ट्रंप के कानून से बढ़ा तनाव: रूस की US को खुली चेतावनी, नए प्रतिबंधों से बिगड़ेगा यूक्रेन युद्ध का खेल

ट्रंप के कानून से बढ़ा तनाव: रूस की US को खुली चेतावनी, नए प्रतिबंधों से बिगड़ेगा यूक्रेन युद्ध का खेल

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच वैश्विक भू-राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान पर शिकंजा कसने के लिए एक अत्यंत व्यापक और आक्रामक प्रतिबंध विधेयक को हरी झंडी दिखा दी है। इस नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह असाधारण अधिकार दिया गया है कि वे रूसी तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक का दंडात्मक टैरिफ (शुल्क) लगा सकते हैं। इस विधेयक के पारित होते ही मॉस्को में खलबली मच गई है और क्रेमलिन ने वाशिंगटन को सीधे तौर पर खुली चेतावनी जारी कर दी है। रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका द्वारा आर्थिक दबाव बढ़ाने के ऐसे 'अमित्रतापूर्ण और शत्रुतापूर्ण' कदमों से यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाएं पूरी तरह पटरी से उतर जाएंगी।

अमेरिकी संसद से पारित हुआ 'लिंडसे ग्राहम एक्ट 2026', ट्रंप के पास पहुंचा बिल

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' को 262 के मुकाबले 159 मतों से पारित कर दिया। इससे पहले अगस्त में अमेरिकी सीनेट ने इसे 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दी थी। यह कानून दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इस विधेयक को तैयार करने में एक साल से अधिक समय तक बातचीत की थी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास उनके अंतिम हस्ताक्षर के लिए पहुंच चुका है। व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही इस पर दस्तखत कर इसे कानून का रूप दे सकते हैं। इस कानून का सीधा उद्देश्य रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध तंत्र की फंडिंग पर कड़ा प्रहार करना है, जिससे रूस को अपनी सैन्य कार्रवाइयों के लिए मिलने वाले राजस्व में भारी कटौती की जा सके।

क्या है इस कानून के सख्त प्रावधान और शैडो फ्लीट पर प्रहार?

यह नया कानून रूस के ऊर्जा, रक्षा, बैंकिंग और वित्तीय तंत्र को पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उनके करीबी सैन्य व राजनीतिक अधिकारियों, रूसी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निशाने पर लिया गया है। कानून का सबसे बड़ा वार रूस के उस गुप्त टैंकर बेड़े यानी 'शैडो फ्लीट' पर है, जिसके जरिए रूस पश्चिमी प्रतिबंधों और प्राइस कैप को धता बताकर दुनिया भर में कच्चा तेल बेचता रहा है। नए नियमों के तहत इन टैंकरों और उन्हें रसद व बीमा मुहैया कराने वाले विदेशी नेटवर्कों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, ईरान पर पहले से लागू मौजूदा प्रतिबंधों को भी अगले पांच सालों के लिए विस्तार देने का प्रावधान शामिल किया गया है। हालांकि, कानून में यह छूट दी गई है कि जो देश रूस की कुल प्राकृतिक गैस का 15% से कम हिस्सा खरीदते हैं और खरीद में ठोस कटौती कर रहे हैं, उन्हें टैरिफ से राहत मिल सकती है।

क्रेमलिन का तीखा पलटवार: 'बातचीत आसान नहीं, और पेचीदा होगी'

मॉस्को में नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान क्रेमलिन के मुख्य प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस अमेरिकी विधायी कदम पर कड़ा ऐतराज जताया। पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, "हम इस दस्तावेज और विधेयक की प्रगति पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। यह पूरी तरह से अमित्रतापूर्ण और शत्रुतापूर्ण कदमों की श्रेणी में आता है।" क्रेमलिन ने चेताया कि अमेरिका अगर यह सोचता है कि नए प्रतिबंधों और टैरिफ की धमकी से वह रूस को झुका देगा, तो यह उसकी बड़ी भूल है। पेस्कोव ने दो टूक कहा कि ऐसे एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों से यूक्रेन में किसी भी शांति समझौते की तलाश आसान होने के बजाय और अधिक जटिल व असंभव हो जाएगी। रूस का साफ मानना है कि जब कूटनीतिक वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी दूत मॉस्को और कीव का दौरा कर रहे थे, ऐसे समय में यह कानून शांति प्रक्रिया की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।

भारत और चीन पर 100% टैरिफ का खतरा, नई दिल्ली की ऊर्जा सुरक्षा पर नजर

इस कानून का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि इसमें रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले शीर्ष पांच आयातक देशों—चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान—पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति को सौंप दिया गया है। भारत और चीन वर्तमान में रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं। हालांकि, कानून स्वतः ही भारत पर यह शुल्क लागू नहीं करता, बल्कि यह ट्रंप को विवेकाधीन शक्ति देता है। इस घटनाक्रम पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। नई दिल्ली ने कहा है कि भारत अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वह राष्ट्रीय हितों व बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार तेल खरीद जारी रखेगा। जानकारों का मानना है कि यदि ट्रंप ने इस अधिकार का इस्तेमाल किया, तो भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में नया तनाव पैदा हो सकता है।

जेलेंस्की ने किया स्वागत, क्या सच में झुकेगा मॉस्को?

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी संसद के इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। जेलेंस्की ने अमेरिकी सांसदों का आभार जताते हुए कहा कि युद्ध के समय कुछ न करने से बेहतर है कि कड़े और निर्णायक कदम उठाए जाएं। यूक्रेन का मानना है कि रूस जब तक अपनी ऊर्जा बिक्री से अरबों डॉलर कमाता रहेगा, तब तक वह युद्ध के मैदान में अपने घातक हमलों को जारी रखेगा। लेकिन दूसरी ओर, अमेरिकी संसद के कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने भी आशंका जताई है कि राष्ट्रपति को मिले इतने असीमित टैरिफ अधिकारों का दुरुपयोग यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ भी हो सकता है, जिससे अमेरिका में ही महंगाई बढ़ सकती है। पांचवें साल में प्रवेश कर चुके इस विनाशकारी युद्ध में ट्रंप के इस नए कानून ने शांति की मेज पर बंदूक तान दी है, जिससे आने वाले दिनों में जंग का मैदान और अधिक हिंसक होने की आशंका बढ़ गई है।

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