12,000 करोड़ के दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की खुलेगी पोल, मुजफ्फरनगर में सड़क धंसने के बाद SIT गठित; रात में होगा 23 जगहों का टेक्निकल ऑडिट
करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार देश के सबसे आधुनिक हाईवे और एक्सप्रेसवे पहली ही मानसून की बारिश में जवाब देने लगे हैं। 12,000 करोड़ रुपये की विशाल लागत से बने नवनिर्मित दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुजफ्फरनगर और बागपत के कई हिस्सों में पहली ही तेज बारिश के बाद सड़क धंसने, गहरे गड्ढे होने और सुरक्षा रेलिंग गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। इस प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में एनएचएआई ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।
पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन, गडकरी ने किया था कार से मुआयना
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग है। इसी साल 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहारनपुर में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान इसका उद्घाटन किया था। उद्घाटन के ही दिन केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने खुद कार में बैठकर इस पूरे एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया था और इसकी तारीफ की थी। वर्तमान में इस एक्सप्रेसवे से रोजाना 25 से 30 हजार वाहन तीव्र गति से फर्राटा भर रहे हैं, जिससे यह रूट बेहद संवेदनशील हो जाता है।
पहली ही बारिश में धंसी सड़क, कई ठेकेदारों की फर्में ब्लैकलिस्ट
मानसून की पहली तेज बारिश ने ही एक्सप्रेसवे के निर्माण दावों की पोल खोलकर रख दी। मुजफ्फरनगर की सीमा के भीतर एक्सप्रेसवे की मुख्य सड़क पर अचानक बड़े-बड़े और जानलेवा गड्ढे बन गए। इसके बाद गांगनौली और उसके आस-पास के इलाकों में एक्सप्रेसवे के किनारों पर बनाए गए मिट्टी के पुस्तों (Embankments) में भारी कटान हो गया, जिससे वहां गहरे खड्डे बन गए। यही नहीं, सड़क के किनारों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की रेलिंग भी जमीन में धंस गई, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के पलटने और बड़े हादसों का खतरा पैदा हो गया।
इस लापरवाही पर कार्रवाई करते हुए एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली मुख्य कंपनी समेत कई सहयोगी उप-ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही कई दोषी ठेकेदारों की फर्मों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट (Blacklist) कर दिया गया है।
23 संवेदनशील स्थानों पर रात में होगा विशेष 'टेक्निकल ऑडिट'
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नरेंद्र सिंह ने बताया कि एक्सप्रेसवे की असली मजबूती और परतों (Layers) की हकीकत जानने के लिए एसआईटी एक व्यापक तकनीकी ऑडिट (Technical Audit) करने जा रही है।
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कुल 23 स्थानों का चयन: एक्सप्रेसवे के पूरे रूट पर कुल 23 सबसे संवेदनशील और प्रभावित स्थानों को चिन्हित किया गया है जहां यह विशेष जांच की जाएगी।
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कोर और क्रस्ट कटिंग: इन चुनिंदा जगहों पर सड़क के किनारों (Edges), मध्य रेखा (Middle Line) और सेंटर लाइन पर 'कोर कटिंग' (Core Cutting) और 'क्रस्ट कटिंग' (Crust Cutting) की जाएगी। इसके जरिए सड़क के भीतर की परतों की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री और संरचना का कड़ा लैबोरेट्री टेस्ट किया जाएगा।
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सैंपलिंग: प्रत्येक चिन्हित स्थान से 2 से 3 अलग-अलग नमूने (Samples) लिए जाएंगे ताकि राजमार्ग की वास्तविक गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो सके।
ट्रैफिक पर नहीं पड़ेगा असर, रात में लगेगा 6 घंटे का रूट डायवर्जन
हाईवे पर वाहनों की भारी आवाजाही को देखते हुए यह क्रस्ट कटिंग और सैंपलिंग का पूरा काम रात के समय अंजाम दिया जाएगा। इसके लिए रूट डायवर्जन की योजना बनाई गई है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि किसी भी हिस्से में रूट डायवर्जन अधिकतम 6 घंटे से अधिक नहीं रहेगा, ताकि आम जनता और व्यावसायिक वाहनों को न्यूनतम असुविधा का सामना करना पड़े।
रिटायर्ड चीफ इंजीनियर और इंडिपेंडेंट स्पेशलिस्ट संभालेंगे कमान
जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस एसआईटी (SIT) में कई बड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इस जांच दल में:
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एक पूरी तरह स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट एजेंसी (Independent Technical Audit Agency)।
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एनएचएआई (NHAI) का एक वरिष्ठ इन-हाउस इंजीनियर।
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एक सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता (Retired Chief Engineer), जो एक स्वतंत्र विशेषज्ञ (Independent Specialist) के रूप में पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
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प्राधिकरण अभियंता (Authority Engineer) का एक आधिकारिक प्रतिनिधि।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि एसआईटी की इस तकनीकी जांच रिपोर्ट में यदि निर्माण कार्य में कोई भी कमी या घटिया सामग्री का इस्तेमाल पाया जाता है, तो सड़क के उस पूरे हिस्से को दोबारा दुरुस्त कराने का पूरा खर्च और जोखिम संबंधित ठेकेदार (Contractor) की लागत पर ही तुरंत वसूला और कराया जाएगा।