'रेवंत रेड्डी होते कौन हैं?' तेलंगाना के मुख्यमंत्री पर भड़कीं कैबिनेट मंत्री की बेटी, बताया- अहंकारी; सियासी घमासान तेज
तेलंगाना की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के भीतर आंतरिक मतभेद और गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ गई है। राज्य सरकार में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री की बेटी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के कार्यशैली, नेतृत्व और फैसलों पर सीधा हमला बोलते हुए तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने खुले तौर पर 'रेवंत रेड्डी होते कौन हैं?' कहकर मुख्यमंत्री के प्राधिकार को चुनौती दी और उन पर सत्ता के अहंकार में चूर होने का गंभीर आरोप लगाया है।
इस तीखे बयान के सामने आते ही तेलंगाना के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। विपक्षी दल जहां इसे कांग्रेस सरकार के भीतर गहराते असंतोष और अनुशासनहीनता का प्रमाण बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस नए विवाद से असहज नजर आ रहा है।
'रेवंत रेड्डी होते कौन हैं?': अहंकार और तानाशाही का लगाया आरोप
मंत्री की बेटी ने सार्वजनिक बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पार्टी के समर्पित, पुराने और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता मिलने के बाद मुख्यमंत्री का रवैया अहंकारी और मनमाना हो गया है। सरकार में शामिल मंत्रियों और उनके परिवारों के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कैडर की आवाज दबाई जा रही है।
उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है। दशकों से पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचने वाले नेताओं और उनके परिवारों को दरकिनार करके केवल अपनी निजी सत्ता का विस्तार करना कतई स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अपने अहंकारी रवैये में सुधार नहीं किया, तो उन्हें आने वाले दिनों में भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
मंत्रिमंडल और वरिष्ठ नेताओं में पनप रहा असंतोष
यह विवाद केवल एक पारिवारिक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तेलंगाना कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सुलग रहे असंतोष की ओर इशारा करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रेवंत रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही कांग्रेस के कई पुराने और वरिष्ठ नेताओं के बीच नाराजगी की सुगबुगाहट चल रही थी।
मंत्रियों के विभागों के कामकाज में दखलअंदाजी, ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार और स्थानीय प्रशासन में समन्वय की कमी को लेकर कई विधायक और मंत्री भीतर ही भीतर असहज महसूस कर रहे थे। कैबिनेट मंत्री के परिवार से सीधे मुख्यमंत्री पर इस तरह का खुला हमला होना दिखाता है कि अब यह खींचतान बंद कमरों से निकलकर सड़क तक पहुंच चुकी है।
विपक्षी दलों ने साधा निशाना: सरकार की स्थिरता पर खड़े किए सवाल
इस विवाद के बाद भारत राष्ट्र समिति (BRS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है। विपक्षी प्रवक्ताओं का कहना है कि जिस सरकार में कैबिनेट मंत्रियों के परिवार ही मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं कर रहे, वह सरकार राज्य की जनता का भला कैसे करेगी।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं और कांग्रेस नेता केवल आपसी वर्चस्व, कुर्सी की लड़ाई और सत्ता की मलाई बांटने में व्यस्त हैं। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि मुख्यमंत्री को सामने आकर अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
हाईकमान के सामने डैमेज कंट्रोल की बड़ी चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिल्ली में बैठे कांग्रेस आलाकमान के लिए स्थिति चिंताजनक बन गई है। पार्टी की राज्य प्रभारी और वरिष्ठ नेता अब इस मामले में डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को शांत करने और सार्वजनिक बयानबाजी पर रोक लगाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस असंतोष को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो यह गुटबाजी सरकार के कामकाज और आगामी राजनीतिक समीकरणों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी इस तीखे हमले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस अंतर्कलह को कैसे संभालता है।