पंजाब कांग्रेस में बड़ा सियासी भूचाल: चन्नी और रंधावा अड़े, राजा वडिंग को हटाने की मांग तेज
पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी घमासान का समाधान निकालने की कोशिशें पार्टी हाईकमान ने तेज कर दी हैं। मगर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपने समर्थकों के साथ जिस गोलबंदी के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं, उसे देखते हुए सुलह की राह आसान नजर नहीं आती।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल घमासान थामने के लिए मैदान में उतर गए हैं। इसके लिए बघेल सोमवार को चंडीगढ़ पहुंच भी गए, लेकिन पार्टी महासचिव के पंजाब पहुंचते ही चन्नी के दिल्ली आने की खबरें गरम हैं। इससे साफ है कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व बदलने की मांग पर विरोधी खेमा हथियार डालने के मूड में नहीं है।
हाईकमान के फैसले के खिलाफ पंजाब में लामबंदी
कांग्रेस हाईकमान की ओर से पिछले हफ्ते पंजाब चुनाव के लिए अलग-अलग समितियों के गठन के बाद से भड़के इस अंदरूनी विद्रोह की सबसे बड़ी वजह प्रदेश अध्यक्ष वडिंग को नहीं हटाया जाना है। चन्नी के साथ ही सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता हाईकमान के फैसले के विरुद्ध गोलबंद होकर पिछले पांच दिनों में दो बड़ी बैठकें कर चुके हैं।
आलाकमान ने भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा
विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में आए इस भूचाल को थामने के लिए हाईकमान के इशारे पर राजा वडिंग दो दिन में दो बार खुद के मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं होने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन चन्नी, रंधावा और उनके समर्थक इसका संज्ञान नहीं ले रहे। समझा जाता है कि वेणुगोपाल ने इसके मद्देनजर ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से संवाद करने के बाद सोमवार को भूपेश बघेल को चंडीगढ़ भेजा।
चन्नी समर्थकों को हाईकमान का फैसला मंजूर नहीं
बघेल ने वहां पहुंचकर चुनाव के लिए गठित समितियों की मंगलवार से बैठकें शुरू करने की बात कहते हुए उम्मीद जताई कि आपसी चर्चा के जरिये विवाद का हल निकाल लिया जाएगा और कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। बघेल के इस बयान को चन्नी समर्थकों ने दरकिनार कर साफ संकेत दिया कि हाईकमान का मौजूदा फैसला उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते थे चन्नी
नेतृत्व की दौड़ में अपना दावा पेश कर रहे चन्नी प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते थे, मगर हाईकमान ने उन्हें चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया। बताते हैं कि चन्नी और रंधावा अब इस बात के लिए राजी हैं कि भले ही उन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया जाए, मगर वडिंग को हटाकर किसी तीसरे व्यक्ति को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जाए। इन तेवरों से साफ है कि पंजाब कांग्रेस की कलह थामनी है तो पार्टी आलाकमान को अपने वर्तमान फैसले में संशोधन या बदलाव करना ही पड़ेगा।