वनडे क्रिकेट के इतिहास में 5000 मैच पूरे: स्कॉटलैंड-कनाडा मुकाबले से रचा गया नया कीर्तिमान, आज भी बरकरार है सचिन तेंदुलकर का 18,426 रनों का वर्ल्ड रिकॉर्ड

वनडे क्रिकेट के इतिहास में 5000 मैच पूरे: स्कॉटलैंड-कनाडा मुकाबले से रचा गया नया कीर्तिमान, आज भी बरकरार है सचिन तेंदुलकर का 18,426 रनों का वर्ल्ड रिकॉर्ड

अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट (One Day International) के इतिहास में 7 अगस्त 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच खेला गया मुकाबला वनडे क्रिकेट इतिहास का आधिकारिक रूप से 5000वां वनडे मैच बना। इस यादगार और ऐतिहासिक मुकाबले में स्कॉटलैंड ने कनाडा को एक कड़े संघर्ष में 9 रन से हराकर जीत दर्ज की और 5000वें वनडे मैच के विजेता के रूप में अपना नाम दर्ज कराया। वर्ष 1971 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर खेले गए पहले वनडे मैच से शुरू हुआ यह सफर 55 सालों में 5000 मुकाबलों तक पहुंच चुका है। टेस्ट क्रिकेट के 2,628 मैचों और टी20 अंतरराष्ट्रीय के 4,059 मुकाबलों की तुलना में वनडे फॉर्मेट सबसे अधिक खेले जाने वाला अंतरराष्ट्रीय फॉर्मेट बना हुआ है।

इस 5000वें मुकाबले के ऐतिहासिक पड़ाव पर पूरी दुनिया के क्रिकेट विशेषज्ञों और खेल प्रेमियों का ध्यान वनडे क्रिकेट के उन महान आंकड़ों पर टिका है, जिन्होंने दशकों से इस फॉर्मेट की पहचान बनाई है। इनमें सबसे ऊपर 'क्रिकेट के भगवान' कहे जाने वाले भारत के महान बल्लेबाज सचिन रमेश तेंदुलकर का नाम आता है। सचिन तेंदुलकर ने वनडे क्रिकेट में जो 18,426 रनों का विशाल पर्वत खड़ा किया है, वह 5000 मैच पूरे होने के बाद भी पूरी तरह से सुरक्षित है और कोई भी बल्लेबाज उनके इस वर्ल्ड रिकॉर्ड के करीब नहीं पहुंच सका है। सचिन ने अपने 24 साल लंबे करियर में 463 वनडे मैच खेले, जिनमें 44.83 की औसत से 49 शतक और 96 अर्धशतक शामिल हैं। उन्होंने अपना आखिरी वनडे मुकाबला मार्च 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था, लेकिन संन्यास के 14 साल बाद भी उनका यह वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम है।

सक्रिय खिलाड़ियों में सचिन तेंदुलकर के इस रिकॉर्ड के सबसे करीब भारत के ही स्टार बल्लेबाज विराट कोहली हैं। विराट कोहली ने वनडे क्रिकेट में 14,941 रन बनाए हैं। हालांकि, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के बीच अभी भी 3,485 रनों का एक बड़ा फासला है। विराट कोहली टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और उनका ध्यान मुख्य रूप से वनडे क्रिकेट पर केंद्रित है। लेकिन वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में वनडे मैचों की घटती संख्या और खिलाड़ी की उम्र को देखते हुए 3,485 रनों का यह अंतर पार करना लगभग असंभव माना जा रहा है। यही वजह है कि क्रिकेट विश्लेषक सचिन तेंदुलकर के 18,426 रनों के इस रिकॉर्ड को वनडे क्रिकेट के 'अमर रिकॉर्ड्स' की सूची में सबसे ऊपर रखते हैं।

18,426 रनों का महारिकॉर्ड: सचिन तेंदुलकर का वो कीर्तिमान जिसे तोड़ पाना नामुमकिन

वनडे क्रिकेट के 5000 मैचों के इतिहास में केवल सचिन तेंदुलकर का रनों का रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि कई अन्य व्यक्तिगत और टीम रिकॉर्ड्स भी ऐसे रहे हैं जिन्होंने कई दशकों तक इस खेल पर अपना दबदबा बनाए रखा। श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन के नाम वनडे इतिहास में सबसे ज्यादा 534 विकेट लेने का ऑल-टाइम रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे तोड़ना आज के दौर में किसी भी गेंदबाज के लिए नामुमकिन सा लगता है। गेंदबाजी में एक पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का रिकॉर्ड श्रीलंका के ही चमिंडा वास के नाम है, जिन्होंने 2001 में जिम्बाब्वे के खिलाफ महज 19 रन देकर 8 विकेट (8/19) चटकाए थे। यह रिकॉर्ड पिछले 25 सालों से अटूट बना हुआ है। इसी तरह वकार यूनिस द्वारा बनाए गए सबसे ज्यादा 13 बार पांच विकेट (5-wicket haul) हासिल करने के रिकॉर्ड पर भी 33 सालों से किसी का एकाधिकार नहीं टूट सका है।

बल्लेबाजी के अन्य रिकॉर्ड्स की बात करें तो वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज विव रिचर्ड्स द्वारा 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई 189 रनों की नाबाद पारी लंबे समय तक व्यक्तिगत सर्वोच्च स्कोर का रिकॉर्ड बनी रही। बाद में 2010 में सचिन तेंदुलकर ने ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इतिहास का पहला दोहरा शतक (200*) जड़कर इस सीमा को तोड़ दिया था। पाकिस्तान के शाहिद अफरीदी द्वारा 1996 में श्रीलंका के खिलाफ महज 37 गेंदों में लगाया गया सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड लगभग 17 वर्षों (6298 दिनों) तक कायम रहा था। वहीं सनथ जयसूर्या द्वारा 17 गेंदों में जड़ा गया सबसे तेज अर्धशतक भी 6860 दिनों तक वनडे क्रिकेट का सबसे तेज हाफ-सेंचुरी रिकॉर्ड बना रहा।

वर्तमान परिदृश्य में टी20 लीग्स के फैलाव और अंतरराष्ट्रीय फ्रेंचाइजी क्रिकेट की व्यस्तता के चलते वनडे प्रारूप के भविष्य को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि 50 ओवर का यह फॉर्मेट अपनी पारंपरिक पहचान और रोमांच खो रहा है। इसके बावजूद द्विपक्षीय सीरीज और आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप के प्रति दर्शकों का आकर्षण यह साबित करता है कि वनडे क्रिकेट की अपनी एक अलग प्रासंगिकता है। 5000वें मैच का यह पड़ाव इस बात की तस्दीक करता है कि इस फॉर्मेट ने क्रिकेट को कई कालजयी कहानियां, अद्भुत रिकॉर्ड्स और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज दिए हैं जिनके आंकड़े युगों-युगों तक क्रिकेट प्रेमियों के दिलों पर राज करते रहेंगे।

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