लड्डू गोपाल (कान्हा जी) की छठी 2026: पूजा विधि, शुभ समय, भोग और परंपराएं

लड्डू गोपाल (कान्हा जी) की छठी 2026: पूजा विधि, शुभ समय, भोग और परंपराएं

हिंदू धर्म और ब्रज संस्कृति में जिस तरह घर में नवजात शिशु के जन्म के ठीक छठे दिन नामकरण और छठी का उत्सव मनाया जाता है, उसी वात्सल्य और अपनत्व भाव से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के छठे दिन बाल गोपाल की छठी मनाई जाती है। इस दिन ठाकुर जी को परिवार के नन्हें बालक की तरह प्रेम और लाड-प्यार से नहलाया, सजाया और पूजा जाता है।

कितने बजे के बाद होती है कान्हा जी की छठी पूजा?

ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कान्हा जी की छठी का मुख्य पूजन शाम को 4 बजे के बाद (प्रदोष काल और गोधूलि बेला में) करना सबसे शुभ माना जाता है।

  • मुख्य पूजन समय: शाम 4:00 बजे के बाद से लेकर सूर्यास्त के समय तक (प्रदोष काल में)।

  • सुबह के समय ठाकुर जी का नित्य स्नान, पंचामृत अभिषेक, नए वस्त्र धारण कराना और हल्का भोग लगाया जाता है। इसके बाद शाम के समय परिवार सहित मुख्य पूजा, कढ़ी-चावल का महाभोग, सोहर-मंगलगीत और नजर उतारने की रस्म संपन्न की जाती है।

1. पंचामृत स्नान और गंगाजल से अभिषेक

छठी के दिन सुबह या पूजा से पहले लड्डू गोपाल के पुराने वस्त्र हटाकर उन्हें एक शुद्ध पात्र में बैठाएं। इसके बाद गाय के कच्चे दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से बने पंचामृत से उन्हें स्नान कराएं। इसके उपरांत शंख में शुद्ध गंगाजल भरकर अभिषेक करें और फिर मुलायम सूती वस्त्र से पोंछकर साफ करें।

2. पीले वस्त्र और दिव्य बाल शृंगार

छठी के दिन कान्हा जी को विशेष रूप से पीले रंग की नई पोशाक पहनाई जाती है, क्योंकि पीतांबर भगवान कृष्ण का सबसे प्रिय रंग है। पोशाक के बाद उन्हें मुकुट, मोरपंख, बाजूबंद, कुंडल, कमरबंद और उनकी प्रिय बांसुरी अर्पित करें। साथ ही उन्हें चंदन और गुलाब का सुगंधित इत्र जरूर लगाएं।

3. काजल की रस्म और नजर उतारना

शिशु परंपरा के अनुसार छठी के दिन बाल गोपाल की आंखों में घर का बना शुद्ध काजल या कान के पीछे छोटा सा काला टीका लगाया जाता है, ताकि उन्हें किसी की नजर न लगे। इसके बाद परिवार की महिलाएं राई-नमक या न्यौछावर के पैसे लेकर कान्हा जी के ऊपर से वारकर नजर उतारती हैं।

4. नामकरण संस्कार

यदि आप जन्माष्टमी पर ही लड्डू गोपाल को अपने घर लाए हैं, तो छठी के दिन उनका नामकरण करने की खास परंपरा है। इस दिन भगवान कृष्ण के 108 नामों में से कोई प्रिय नाम जैसे कान्हा, माधव, लल्ला, गोपाल या गोविंद चुनकर उन्हें उसी नाम से पुकारने का संकल्प लिया जाता है।

5. कढ़ी-चावल और माखन-मिश्री का महाभोग

कान्हा जी की छठी पर बिना लहसुन-प्याज वाली सात्विक कढ़ी और चावल का भोग लगाना सबसे अनिवार्य माना जाता है। दही और बेसन से बनी कढ़ी को सुपाच्य और शुद्ध माना गया है। इसके अलावा भोग में माखन-मिश्री, मखाने की खीर, धनिया की पंजीरी और ऋतु फल शामिल करें। सभी भोगों में तुलसी का पत्ता अवश्य रखें, क्योंकि बिना तुलसी दल के कान्हा जी भोग स्वीकार नहीं करते।

6. झूला झुलाना, सोहर-मंगलगीत और आरती

पूजा के उपरांत लड्डू गोपाल को सुंदर फूलों से सजे झूले पर बैठाकर धीरे-धीरे झुलाएं। घर की महिलाएं मिलकर कृष्ण जन्म के सोहर, बधाई गीत और भजन गाती हैं। इसके बाद पूरे परिवार के साथ मिलकर घी के दीपक से ठाकुर जी की आरती उतारें। मान्यता है कि इस दिन घर की चाबी लड्डू गोपाल के चरणों में स्पर्श कराकर रखने से घर में सालभर सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है।

Latest Posts