8th Pay Commission: क्या सच में दोगुनी हो जाएगी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी? जानिए DA मर्जर और नए फिटमेंट फैक्टर का असली गणित
केंद्र सरकार के 50 लाख से अधिक कर्मचारियों और करीब 68 लाख पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर उत्सुकता चरम पर है। सोशल मीडिया और विभिन्न हलकों में यह दावा तेजी से घूम रहा है कि महंगाई भत्ते (Dearness Allowance - DA) के बेसिक पे में मर्जर और नए फिटमेंट फैक्टर के लागू होते ही कर्मचारियों की सैलरी सीधे दोगुनी हो जाएगी।
हालांकि, इस आकर्षक दावे के पीछे की तकनीकी और वित्तीय हकीकत काफी अलग है। वेतन आयोग के गठन के बाद विभिन्न कर्मचारी संघों और पेंशनर्स संगठनों ने अपनी मांगों का पिटारा आयोग के सामने रखा है, लेकिन सरकार और आयोग की सिफारिशों के बीच का गणित क्या कहता है, इसे समझना बेहद जरूरी है।
क्या है DA मर्जर का गणित? 50% के पार जाने पर क्या होता है?
5वें वेतन आयोग के दौरान यह नियम था कि जब महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता था, तो 50% डीए को बेसिक पे में मर्ज (Merge) कर दिया जाता था, जिससे बाकी भत्तों की गणना नए बढ़े हुए बेसिक पर होने लगती थी।
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7वें वेतन आयोग का रुख: 7वें वेतन आयोग ने 50% डीए के स्वतः मर्जर की इस पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर दिया था। इसके बजाय उन्होंने प्रावधान किया कि डीए 50% छूने पर हाउस रेंट अलाउंस (HRA), चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस (CEA) और ग्रेच्युटी की सीमा में स्वतः बढ़ोतरी हो जाएगी।
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8वें वेतन आयोग में मांग: मौजूदा समय में डीए 50% के आंकड़े को पार कर चुका है। कर्मचारी यूनियनों (जैसे NC-JCM और AIDEF) ने मांग रखी है कि 8वें वेतन आयोग की नई पे-मैट्रिक्स तय करते समय संचित डीए को बेसिक पे में समाहित किया जाए और नए वेतनमान के लागू होते ही डीए को दोबारा शून्य (0%) पर रीसेट किया जाए।
फिटमेंट फैक्टर: 1.92x से लेकर 3.83x तक की मांग
सैलरी बढ़ोतरी का सबसे मुख्य आधार फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) होता है, जिसे मौजूदा बेसिक पे से गुणा करके नया बेसिक पे निकाला जाता है।
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कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव: नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और रक्षा कर्मचारी महासंघों ने 8वें वेतन आयोग के सामने 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है। यदि यह मान लिया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹69,000 हो जाएगी।
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विशेषज्ञों का अनुमान: वित्तीय विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को देखते हुए 3.83 का मल्टीप्लायर मिलना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिखता। विश्लेषकों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग का वास्तविक फिटमेंट फैक्टर 2.10 से 2.46 के दायरे में तय हो सकता है।
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अगर 2.10 या 2.57 हुआ फिटमेंट फैक्टर:
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2.10 के फैक्टर पर न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹37,800 होगी।
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7वें वेतन आयोग की तरह 2.57 का फैक्टर मिलने पर न्यूनतम बेसिक करीब ₹46,260 तक पहुंचेगी।
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बेसिक पे दोगुनी होने और 'इन-हैंड सैलरी' में फर्क
कर्मचारियों को यह समझना होगा कि 'बेसिक सैलरी का दोगुना दिखना' और 'कुल इन-हैंड (ग्रॉस) सैलरी का दोगुना होना' दो अलग बातें हैं:
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डीए रीसेट का प्रभाव: वर्तमान में एक कर्मचारी को ₹18,000 बेसिक पे के साथ 50% से अधिक डीए (लगभग ₹9,000 से ₹10,000+) और एचआरए मिलता है।
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जब नया वेतनमान लागू होगा: अगर बेसिक पे बढ़कर ₹37,800 हो जाती है, तो उस पर मिलने वाला 55-60% डीए खत्म होकर 0% हो जाएगा।
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नेट हाइक का सच: इस तरह बेसिक पे तो ₹18,000 से बढ़कर ₹37,800 (लगभग दोगुनी से ज्यादा) दिखेगी, लेकिन कुल ग्रॉस सैलरी में होने वाली शुद्ध वास्तविक बढ़ोतरी (Net Take-Home Increase) लगभग 25% से 35% के बीच ही होगी।
कब तक आ सकती है 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वां वेतन आयोग विभिन्न हितधारकों, राज्य सरकारों, पेंशनर एसोसिएशनों और कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ लगातार परामर्श बैठकें कर रहा है।
आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए समय दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि सिफारिशें पूरी होने के बाद सरकार जब भी इसे अधिसूचित करेगी, इसे पूर्व प्रभाव से 1 जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है, जिससे कर्मचारियों को एरियर के रूप में बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकेगा। फिलहाल 'सैलरी दोगुनी' होने की बात महज कर्मचारी यूनियनों के अधिकतम प्रस्तावों और गणनाओं पर आधारित है, जिस पर अंतिम मुहर कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लगेगी।