राम मंदिर दान चोरी से बनाई करोड़ों की संपत्तियां: 74 हजार पन्नों की चार्जशीट में जमीन, मकान और गाड़ियों का ब्योरा

राम मंदिर दान चोरी से बनाई करोड़ों की संपत्तियां: 74 हजार पन्नों की चार्जशीट में जमीन, मकान और गाड़ियों का ब्योरा

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के चढ़ावे और दानपात्र से करोड़ों रुपये की चोरी के चर्चित मामले में नामजद आरोपियों पर कानून का शिकंजा कस गया है। पुलिस ने गहन विवेचना के बाद बुधवार को सक्षम अदालत में विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। पुलिस द्वारा अदालत में पेश की गई करीब 74 हजार पन्नों की इस भारी-भरकम रिपोर्ट में चौंकाने वाले वित्तीय खुलासे किए गए हैं। आरोप पत्र के अनुसार, आरोपियों ने श्रद्धालुओं द्वारा आस्था से चढ़ाए गए दान के पैसों का गबन कर न केवल अकूत वित्तीय लेन-देन किया, बल्कि अपने और अपने सगे-संबंधियों के नाम पर करोड़ों रुपये की चल और अचल संपत्तियां भी खड़ी कर लीं।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि 25 जून 2026 को थाना राम जन्मभूमि में मामला दर्ज किए जाने के बाद से ही आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय गतिविधियों, नकद लेन-देन और संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेजों का फॉरेंसिक व तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा था, जिसके आधार पर यह पुख्ता दस्तावेज तैयार किए गए हैं।

74 हजार पन्नों की चार्जशीट: जमीन, मकान और लग्जरी वाहनों का पूरा ब्योरा

पुलिस की ओर से अदालत में पेश किए गए आरोप पत्र में आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों का क्रमवार और तथ्यात्मक विवरण दर्ज किया गया है। विवेचना टीम ने पाया कि आरोपियों के खातों में संदिग्ध रूप से बड़ी मात्रा में नकद राशि जमा कराई गई और फिर उस रकम को संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में खपाया गया। आरोपियों ने मंदिर से चुराए गए धन से प्राइम लोकेशंस पर जमीनें, मकान, महंगी चार पहिया गाड़ियां और अन्य मूल्यवान वस्तुएं खरीदी थीं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, पुलिस ने इन आरोपों की पुष्टि के लिए अयोध्या समेत करीब एक दर्जन से अधिक जिलों के सरकारी उप-निबंधक कार्यालयों (रजिस्ट्री दफ्तरों), आरटीओ (परिवहन विभाग) और अन्य प्रशासनिक विभागों से आधिकारिक रिकॉर्ड जुटाए हैं। चार्जशीट में सभी अचल और चल संपत्तियों की प्रकृति, उनके खरीद दस्तावेज और उनसे संबंधित बैंक ट्रांजैक्शंस की तारीखवार कड़ियों को साक्ष्य के तौर पर जोड़ा गया है, जिससे यह साबित किया जा सके कि यह संपत्तियां अवैध रूप से जुटाए गए धन से ही अर्जित की गई थीं।

गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य बने मुख्य आधार

पुलिस ने मामले को अदालत में मजबूती से साबित करने के लिए दस्तावेजी सबूतों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी कलमबंद किए हैं। मंदिर परिसर के सुरक्षा कर्मियों, दान प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों और वित्तीय ऑडिट से जुड़े विशेषज्ञों के बयानों को चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों द्वारा चढ़ावे की रकम के हेरफेर और उससे संपत्ति खड़ी करने के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त और अकाट्य साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया के दौरान बेहद अहम साबित होंगे।

उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले में मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों जैसे चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम आरोपियों की सूची में शामिल नहीं है, बल्कि उन्हें अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह के तौर पर शामिल किया गया है।

ये आठ आरोपी हैं नामजद

राम जन्मभूमि थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े 8 प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था। इन आरोपियों में शामिल हैं:

  1. अविनाश शुक्ला

  2. अनुकल्प मिश्रा

  3. लवकुश मिश्रा

  4. मनीष कुमार यादव

  5. करुणेश पाण्डेय

  6. रमाशंकर मिश्रा

  7. सुभाष श्रीवास्तव

  8. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू

शुरुआती जांच के दौरान इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305, 306, 3016 (5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 13(1)ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जो मुख्य रूप से चोरी, आपराधिक षड्यंत्र और चोरी के माल से अवैध संपत्ति अर्जित करने से संबंधित हैं।

चार्जशीट में बदलीं धाराएं: आरोपियों को मिल सकता है कानूनी लाभ

आरोप पत्र दाखिल होने के साथ ही इस केस में एक नया कानूनी मोड़ भी सामने आया है। पुलिस ने जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट से बीएनएस (BNS) की धारा 305 और 306 को सभी आठों आरोपियों के ऊपर से हटा दिया है। इसके अतिरिक्त, आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के ऊपर लगी धारा 317(2) को भी हटा लिया गया है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि चार्जशीट में धाराओं में किए गए इस संशोधन और कुछ कड़े प्रावधानों के हटने के बाद अब बचाव पक्ष के वकीलों को अदालत में नए सिरे से जमानत याचिका (Bail Application) दाखिल करने का मजबूत आधार मिल सकता है। धाराओं में नरमी का लाभ आरोपियों को नियमित जमानत मिलने की प्रक्रिया में मिल सकता है। अब सभी की निगाहें अदालत में चार्जशीट के संज्ञान और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।