कासगंज में भी सावन भर 12वीं तक के स्कूल बंद, अब हफ्ते में सिर्फ 4 दिन खुलेंगे विद्यालय, पढ़ें डीएम का नया आदेश
उत्तर प्रदेश में सावन के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही शिवभक्तों और कांवड़ियों का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। राज्य के विभिन्न मार्गों से गुजरने वाले लाखों कांवड़ियों की सुरक्षा और सुगम यातायात सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और गूगल सर्च ट्रेंड्स के अनुसार, इस समय उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 'स्कूलों की छुट्टी' और 'कांवड़ यात्रा रूट' सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले विषय हैं। इसी कड़ी में, कासगंज जिले के जिलाधिकारी (डीएम) ने एक बेहद अहम और बड़ा फैसला लिया है। कासगंज प्रशासन ने सावन माह में कांवड़ यात्रा की भारी भीड़ और संभावित ट्रैफिक जाम को देखते हुए जिले के सभी 12वीं तक के स्कूलों को सप्ताह में केवल चार दिन ही खोलने का सख्त आदेश जारी किया है। यह फैसला मुख्य रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है ताकि उन्हें जाम और भीड़भाड़ का सामना न करना पड़े।
हफ्ते में तीन दिन रहेगा अवकाश का नियम
कासगंज के डीएम द्वारा जारी किए गए विस्तृत आदेश के मुताबिक, अब पूरे सावन महीने के दौरान हर शनिवार और सोमवार को 12वीं कक्षा तक के सभी शिक्षण संस्थान पूरी तरह से बंद रहेंगे। अगर इस नियम को ध्यान से समझें, तो शनिवार और सोमवार को प्रशासन के आदेश पर छुट्टी रहेगी, जबकि रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण स्कूल पहले से ही बंद रहते हैं। इस तरह बच्चों को लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलेगी और स्कूल सप्ताह में केवल चार दिन (मंगलवार से शुक्रवार) ही संचालित होंगे। यह आदेश जनपद के सभी यूपी बोर्ड, सीबीएसई (CBSE), आईसीएसई (ICSE) और अन्य सभी मान्यता प्राप्त बोर्डों के स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने इस आदेश की कॉपी जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को भेज दी है। प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि जो भी स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षकों की उपस्थिति और राष्ट्रीय पर्व पर निर्देश
भले ही कासगंज प्रशासन ने बच्चों के लिए स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है, लेकिन शिक्षकों और स्कूल स्टाफ के लिए कोई छुट्टी नहीं होगी। डीएम के आदेश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शनिवार और सोमवार की छुट्टी के दौरान भी सभी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को अपने-अपने विद्यालयों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा। शिक्षक स्कूल में रहकर अपने शासकीय, प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य पूरे करेंगे। इसके अलावा, अगस्त के महीने में पड़ने वाले राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को लेकर भी खास निर्देश दिए गए हैं। 15 अगस्त के दिन सभी स्कूलों को खोला जाएगा और वहां पूरे हर्षोल्लास के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। साथ ही, जियोग्राफिकल ऑप्टिमाइजेशन (लोकल एसईओ) के लिहाज से यह जानकारी भी अहम है कि यदि किसी बोर्ड, विश्वविद्यालय, डिग्री कॉलेज या किसी सरकारी आयोग की पूर्व निर्धारित परीक्षाएं इन छुट्टियों वाले दिनों में तय हैं, तो वे अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी। परीक्षाओं के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा।
बरेली प्रशासन का सावन और कांवड़ यात्रा प्लान
कासगंज के साथ-साथ यूपी के नाथ नगरी बरेली में भी कांवड़ यात्रा को लेकर इसी तरह के एहतियाती कदम उठाए गए हैं। बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने भी सावन माह के प्रत्येक सोमवार को विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया है। बरेली का यह आदेश इसलिए भी खास है क्योंकि इसे एक विशिष्ट भौगोलिक दायरे (Geographical Optimization) को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। आदेश के अनुसार, बरेली में दिल्ली रोड और बदायूं रोड (जहां से कांवड़ियों का सबसे बड़ा जत्था गुजरता है) के 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित सभी स्कूलों, महाविद्यालयों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में छुट्टी रहेगी। बरेली में भी शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को अपने संस्थानों में उपस्थित रहकर काम करना होगा। आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के नजरिए से देखें तो प्रशासन का यह 'माइक्रो-मैनेजमेंट' इस बात को सुनिश्चित करता है कि शिक्षा का नुकसान कम से कम हो और शहर की कानून-व्यवस्था व यातायात पूरी तरह से सुचारू रहे।
कांवड़ यात्रा और उर्स-ए-रजवी के लिए सुरक्षा का चक्रव्यूह
बरेली जिले में इस बार प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ सावन की कांवड़ यात्रा में लाखों शिवभक्त सड़कों पर हैं, तो दूसरी तरफ प्रसिद्ध उर्स-ए-रजवी का भी आयोजन होना है। इन दोनों बड़े आयोजनों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए बरेली पुलिस पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर है। एसपी सिटी मानुष पारीक और सीओ सिटी आशुतोष शिवम ने शहर के सभी प्रमुख थानों के प्रभारियों के साथ एक लंबी और अहम बैठक की है। इस बैठक में पुलिस बल को 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत काम करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। मिश्रित आबादी वाले और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की विशेष नजर है। थाना प्रभारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निरंतर फ्लैग मार्च निकालें और नियमित रूप से पैदल गश्त (फुट पेट्रोलिंग) करें। पुलिस की 'तीसरी आंख' यानी सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों के जरिए भी चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।
लोकल ट्रैफिक डायवर्जन और आम जनजीवन पर प्रभाव
गूगल डिस्कवर फीड में अक्सर ऐसी खबरें ट्रेंड करती हैं जो आम आदमी के दैनिक जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। कासगंज और बरेली में लिए गए इन फैसलों का सीधा असर लाखों लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है। स्कूलों की छुट्टी से जहां एक तरफ बच्चों को जाम से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर किए गए ट्रैफिक डायवर्जन (Traffic Diversion) से भारी वाहनों का रूट बदल गया है। रोडवेज बसों और कमर्शियल वाहनों को शहर के बाहर बने बाईपास और वैकल्पिक मार्गों से गुजारा जा रहा है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे घर से निकलने से पहले गूगल मैप्स या ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी जरूर चेक कर लें। कुल मिलाकर, कासगंज और बरेली प्रशासन की यह मुस्तैदी और दूरदर्शी प्लानिंग इस बात का प्रमाण है कि यूपी सरकार कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों को पूरी तरह से सुरक्षित, सुगम और बिना किसी विवाद के संपन्न कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।