दुकानदारों की मौज! अब PhonePe, Paytm और GPay के लिए नहीं चाहिए अलग-अलग Soundbox, NPCI के एक ही डिवाइस पर आएंगे सब Alert
भारत में डिजिटल क्रांति और यूपीआई (UPI) पेमेंट की रफ्तार ने छोटे किराना स्टोर से लेकर बड़े मॉल्स तक का हुलिया बदल दिया है। लेकिन इस डिजिटल बदलाव के बीच देश के करोड़ों छोटे दुकानदारों को एक बड़ी व्यावहारिक समस्या का सामना करना पड़ रहा था। ग्राहकों की सुविधा के लिए उन्हें अपने काउंटर पर अलग-अलग कंपनियों के कई QR कोड और तीन से चार तरह के साउंडबॉक्स (Soundbox) लटकाने पड़ते थे। इस झंझट और फिजूलखर्च को खत्म करने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। अब दुकानदारों को हर ऐप के लिए अलग साउंडबॉक्स रखने की मजबूरी से हमेशा के लिए आजादी मिलने वाली है।
काउंटर के झंझट और एक्स्ट्रा खर्च से मिलेगी परमानेंट आजादी
मौजूदा समय में डिजिटल पेमेंट मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। किसी दुकान पर Paytm का साउंडबॉक्स बोलता है, तो कहीं PhonePe और Google Pay के डिवाइस अलग से अलर्ट देते हैं। इन अलग-अलग डिवाइसेज की वजह से दुकानदारों के काउंटर पर न सिर्फ जगह की कमी हो जाती है, बल्कि उनका मासिक खर्च भी काफी बढ़ जाता है। अधिकांश फिनटेक कंपनियां हर एक साउंडबॉक्स के लिए 100 से 150 रुपये तक का मासिक सब्सक्रिप्शन चार्ज या किराया वसूलती हैं। ऐसे में अगर एक दुकानदार ने तीन कंपनियों के डिवाइस रखे हैं, तो उसे हर महीने 300 से 450 रुपये तक की चपत लगती है। NPCI का नया सिस्टम आने के बाद व्यापारियों को सिर्फ एक ही डिवाइस का खर्च उठाना होगा, जिससे उनकी बड़ी बचत तय है।
जानिए कैसे काम करेगा NPCI का यह नया ऑल-इन-वन साउंडबॉक्स प्लान
NPCI एक ऐसे बेहद एडवांस और इंटरऑपरेबल (Interoperable) साउंडबॉक्स सिस्टम को विकसित करने पर तेजी से काम कर रहा है, जो देश के सभी मुख्य UPI ऐप्स के साथ पूरी तरह कंपैटिबल होगा। इस नए इकोसिस्टम के लागू होते ही दुकानदार को अपनी दुकान में सिर्फ एक कॉमन साउंडबॉक्स लगाना होगा। इसके बाद ग्राहक चाहे Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM या किसी भी अन्य बैंक के ऑथराइज्ड यूपीआई ऐप से क्यूआर कोड स्कैन करके पेमेंट करे, दुकानदार को उसी इकलौते डिवाइस से तुरंत और सटीक पेमेंट रिसीव्ड होने की वॉयस कंफर्मेशन (आवाज में अलर्ट) मिल जाएगी।
ग्राहकों के लिए भी सुपरफास्ट और बेहद आसान हो जाएगा पेमेंट प्रोसेस
इस नए और सेंट्रलाइज्ड सिस्टम के आने से ग्राहकों के पेमेंट करने के मूल तरीके में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। वे अपनी पसंद और सहूलियत के हिसाब से अपने स्मार्टफोन में मौजूद किसी भी यूपीआई ऐप का इस्तेमाल बेझिझक कर सकेंगे। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दुकान के काउंटर पर क्यूआर कोड और डिवाइसेज की भारी भीड़ देखने को नहीं मिलेगी। सिंगल इंटरऑपरेबल डिवाइस होने की वजह से ट्रांजैक्शन की प्रोसेसिंग और वॉयस अलर्ट की स्पीड पहले से कहीं ज्यादा तेज और स्मूथ हो जाएगी। खासकर साप्ताहिक बाजारों, तंग गलियों की दुकानों और भारी भीड़भाड़ वाले मर्चेंट काउंटर्स पर यह तकनीक समय बचाने में गेमचेंजर साबित होगी।