Infosys Q2 Results: रेवेन्यू गाइडेंस घटाने से वॉल स्ट्रीट पर हाहाकार, इंफोसिस ADR करीब 7% धड़ाम

Infosys Q2 Results: रेवेन्यू गाइडेंस घटाने से वॉल स्ट्रीट पर हाहाकार, इंफोसिस ADR करीब 7% धड़ाम

भारत की दिग्गज आईटी सेवा प्रदाता कंपनी इंफोसिस (Infosys) के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के वित्तीय नतीजे सामने आने के बाद वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई है। भारतीय शेयर बाजार बंद होने के बाद जारी हुए नतीजों में शुद्ध मुनाफे और राजस्व में वृद्धि के बावजूद कंपनी द्वारा चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस में की गई कटौती ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का मूड बिगाड़ दिया। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) पर कारोबार के दौरान इंफोसिस का अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट (ADR) एक झटके में करीब 7 प्रतिशत तक टूट गया। इंफोसिस की इस सुस्ती का सीधा नकारात्मक असर देश की दूसरी प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो (Wipro) पर भी पड़ा और उसका एडीआर भी लगभग 4 प्रतिशत नीचे लुढ़क गया। चूंकि घरेलू बाजार शुक्रवार को बंद होने तक इन नतीजों से अनभिज्ञ थे और एनएसई पर इंफोसिस का शेयर 1,154 रुपये पर सपाट बंद हुआ था, ऐसे में अमेरिकी बाजार में मचे इस कोहराम का सीधा असर आगामी सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर खुलते ही भारतीय शेयर सूचकांकों और आईटी इंडेक्स पर देखने को मिलना तय माना जा रहा है।

वॉल स्ट्रीट पर इंफोसिस ADR 6.58% टूटा: विप्रो में भी भारी बिकवाली, 12.21 डॉलर के निचले स्तर तक फिसला भाव

न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान इंफोसिस के एडीआर में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। कारोबार समाप्त होने पर इंफोसिस का एडीआर 6.58 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 12.35 डॉलर पर बंद हुआ, जबकि सत्र के दौरान यह फिसलकर 12.21 डॉलर के निचले स्तर तक चला गया था। एडीआर वह वित्तीय साधन है जिसके माध्यम से विदेशी निवेशक अमेरिकी एक्सचेंजों पर भारतीय कंपनियों के शेयरों में सीधे ट्रेड करते हैं। इंफोसिस की इस नकारात्मक चाल ने पूरी भारतीय आईटी बास्केट पर दबाव बना दिया, जिसके चलते विप्रो का एडीआर भी 3.65 प्रतिशत गिरकर 2.11 डॉलर पर बंद हुआ। सत्र के दौरान विप्रो के भाव 2.08 डॉलर तक गिर गए थे। बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अमेरिकी बाजार में एडीआर की यह भारी पिटाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सोमवार सुबह 9:15 बजे जब मुंबई में घरेलू बाजार खुलेंगे, तो आईटी शेयरों में भारी गिरावट और घबराहट की स्थिति बन सकती है।

इस साल दूसरी बार रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस में कटौती: 1-2% के दायरे में सिमटी रफ्तार, मार्जिन 20-22% पर बरकरार

निवेशकों की इस गहरी निराशा और घबराहट की सबसे मुख्य वजह कंपनी द्वारा पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान को घटाना है। इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान को घटाकर मात्र 1 से 2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले कंपनी ने इसे 1.5 से 3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। स्थिर मुद्रा की गणना मुद्रा विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव को हटाकर कंपनी के वास्तविक कारोबारी प्रदर्शन का सटीक पैमाना मानी जाती है। चालू वित्त वर्ष में यह लगातार दूसरा मौका है जब कंपनी को अपने विकास लक्ष्यों में कटौती करनी पड़ी है। यह कदम साफ तौर पर संकेत देता है कि वैश्विक तकनीकी खर्च में जैसी रिकवरी की उम्मीद थी, वह धरातल पर नहीं उतर पा रही है। हालांकि, राहत की एकमात्र बात यह रही कि कंपनी ने अपने ऑपरेटिंग मार्जिन के अनुमान को 20 से 22 प्रतिशत के दायरे में अपरिवर्तित रखा है, जो यह दर्शाता है कि कंपनी लागत नियंत्रण के मोर्चे पर अभी भी मजबूती से टिकी हुई है।

दूसरी तिमाही में मुनाफा 6.2% बढ़ा: ₹7,823 करोड़ रहा नेट प्रॉफिट, लेकिन प्राइसिंग का भारी दबाव

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, सितंबर तिमाही में इंफोसिस का कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ 7,823 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 7,364 करोड़ रुपये था। वहीं कंपनी का कुल परिचालन राजस्व भी 10.7 प्रतिशत बढ़कर 49,244 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 44,490 करोड़ रुपये रहा था। इन सतही तौर पर बेहतर दिखने वाले आंकड़ों के बावजूद कंपनी के आंतरिक मार्जिन और वॉल्यूम ग्रोथ पर गंभीर दबाव देखा गया। कंपनी प्रबंधन ने स्वीकार किया कि कई प्रमुख सेक्टर्स में वॉल्यूम की कमजोरी, उम्मीद से कम सर्विस प्राइसिंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से मिल रही कड़ी टक्कर ने कंपनी की रफ्तार को धीमा किया है।

कॉनकॉल्स में सीएफओ जयेश संघराजका का खुलासा: नॉर्थ अमेरिका में सुस्ती, क्लाइंट्स मांग रहे कम दाम में ज्यादा काम

कंपनी की कॉन्फ्रेंस कॉल में शीर्ष प्रबंधन ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और ग्राहकों के व्यवहार पर खुलकर अपनी बात रखी। इंफोसिस के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) जयेश संघराजका ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच क्लाइंट्स अपने आईटी बजट को खर्च करने में अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं। आज कॉर्पोरेट क्लाइंट्स तकनीकी कंपनियों से अधिक उत्पादकता (Productivity) की उम्मीद कर रहे हैं और कम लागत पर अधिक काम निकालने का दबाव बना रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए अपनी बिलिंग दरों और सर्विस की कीमतों को बनाए रखना एक विकट चुनौती बन गया है। भौगोलिक दृष्टि से इंफोसिस के सबसे बड़े राजस्व स्रोत यानी उत्तरी अमेरिका (North America) का प्रदर्शन बेहद चिंताजनक रहा, जहां स्थिर मुद्रा आधार पर राजस्व में सालाना 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई। हाईटेक और रिटेल जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ग्राहकों ने अपनी परियोजनाओं को टाल दिया, हालांकि एनर्जी, यूटिलिटी और बैंकिंग-वित्तीय सेवाओं (BFSI) की मजबूत मांग ने कंपनी को बड़े झटके से बचाया।

5.2 अरब डॉलर के मेगा सौदे और AI में 29% उछाल: भविष्य के लिए उम्मीद की किरण

तमाम मौजूदा चुनौतियों और सुस्ती के बीच कुछ ऐसे सकारात्मक बिंदु भी हैं जो लंबी अवधि के निवेशकों को ढांढस बंधा सकते हैं। इंफोसिस ने इस तिमाही में कुल 5.2 अरब डॉलर के बड़े सौदे (लार्ज डील्स) हासिल करने में सफलता पाई है, जिनमें से 62 प्रतिशत सौदे पूरी तरह से नया कारोबार लेकर आए हैं। इनमें दो विशालकाय मेगा डील भी शामिल हैं, जिसमें एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय सेवा संस्थान के साथ सात साल की अवधि के लिए 2 अरब डॉलर से अधिक का ऐतिहासिक अनुबंध शामिल है। इसके अतिरिक्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी तिमाही में कंपनी के कुल राजस्व में एआई आधारित सेवाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 10.5 प्रतिशत हो गई, जिसमें तिमाही आधार पर 29 प्रतिशत का जबर्दस्त उछाल देखा गया। हालांकि, प्रबंधन का मानना है कि एआई का बढ़ता दायरा बेहद उत्साहजनक है, लेकिन फिलहाल यह पारंपरिक आईटी सेवाओं पर पड़ रहे भारी प्राइसिंग दबाव और समग्र कारोबारी मंदी की पूरी भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।