह पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंच गई और ऑनलाइन नफरत का माहौल बन गया। लेकिन जब अमेरिका के शीर्ष कानूनी अधिकारियों ने मामले की जांच की, तो एक ऐसा सच निकलकर सामने आया जिसने न केवल झूठे आरोप लगाने वाले पाकिस्तानी कनेक्शन वाले ट्रोल अकाउंट का भंडाफोड़ किया, बल्कि सोशल मीडिया पर भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार की पोल भी खोल दी।

सोशल मीडिया पर 'साइबर ग्रीन' का दांव और झूठा फैलाया गया जाल

इस पूरे विवाद की शुरुआत माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स पर 'साइबर ग्रीन 09' (Cyber Green 09) नामक एक हैंडल से हुई। इस अकाउंट से साधना गुल्लापुडी का एक वीडियो रीपोस्ट किया गया जिसमें वे अपने अमेरिकी घर के बाहर पारंपरिक पोशाक में कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति दे रही थीं। इस वीडियो को आधार बनाकर ट्रोल अकाउंट ने दावा किया कि साधना पिछले 12 सालों से F-1 स्टूडेंट वीजा (F-1 Student Visa) का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। पोस्ट में लिखा गया, "मिलिए साधना गुल्लापुडी से, जो 2014 से लगातार स्टूडेंट बनी हुई हैं। ये टेक्सास में डांस सिखाती हैं और कैश में ट्यूशन पढ़ाती हैं, जो इनके वीजा नियमों का सीधा उल्लंघन है।"

बिना किसी तथ्य-जांच या सबूत के यह भ्रामक पोस्ट आग की तरह फैल गई और कुछ ही घंटों में इसे करीब 28 लाख (2.8 मिलियन) लोगों ने देख लिया। हजारों लोगों ने बिना सच्चाई जाने इस पोस्ट को रीपोस्ट किया और साधना के खिलाफ अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों से कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। भारतीय-अमेरिकी समुदाय और साधना के करीबियों के लिए यह समय बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक था, क्योंकि एक प्रतिष्ठित नागरिक पर सीधे तौर पर आव्रजन कानून तोड़ने का ठप्पा लगाया जा रहा था।

कौन हैं साधना गुल्लापुडी? डांस और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग का संगम

साधना गुल्लापुडी कोई साधारण सोशल मीडिया यूजर नहीं हैं, बल्कि वे शोध और कला के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। साधना वर्तमान में अमेरिका के प्रतिष्ठित 'यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट ऑस्टिन' (University of Texas at Austin) से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी (PhD) कर रही हैं और वहां सीनियर ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी बैचलर की पढ़ाई यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन से पूरी की है। विज्ञान और तकनीक की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने के साथ-साथ वे भारत की प्राचीन शास्त्रीय नृत्य परंपरा 'कुचिपुड़ी' की एक बेहद प्रतिभाशाली नृत्यांगना भी हैं।

साधना अक्सर अपनी नृत्य कला के वीडियो अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट और यूट्यूब चैनल पर साझा करती रहती हैं। लेकिन किसे पता था कि अपने घर के बाहर रिकॉर्ड किया गया एक खूबसूरत सांस्कृतिक नृत्य वीडियो अचानक उनके खिलाफ नफरत फैलाने का हथियार बना लिया जाएगा। जैसे ही उन पर झूठे आरोप लगे, साधना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए अपना दर्द जाहिर करते हुए लिखा, "बीते कुछ दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए बेहद कठिन और परेशान करने वाले रहे हैं। एक्स पर एक अकाउंट द्वारा मेरी सहमति के बिना मेरे वीडियो का इस्तेमाल करके मेरे खिलाफ भ्रामक और झूठे दावे फैलाए जा रहे हैं।"

अमेरिका के अटॉर्नी जनरल दफ्तर का बड़ा खुलासा: सामने आई सच्चाई

मामले के लगातार तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर बढ़ती खींचतान के बीच दक्षिण टेक्सास के अमेरिकी अटॉर्नी (US Attorney for the Southern District of Texas over Houston) आरोन रीट्ज (Aaron Reitz) के कार्यालय ने खुद इस मामले का संज्ञान लिया। जब सरकारी स्तर पर साधना के वीजा और नागरिकता के दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई, तो सारा दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।

अमेरिकी अटॉर्नी आरोन रीट्ज ने एक्स पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए साफ शब्दों में कहा, "हमारे कार्यालय ने इस मामले की गहन जांच की है। साधना गुल्लापुडी अमेरिका की एक वैधानिक रूप से पंजीकृत नागरिक (Naturalized US Citizen) हैं, न कि F-1 स्टूडेंट वीजा पर रहने वाली कोई विदेशी। हमारे कार्यालय में वीजा फ्रॉड को बहुत गंभीरता से लिया जाता है और हम कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हैं, लेकिन इस मामले में साधना के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार साबित हुए हैं।" इस आधिकारिक बयान के आते ही सोशल मीडिया पर फर्जी दावों की हवा निकल गई और यह स्पष्ट हो गया कि साधना अमेरिका की एक पूर्ण कानूनी नागरिक हैं।

पाकिस्तानी कनेक्शन और 'साइबर ग्रीन' ट्रोल अकाउंट का भंडाफोड़

जब अमेरिकी प्रशासन ने साधना को निर्दोष करार दिया, तो इस फर्जी खबर का ताना-बाना बुनने वाले हैंडल 'साइबर ग्रीन 09' की कलाई खुल गई। पड़ताल में सामने आया कि यह सोशल मीडिया अकाउंट असल में एक पाकिस्तानी ट्रोल नेटवर्क का हिस्सा था, जो पाकिस्तानी अभिनेता हमजा सोहेल का फैन पेज होने का दावा करता था। इस अकाउंट का मुख्य काम भारतीय-अमेरिकी समुदाय और भारतीय प्रवासियों के खिलाफ नफरत फैलाना और झूठी खबरें गढ़ना था।

अमेरिकी अटॉर्नी की ओर से फैक्ट-चेक जारी होते ही और सोशल मीडिया पर भारी फजीहत होने के बाद 'साइबर ग्रीन' नाम के इस अकाउंट ने अपना हैंडल प्राइवेट (Private) कर लिया और कोई माफी भी नहीं मांगी। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि किस प्रकार सीमा पार से संचालित होने वाले साइबर ट्रोल्स और बोट्स भारतीय मूल के नागरिकों को निशाना बनाने के लिए सुनियोजित तरीके से भ्रामक अभियानों को अंजाम दे रहे हैं।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय का आक्रोश और कानूनी कार्रवाई की मांग

इस पूरी घटना के बाद अमेरिका में रह रहे भारतीय-अमेरिकी समुदाय और मानवाधिकार संगठनों में भारी आक्रोश देखा गया। इंडियन अमेरिकन एडवोकेसी काउंसिल (Indian American Advocacy Council) के सह-संस्थापक सिद्धार्थ ने इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के व्यावसायिक उत्तरदायित्व कार्यालय में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी अधिकारियों ने बिना किसी प्राथमिक जांच के एक संदिग्ध पाकिस्तानी ट्रोल अकाउंट के ट्वीट को तवज्जो क्यों दी और सार्वजनिक रूप से एक बेकसूर अमेरिकी नागरिक की नागरिकता की स्थिति का खुलासा क्यों किया।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) की कार्यकारी निदेशक सुहाग शुक्ला ने भी इस रवैये पर तीखा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, "एक पाकिस्तानी एक्टर के फैन पेज द्वारा फैलाए गए नस्लीय और घृणास्पद पोस्ट के आधार पर एक अमेरिकी नागरिक की जांच करना और फिर बिना कोई माफी मांगे उस फर्जी शिकायतकर्ता का शुक्रिया अदा करना बेहद चिंताजनक है। जिसने एक निर्दोष भारतीय-अमेरिकी महिला को परेशान किया और उनकी साख को नुकसान पहुंचाया, उसके खिलाफ टेक्सास दंड संहिता के तहत आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।"

अमेरिका में बढ़ती नफरत और सोशल मीडिया का दुरुपयोग

साधना गुल्लापुडी के साथ हुई यह घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका में भारतीय प्रवासियों और भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक संगठित दुष्प्रचार अभियान (Anti-Indian Campaign) देखने को मिला है। खासतौर पर आव्रजन और वीजा नियमों को लेकर फर्जी दावे करके भारतीय पेशेवरों की छवियों को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस घटना ने वैश्विक स्तर पर यह बहस छेड़ दी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और फर्जी दावों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। साधना गुल्लापुडी का मामला दिखाता है कि कैसे एक झूठा ट्वीट किसी की वर्षों की कड़ी मेहनत और सामाजिक प्रतिष्ठा को दांव पर लगा सकता है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन द्वारा सफाई दिए जाने के बाद साधना ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह मामला वैश्विक डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और गलत जानकारियों के खिलाफ लड़ाई का एक बड़ा नज़ीर बन गया है।

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