यूपी के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने डीएम-कमिश्नरों को दिए सख्त निर्देश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक चुस्त-दुरुस्त और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने राज्य के सभी मंडलायुक्तों (कमिश्नरों) और जिलाधिकारियों (डीएम) के साथ एक महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस मैराथन बैठक में मुख्य सचिव ने जनहित, विकास परियोजनाओं और राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव के तेवर बेहद सख्त नजर आए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को दो टूक निर्देश दिया कि शासन की प्राथमिकताओं और जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों को हर हाल में निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कराया जाए, किसी भी स्तर पर देरी या हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विशेष रूप से आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों, औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन, डॉ. आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना और पीएम सूर्यघर योजना की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फील्ड में तैनात प्रशासनिक अमला योजनाओं को फाइलों से निकालकर धरातल पर समयबद्ध तरीके से उतारे ताकि आम जनता को योजनाओं का सीधा और त्वरित लाभ मिल सके।
जनगणना-2027 की तैयारियां समय पर पूरी करने का अल्टीमेटम
मुख्य सचिव एसपी गोयल ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना-2027 के महत्वपूर्ण चरणों की समय सारिणी की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि इसकी सभी प्रशासनिक व जमीनी तैयारियां तय समय में पूर्ण करा ली जाएं। उन्होंने बताया कि इस बार जनगणना का स्वरूप आधुनिक और तकनीकी रूप से सुदृढ़ होगा।
योजना के तहत 16 से 30 नवंबर तक स्वगणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया संचालित की जाएगी। इसके बाद 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक प्रगणक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना (Door-to-Door Census) का कार्य करेंगे। वहीं, 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण राउंड चलेगा। मुख्य सचिव ने सभी डीएम को निर्देश दिया कि वे आम नागरिकों को स्वगणना के प्रति व्यापक रूप से जागरूक करें और ब्लॉक व तहसील स्तर पर तैनात कर्मियों के प्रशिक्षण कार्य को गुणवत्ता के साथ पूरा कराएं। इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही पर सीधे तौर पर संबंधित नोडल अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की गहन समीक्षा
बैठक में मुख्य सचिव ने 'डॉ. आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना' की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी विकास कार्यों को आगामी 31 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के स्थलों के सौंदर्यीकरण और विकास में किसी भी प्रकार की शिथिलता अक्षम्य होगी।
इसके साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना' की प्रगति पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने उन जिलों के जिलाधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई जहां प्रगति की रफ्तार धीमी पाई गई। उन्होंने निर्देश दिया कि धीमे काम वाले जनपदों में वेंडर्स को तत्काल सक्रिय किया जाए और बैंकों में लंबित पड़े ऋण (लोन) आवेदनों का निस्तारण अभियान चलाकर प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए 'श्रमिक सम्मान स्वास्थ्य शिविरों' का व्यापक आयोजन करने का आदेश दिया गया, जिसमें स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञ परामर्श, रेफरल सेवाएं और महिला श्रमिकों की विशिष्ट स्वास्थ्य जरूरतों का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
जनसुनवाई, आईजीआरएस और फील्ड अधिकारियों की जवाबदेही
मुख्य सचिव ने प्रशासन की कार्यशैली को पारदर्शी और संवेदनशील बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जिला स्तर के सभी अधिकारी नियमित रूप से कार्यालयों में बैठकर जनसुनवाई करें और पीड़ितों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनें। आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर आने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित होना चाहिए। शिकायतों को केवल निस्तारित दिखाने के लिए गैर-जरूरी तौर पर 'स्पेशल क्लोज' करने की प्रवृत्ति पर उन्होंने सख्त आपत्ति जताई और चेतावनी दी कि फर्जी निस्तारण करने वाले अफसरों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रतिदिन कम से कम 10 शिकायतकर्ताओं से स्वयं फोन पर फीडबैक लें। यदि किसी शिकायत के निस्तारण पर जनता का फीडबैक असंतोषजनक मिलता है, तो उसकी विशेष समीक्षा की जाए और दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुशासन का असली पैमाना जनता की संतुष्टि है और सरकार की मंशा के अनुरूप प्रत्येक नागरिक को पारदर्शी न्याय मिलना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य
बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रति तय प्रोटोकॉल और आचरण नियमों का अक्षरशः पालन करने की पुन: याद दिलाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसेवा में लगे जनप्रतिनिधियों के फोन कॉल को अटेंड करना अधिकारियों का दायित्व है। यदि किसी आवश्यक बैठक या व्यस्तता के कारण तत्काल फोन नहीं उठाया जा सका, तो बैठक खत्म होते ही पलटकर कॉल बैक करना अनिवार्य है।
इसके साथ ही, कार्यालय में आने वाले जनप्रतिनिधियों के साथ शालीन व्यवहार करने और उनके द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों को गंभीरता से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने चेतावनी दी कि प्रोटोकॉल उल्लंघन या उपेक्षा की शिकायत मिलने पर 'उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली' के तहत सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मुख्य सचिव का यह कड़ा और स्पष्ट संदेश उत्तर प्रदेश के समूचे प्रशासनिक अमले के लिए एक कड़ा दिशा-निर्देश है कि तय डेडलाइन के भीतर काम पूरा करना और जनता की समस्याओं का त्वरित हल निकालना ही उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए।