₹3 करोड़ से ₹4,925 करोड़ पहुंचा मार्केट कैप! धेनु बिल्डकॉन पर SEBI का बड़ा खुलासा, समझें ₹25 करोड़ को घुमाकर ₹1,000 करोड़ का लोन दिखाने का पूरा खेल
भारतीय शेयर बाजार के नियामक सेबी (SEBI - Securities and Exchange Board of India) ने एक स्मॉल-कैप लिस्टेड कंपनी धेनु बिल्डकॉन इंफ्रा (Dhenu Buildcon Infra) से जुड़े कथित वित्तीय हेरफेर और फंड रोटेशन के मामले में बड़ा खुलासा किया है। सेबी द्वारा जारी 112 पन्नों के अंतरिम आदेश में सामने आया है कि कंपनी का वास्तविक कारोबार और रेवेन्यू बेहद सीमित व नगण्य था, लेकिन इसके बावजूद कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) महज ₹3 करोड़ से बढ़कर ₹4,925 करोड़ तक पहुंच गया।
नियामक की जांच में यह बात सामने आई कि इस कृत्रिम मूल्यांकन और मूल्यांकन में तेजी लाने के लिए संबंधित संस्थाओं के बीच जटिल फंड रूटिंग का सहारा लिया गया।
समझिए ₹25 करोड़ से ₹1,000 करोड़ का कथित खेल
सेबी के प्रथम दृष्टया निष्कर्षों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में केवल ₹25 करोड़ की शुरुआती राशि का उपयोग करके ₹1,000 करोड़ के वित्तीय लेन-देन का आभास तैयार किया गया था:
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फंड की चक्रीय रोटेशन (Fund Rotation): सेबी के मुताबिक, ₹25 करोड़ की बेस रकम को बार-बार संबंधित पक्षों (Connected Entities) के बैंक खातों में तेजी से घुमाया गया।
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₹1,000 करोड़ का अनसिक्योर्ड लोन: इस चक्रीय लेन-देन (Layering) के जरिए खातों में ऐसा दिखाया गया मानो कंपनी को लगभग ₹1,000 करोड़ का अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan) मिला हो।
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इक्विटी में कन्वर्जन: इस कथित ₹1,000 करोड़ के कर्ज में से लगभग ₹840 करोड़ की राशि को बाद में प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential Allotment) के जरिए इक्विटी शेयरों में बदल दिया गया।
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मूल्यांकन में भारी उछाल: इसके परिणामस्वरूप शेयर की कीमत और कंपनी के मार्केट कैप में अभूतपूर्व उछाल दिखा, जिससे आम निवेशकों में कंपनी के आर्थिक रूप से मजबूत होने का भ्रम पैदा हुआ।
सेबी का कड़ा एक्शन, ट्रेडिंग और कॉरपोरेट एक्शन पर रोक
सेबी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई सख्त अंतरिम कदम उठाए हैं:
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ट्रेडिंग से प्रतिबंधित: मामले से जुड़े 6 व्यक्तियों और संबंधित संस्थाओं को धेनु बिल्डकॉन के शेयरों में किसी भी तरह के कारोबार (Trading) से तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
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कॉरपोरेट एक्शन पर पाबंदी: कंपनी को डिविडेंड, बोनस शेयर या राइट्स इश्यू जैसे किसी भी कॉरपोरेट एक्शन को अंजाम देने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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एक्सचेंजों को जांच के निर्देश: सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों को निर्देश दिया है कि वे सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) रूल्स और लिस्टिंग नियमों के अनुपालन की गहनता से पड़ताल करें।
सेबी ने स्पष्ट किया है कि ये अंतरिम आदेश और प्रथम दृष्टया निष्कर्ष हैं, जिनका उद्देश्य जांच पूरी होने तक बाजार की निष्पक्षता और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।