रक्षाबंधन पर लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण, क्या भारत में दिखेगा खौफनाक 'ब्लड मून'? जानें सूतक काल, राखी बांधने का सही समय और राशियों पर ज्योतिषीय प्रभाव

रक्षाबंधन पर लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण, क्या भारत में दिखेगा खौफनाक 'ब्लड मून'? जानें सूतक काल, राखी बांधने का सही समय और राशियों पर ज्योतिषीय प्रभाव

भाई-बहन के अटूट स्नेह और रक्षा के पवित्र संकल्प का पर्व 'रक्षाबंधन' वर्ष 2026 में 28 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसी दिन सनातन परंपरा की अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि 'श्रावण (सावन) पूर्णिमा' भी है। हालांकि, इस वर्ष सावन पूर्णिमा की तिथि केवल रक्षासूत्र बांधने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत दुर्लभ संयोग लेकर आ रही है। इस पावन अवसर पर वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। वैज्ञानिकों और खगोलशास्त्रियों के अनुसार यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन इसकी दृश्यता और तीव्रता का अनुभव लगभग पूर्ण चंद्र ग्रहण की तरह ही होगा। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण पृथ्वी की घनी छाया का चंद्रमा पर पड़ना है।

क्या होता है 'ब्लड मून' और क्यों लाल हो जाता है चंद्रमा?

खगोल विज्ञान के अनुसार, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में इस प्रकार आते हैं कि पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने लगती है, तब चंद्र ग्रहण की स्थिति निर्मित होती है। 28 अगस्त 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की सबसे गहरी और घनी छाया, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'अम्ब्रा' (Umbra) कहा जाता है, चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्से को पूरी तरह ढंक लेगी। इतने बड़े हिस्से के ढंकने के कारण ही यह आंशिक ग्रहण होने के बावजूद पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसा प्रतीत होगा।

इस खगोलीय घटना का सबसे आकर्षक पहलू 'ब्लड मून' का नजारा है। सामान्यतः ग्रहण के दौरान चंद्रमा काला दिखाई देना चाहिए, परंतु इस बार वह गहरे लाल या तांबे के रंग जैसा जगमगाता नजर आएगा। वैज्ञानिकों का स्पष्टीकरण है कि जब पृथ्वी की घनी छाया चंद्रमा को ढंकती है, तब सूर्य का सीधा प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता। हालांकि, सूर्य की किरणें पृथ्वी के सघन वायुमंडल से होकर गुजरते समय मुड़ (रिफ्रैक्ट) जाती हैं। वायुमंडल में मौजूद धूल कण और गैसें नीले व हरे प्रकाश को बिखेर देती हैं, जबकि लाल तरंग दैर्ध्य (Red Wavelength) की किरणें चंद्रमा की सतह तक पहुंच जाती हैं। इसी वैज्ञानिक परिघटना के कारण चंद्रमा एक चमकदार 'ब्लड मून' के रूप में दिखाई देता है।

भारत में चंद्र ग्रहण का समय और 'ब्लड मून' की दृश्यता स्थिति

भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को लगने वाले इस चंद्र ग्रहण की समय सारणी इस प्रकार रहेगी:

  • ग्रहण प्रारंभ: सुबह 06 बजकर 53 मिनट से

  • ग्रहण का परमग्रास (चरम बिंदु): सुबह 09 बजकर 42 मिनट पर

  • ग्रहण की समाप्ति: दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर

  • कुल समयावधि: लगभग 5 घंटे 38 मिनट

भारतीय खगोलशास्त्रियों के अनुसार, चूंकि ग्रहण का संपूर्ण काल सुबह 06:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे के मध्य है, इस समय भारत में सूर्योदय हो चुका होगा और दिन का उजाला रहेगा। दिन के समय चंद्रमा क्षितिज से नीचे होने के कारण भारत में यह चंद्र ग्रहण और 'ब्लड मून' का अलौकिक नजारा प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा।

दुनिया के किन हिस्सों में दिखेगा ब्लड मून और कैसे देखें?

यद्यपि भारत में यह नजारा अदृश्य रहेगा, लेकिन दुनिया के अनेक महाद्वीपों में खगोल प्रेमी इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बनेंगे। 28 अगस्त को ब्लड मून का भव्य नजारा मुख्य रूप से यूरोप, अफ्रीका, पश्चिमी और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों, उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया के कुछ क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।

यदि आप ऐसे भौगोलिक स्थान पर हैं जहां ग्रहण दिखाई दे रहा है, तो ब्लड मून को देखने के लिए शहर की कृत्रिम रोशनी और प्रदूषण से दूर किसी अंधेरे व ऊंचे स्थान पर जाएं। चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष चश्मे के नग्न आंखों से सुरक्षित देखा जा सकता है, परंतु विस्तृत विवरण देखने के लिए दूरबीन (Binoculars) या टेलीस्कोप का प्रयोग सर्वोत्तम रहेगा।

क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल? जानें रक्षाबंधन पर इसका प्रभाव

सनातन धार्मिक मान्यताओं और शास्त्र सम्मत नियमों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण प्रारंभ होने से ठीक 9 घंटे पूर्व शुरू हो जाता है। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ, मांगलिक कार्य, पूजा-पाठ और भोजन पकाने या ग्रहण करने पर वर्जन रहता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं।

परंतु धर्मशास्त्रों का अकाट्य नियम है कि 'यस्य दर्शनं नास्ति, तस्य सूतकं नास्ति' अर्थात जिस खगोलीय घटना की दृश्यता संबंधित भौगोलिक क्षेत्र में नहीं होती, वहां उसका सूतक काल या धार्मिक प्रभाव भी मान्य नहीं होता है। चूंकि 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में अदृश्य है, इसलिए भारत में इसका सूतक काल पूरी तरह निष्प्रभावी और अमान्य रहेगा।

सूतक काल मान्य न होने के कारण रक्षाबंधन का पावन पर्व बिना किसी विघ्न या भद्रा-सूतक के भय के पूरे दिन अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जा सकेगा। बहनें अपनी सुविधानुसार पूरे दिन किसी भी शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांध सकती हैं।

ज्योतिषीय विश्लेषण: कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में बनेगा खतरनाक 'ग्रहण योग'

भले ही यह ग्रहण भारत में दृश्य न हो, लेकिन ज्योतिष विज्ञान के अनुसार ग्रहों का गोचर और खगोलीय हलचल समस्त पृथ्वी और मानव जीवन को सूक्ष्म रूप से प्रभावित करती है। साल 2026 का यह अंतिम चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा।

28 अगस्त को चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे, जहां पहले से ही मायावी ग्रह राहु की उपस्थिति रहेगी। चंद्रमा और राहु की इस युति से 'ग्रहण योग' का निर्माण होगा। शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु स्वयं है, जिससे इस ग्रहण योग का प्रभाव और अधिक तीव्र हो जाता है।

कुंभ राशि में चंद्र-राहु के इस ग्रहण योग के कारण वैश्विक स्तर पर राजनीतिक उथल-पुथल, प्राकृतिक आपदाओं, शेयर बाजार में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव और मौसम चक्र में अचानक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेष रूप से कुंभ, सिंह, वृश्चिक और मेष राशि के जातकों को इस अवधि में मानसिक तनाव, धनहानि और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। वहीं, वृषभ और धनु राशि के लिए यह गोचर मध्यम फलदायी रहेगा।

 

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