अल नीनो ने बढ़ाई इस देश की मुश्किलें: भीषण सूखे से 1,15,000 से अधिक लोग बूंद-बूंद पानी को तरसे, गहराया मानवीय संकट
वैश्विक जलवायु परिवर्तन और समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि से उत्पन्न मौसम चक्र 'अल नीनो' (El Niño) ने कई विकासशील और तटीय क्षेत्रों में भयानक तबाही मचानी शुरू कर दी है। बारिश के अभाव और लगातार चढ़ते पारे के कारण एक पूरे देश में पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई है।
आधिकारिक रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस देश के 1,15,000 (एक लाख पंद्रह हजार) से अधिक लोग भीषण जल संकट की चपेट में आ चुके हैं और दैनिक जरूरतों तथा पीने के साफ पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। नदियां, प्राकृतिक झरने, कुएं और स्थानीय जलाशय पूरी तरह सूखकर मैदान में तब्दील हो चुके हैं, जिससे स्थानीय आबादी के सामने जीवन रक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कृषि पूरी तरह तबाह, मवेशियों की मौत से आजीविका पर वज्रपात
अल नीनो के चलते महीनों से बारिश की एक बूंद न गिरने का सीधा प्रहार देश के कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। लाखों हेक्टेयर में फैली मुख्य फसलें खेतों में ही जलकर खाक हो चुकी हैं। किसानों के पास सिंचाई तो दूर, फसलों को बचाने का कोई विकल्प नहीं बचा है।
फसलों की बर्बादी के साथ-साथ चारे और पीने के पानी के अभाव में हजारों दुधारू और पालतू मवेशी दम तोड़ चुके हैं। जो ग्रामीण परिवार पूरी तरह खेती-किसानी और पशुपालन पर निर्भर थे, उनकी आजीविका पूरी तरह छिन गई है। इसके चलते ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर पलायन की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे शहरी केंद्रों पर भी बुनियादी संसाधनों का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है।
दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, बीमारियों के फैलने का खतरा
पानी के संकट ने केवल प्यास का संकट ही नहीं खड़ा किया, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले लिया है। दूर-दराज के इलाकों में महिलाओं और बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर कीचड़युक्त गड्ढों से पानी लाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि दूषित और असुरक्षित जल के उपयोग के चलते हैजा, डायरिया, पेचिश और त्वचा संबंधी गंभीर संक्रामक बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं। स्थानीय अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) और कुपोषण के शिकार बच्चों और बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यदि समय रहते स्वच्छ पेयजल के टैंकर और जल शोधन टैबलेट्स नहीं पहुंचाए गए, तो हालात महामारी का रूप ले सकते हैं।
आपातकाल की घोषणा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगी गई मदद
संकट की भयावहता को देखते हुए देश की सरकार ने प्रभावित प्रांतों में आपातकाल (State of Emergency) लागू कर दिया है। सेना और आपदा प्रबंधन बलों को टैंकरों के जरिए प्रभावित कस्बों और गांवों तक आपातकालीन जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के काम में लगाया गया है, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और ईंधन की कमी के कारण सभी प्रभावित लोगों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और अंतरराष्ट्रीय दानदाता एजेंसियों से तत्काल मानवीय सहायता और आर्थिक पैकेज जारी करने की भावुक अपील की है। जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का यह प्रभाव आगामी महीनों में और अधिक विकराल हो सकता है, जिससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर तुरंत कदम उठाए जाने की दरकार है।