चीन से उठी आर्थिक चिंगारी ने मचाया वैश्विक बाजारों में कोहराम

चीन से उठी आर्थिक चिंगारी ने मचाया वैश्विक बाजारों में कोहराम

वैश्विक अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बार फिर से बहुत बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहे जाने वाले चीन से उपजी आर्थिक अनिश्चितताओं, सुस्त होती मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों और घरेलू व वैश्विक व्यापारिक तनावों की चिंगारी ने अब एशियाई बाजारों को अपनी चपेट में ले लिया है। इसका सबसे खतरनाक असर पड़ोसी देश साउथ कोरिया (South Korea) के शेयर बाजार पर देखने को मिला है, जहां मंगलवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही कोहराम मच गया। प्रमुख शेयर सूचकांकों में आई भारी और तेज गिरावट के कारण निवेशकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिससे बाजार की सांसे अटक गईं और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों को आनन-फानन में ट्रेडिंग को रोकना (Trading Halted) पड़ा।

बिकवाली का ऐसा सैलाब कि थर्रा उठा सियोल का कॉस्पी इंडेक्स

साउथ कोरिया के प्रमुख शेयर बाजार 'कोस्पी' (KOSPI) और टेक-हैवी 'कोस्काड' (KOSDAQ) इंडेक्स में अचानक हुई अंधाधुंध बिकवाली ने पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। बाजार खुलते ही निवेशकों ने अपने शेयर धड़ल्ले से बेचने शुरू कर दिए, जिससे चंद मिनटों के भीतर अरबों डॉलर का बाजार पूंजीकरण स्वाहा हो गया। चीन की ओर से आ रहे कमजोर आर्थिक आंकड़ों और वहां की सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों का सीधा नकारात्मक प्रभाव साउथ कोरिया की उन कंपनियों पर पड़ा है जो चीन को भारी मात्रा में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कच्चे माल का निर्यात करती हैं। जानकारों का कहना है कि चीन के बाजार में सुस्ती और मंदी के शुरुआती संकेतों ने एशियाई क्षेत्र के अन्य देशों के निर्यातकों की नींद उड़ा दी है, जिसका सीधा परिणाम शेयर बाजार के इस बड़े पतन के रूप में सामने आया है।

सर्किट ब्रेकर का इस्तेमाल, निवेशकों के डूबे करोड़ों रुपये

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दक्षिण कोरियाई स्टॉक एक्सचेंज के नियामकों को तुरंत सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) का इस्तेमाल करना पड़ा। बाजार में निवेशकों के भारी नुकसान और भगदड़ को रोकने के लिए कुछ समय के लिए ट्रेडिंग गतिविधियों को पूरी तरह से रोक दिया गया ताकि पैनिक सेलिंग (Panic Selling) पर लगाम लगाई जा सके। इस अचानक आई गिरावट से खुदरा निवेशकों के साथ-साथ बड़े संस्थागत निवेशकों को भी भारी आर्थिक चपत लगी है। विश्लेषकों का मानना है कि जब भी चीन की अर्थव्यवस्था में कोई बड़ा भूचाल आता है, तो उसका सीधा असर एशियाई आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) से जुड़े देशों जैसे दक्षिण कोरिया, जापान और ताइवान पर पड़ता है, क्योंकि ये देश चीन के साथ घनिष्ठ व्यापारिक रिश्तों से बंधे हुए हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर मंडराता नया संकट

इस पूरी घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि वैश्विक बाजार कितने अधिक परस्पर जुड़े हुए हैं। अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव के बीच अब एशियाई मोर्चे पर चीन की आर्थिक सुस्ती दुनिया भर के निवेशकों के लिए चिंता का सबसे बड़ा सबब बन गई है। ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, और मेटल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बीजिंग ने अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए जल्द ही कोई बड़े और ठोस प्रोत्साहन पैकेज (Stimulus Package) का ऐलान नहीं किया, तो आने वाले दिनों में न सिर्फ दक्षिण कोरिया बल्कि अन्य वैश्विक बाजारों में भी इस तरह के तीव्र उतार-चढ़ाव और मंदी का खतरा और अधिक गहरा सकता है।

निवेशकों के लिए सतर्क रहने की सलाह, आगे क्या होगी बाजार की चाल?

इस बड़े बाजार क्रैश के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों के जानकारों ने निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। अल्पावधि में बाजार की यह अस्थिरता निवेशकों के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है, इसलिए शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को अत्यधिक लीवरेज या बिना सोचे-समझे पोजीशन बनाने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय फंडामेंटली मजबूत कंपनियों पर नजर रखने का है। बहरहाल, चीन की चिंगारी से भड़की यह आर्थिक आग आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति और व्यापारिक नीतियों को किस दिशा में ले जाती है, इस पर सभी अर्थशास्त्रियों और निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है।