खुद को नास्तिक कहने वाले जावेद अख्तर ने लिखे बॉलीवुड के सबसे मशहूर भजन! 'ओ पालन हारे' से लेकर 'वो किसना है' तक, देखें ये 5 जादुई गाने
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी बेहतरीन और रूह को छू लेने वाले गीतों की बात होती है, तो पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित मशहूर गीतकार जावेद अख्तर का नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन उनके शानदार करियर का एक ऐसा पहलू भी है जो बेहद दिलचस्प और हर किसी को हैरान कर देने वाला है। जावेद अख्तर खुले तौर पर खुद को एक 'नास्तिक' यानी ईश्वर पर विश्वास न करने वाला इंसान कहते हैं। इसके बावजूद, उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए कुछ ऐसे अद्भुत और रूहानी भक्ति गीत लिखे हैं, जो आज भी करोड़ों लोगों की सुबह की प्रार्थना और मंदिरों का हिस्सा हैं। उनके लिखे भजनों में शब्दों का चयन और ईश्वर के प्रति जो समर्पण दिखता है, वह किसी को भी भावुक कर सकता है। आइए नजर डालते हैं जावेद अख्तर के कलम से निकले उन 5 मशहूर भक्ति गीतों पर जो आज भी हर दिल पर राज करते हैं।
1. वो किसना है (फिल्म: किसना द वारियर पोएट)
साल 2005 में आई विवेक ओबेरॉय और ईशा शरवानी की फिल्म 'किसना' का यह शीर्षक गीत भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है। खुद को नास्तिक कहने वाले जावेद अख्तर ने इस गाने में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं, उनकी अलौकिक सुंदरता और उनके नटखट स्वभाव का ऐसा सजीव और सुंदर वर्णन किया है कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता है। इस गाने को सुखविंदर सिंह ने अपनी दमदार आवाज से सजाया था, जबकि इसका जादुई संगीत इस्माइल दरबार ने तैयार किया था। आज भी जन्माष्टमी के त्योहार पर यह गाना हर जगह गूंजता है।
2. आया तेरे दर पर दीवाना (फिल्म: वीर-जारा)
शाहरुख खान और प्रीति जिंटा स्टारर ब्लॉकबस्टर फिल्म 'वीर-जारा' का नाम आते ही इसकी कालजयी कव्वाली 'आया तेरे दर पर दीवाना' जेहन में आ जाती है। फिल्म की कहानी के लिहाज से यह बेहद इमोशनल और महत्वपूर्ण मोड़ पर आने वाला गीत है, जो दरगाह की पृष्ठभूमि पर आधारित एक बेहतरीन सूफियाना और भक्ति रचना है। इसके गहरे और रूहानी बोल जावेद अख्तर ने लिखे थे। इस मशहूर कव्वाली को अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन ने अपने साथियों के साथ गाया था, जबकि इसका अमर संगीत दिवंगत संगीतकार मदन मोहन का था।
3. ओ पालन हारे और राधा कैसे न जले (फिल्म: लगान)
आमिर खान की ऑस्कर नामांकित फिल्म 'लगान' के ये दोनों ही गाने भारतीय संगीत जगत की अनमोल धरोहर हैं। 'ओ पालन हारे' को हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन और शुद्ध प्रार्थना गीतों में गिना जाता है, जिसमें सुख और दुख में ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करने की बात कही गई है। वहीं 'राधा कैसे न जले' में राधा-कृष्ण के प्रेम और नोकझोंक को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है। इन दोनों गीतों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें बॉलीवुड के तीन दिग्गज मुस्लिमों ने मिलकर तैयार किया था। इसके बोल जावेद अख्तर ने लिखे, इसका संगीत एआर रहमान ने दिया और इसे आवाज सुर कोकिला लता मंगेशकर और उदित नारायण ने दी थी।
4. मन मोहना (फिल्म: जोधा-अकबर)
ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय स्टारर ऐतिहासिक फिल्म 'जोधा-अकबर' का भजन 'मन मोहना' आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा है। फिल्म में जब राजकुमारी जोधाबाई (ऐश्वर्या राय) शादी के बाद अपने ससुराल यानी मुगल महल में आती हैं, तो वे अपनी कृष्ण भक्ति को कायम रखते हुए अपने मंदिर में इस भजन को गाती हैं। जावेद अख्तर ने इस गीत में भगवान कृष्ण के प्रति मीरा जैसी तड़प और भक्ति को शब्दों में पिरोया है। बेला शेंडे की सुरीली आवाज और एआर रहमान के रूहानी संगीत ने इस भजन को अमर बना दिया।
5. पल पल है भारी (फिल्म: स्वदेस)
शाहरुख खान की बेहतरीन फिल्मों में शुमार 'स्वदेस' का गाना 'पल पल है भारी' रामायण की एक बेहद भावुक परिस्थिति पर आधारित है। इस गाने में माता सीता को अशोक वाटिका में त्रिजटा और अन्य राक्षसियों के बीच घिरा हुआ दिखाया गया है, जहां वे व्याकुल होकर अपने प्रभु श्रीराम को याद कर रही हैं। जावेद अख्तर ने इस गाने में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के गुणों और माता सीता की अटूट श्रद्धा का ऐसा अद्भुत ताना-बाना बुना जो दिल को छू जाता है। इस गाने को आशुतोष गोवारिकर, मधुश्री और विजय प्रकाश ने मिलकर गाया था और संगीत एआर रहमान का था।
सलीम-जावेद की ब्लॉकबस्टर जोड़ी से लेकर 5 नेशनल अवार्ड्स तक का सफर
जावेद अख्तर केवल एक महान गीतकार ही नहीं हैं, बल्कि वे हिंदी सिनेमा के सबसे सफल पटकथा लेखकों में से एक रहे हैं। 70 और 80 के दशक में उन्होंने सुपरस्टार सलमान खान के पिता सलीम खान के साथ मिलकर 'सलीम-जावेद' की वो ऐतिहासिक जोड़ी बनाई, जिसने भारतीय सिनेमा का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया। इस जोड़ी ने 'जंजीर', 'दीवार', 'शोले' और 'डॉन' जैसी ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्में लिखीं, जिन्होंने अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' बनाया। बाद के दिनों में दोनों के रास्ते अलग हो गए, जिसके बाद जावेद अख्तर ने गीत लेखन की ओर रुख किया और वहां भी कामयाबी के झंडे गाड़े। सिनेमा में उनके इसी बेमिसाल योगदान के लिए उन्हें अब तक 5 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) और 15 फिल्मफेयर पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।