ऑपरेशन सफेद सागर: 'मैं उन गिने-चुने आम नागरिकों में से हूं...'; क्या एक्टर अभय वर्मा ने सच में उड़ाया वायुसेना का घातक फाइटर जेट MiG-21
बॉलीवुड में हॉरर-कॉमेडी फिल्म 'मुंज्या' की ऐतिहासिक और ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद युवा अभिनेता अभय वर्मा आज इंडस्ट्री के सबसे उभरते और प्रतिभाशाली सितारों में गिने जा रहे हैं। 'द फैमिली मैन 2' और 'ऐ वतन मेरे वतन' जैसी कृतियों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके अभय वर्मा अपनी सादगी और किरदारों के प्रति गहरी निष्ठा के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हाल ही में भारतीय वायुसेना के ऐतिहासिक अभियान 'ऑपरेशन सफेद सागर' और लड़ाकू विमान मिग-21 (MiG-21) को लेकर दिए गए उनके एक बयान ने रक्षा गलियारों से लेकर सिनेमा जगत तक भारी कौतूहल पैदा कर दिया है।
अभय वर्मा ने एक साक्षात्कार में यह दावा किया कि वे देश के उन बेहद गिने-चुने आम नागरिकों (Civilians) में शामिल हैं, जिन्हें भारतीय वायुसेना के दिग्गज सुपरसोनिक लड़ाकू विमान MiG-21 के कॉकपिट में बैठने और उसकी वास्तविक उड़ान व गतिशीलता को महसूस करने का दुर्लभ अवसर मिला है। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से वायरल होने लगा कि क्या सच में एक गैर-सैन्य नागरिक को वायुसेना का फ्रंटलाइन फाइटर जेट उड़ाने की अनुमति मिल सकती है?
क्या है अभय वर्मा का वह बयान, जिसने इंटरनेट पर मचाई सनसनी?
हाल ही में दिए गए एक विशेष मीडिया इंटरव्यू में अभय वर्मा अपने आगामी प्रोजेक्ट्स और भारतीय सेना के प्रति अपने विशेष लगाव पर खुलकर बात कर रहे थे। इसी दौरान 1999 के करगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए ऐतिहासिक 'ऑपरेशन सफेद सागर' का जिक्र छिड़ा।
अभय वर्मा ने बेहद गर्व और भावुकता के साथ बताया, "भारतीय वायुसेना का इतिहास अदम्य साहस और शौर्य की मिसालों से भरा है। मुझे इस बात का जीवनभर गर्व रहेगा कि मैं उन बेहद चुनिंदा भारतीय नागरिकों में से एक हूं, जिन्होंने भारतीय वायुसेना के मिग-21 लड़ाकू विमान के कॉकपिट का प्रत्यक्ष अनुभव लिया है। जब आप उस फाइटर जेट के अंदर बैठते हैं और सुपरसोनिक गति तथा जी-फोर्स (G-Force) के दबाव को महसूस करते हैं, तब आपको अहसास होता है कि हमारे वायुसेना के जांबाज पायलट किस असाधारण मानसिक और शारीरिक दबाव में देश की रक्षा करते हैं। यह अनुभव मेरे जीवन का सबसे जादुई और रोंगटे खड़े कर देने वाला पल था।"
अभय का यह बयान सामने आते ही दर्शकों के बीच यह बहस छिड़ गई कि क्या उन्होंने वास्तव में मिग-21 को हवा में उड़ाया था या फिर यह किसी विशेष प्रशिक्षण और सिमुलेशन का हिस्सा था।
क्या सच में कोई आम नागरिक उड़ा सकता है MiG-21? जानिए रक्षा नियम
भारतीय वायुसेना (IAF) और रक्षा मंत्रालय के कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी नागरिक को अकेले सुपरसोनिक लड़ाकू विमान (Fighter Aircraft) उड़ाने की अनुमति कभी नहीं दी जाती। लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए वर्षों के कठोर शारीरिक प्रशिक्षण, फ्लाइंग सिमुलेशन, एयरोस्पेस मेडिसिन टेस्ट और एयरफोर्स एकेडमी के कड़े मानकों को पास करना अनिवार्य होता है।
तो फिर अभय वर्मा के दावे की वास्तविक सच्चाई क्या है? रक्षा विशेषज्ञों और फिल्म जानकारों के अनुसार, अभय वर्मा का यह अनुभव दो-सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट (Twin-Seater Trainer Jet) या आधिकारिक ओरिएंटेशन सॉर्टी (Orientation Sortie) के तहत हुआ था। जब किसी विशेष देशभक्ति प्रोजेक्ट, सिनेमाई तैयारी या विशेष अनुमति के तहत किसी नागरिक को फाइटर जेट का अनुभव कराया जाता है, तो विमान के मुख्य कंट्रोल एक अनुभवी और वरिष्ठ फाइटर पायलट (कमांडिंग ऑफिसर या इंस्ट्रक्टर) के हाथ में होते हैं, जबकि को-पायलट सीट पर बैठे व्यक्ति को उड़ान की गति, ऊंचाई और जी-फोर्स का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जाता है।
इसके अलावा वायुसेना के अत्याधुनिक फ्लाइट सिमुलेटर (Flight Simulators) और कॉकपिट फैमिलराइजेशन सेशंस में भी चुनिंदा कलाकारों को किरदार की बारीकियों को समझने के लिए बिठाया जाता है। अभय ने उसी अभूतपूर्व अहसास का जिक्र करते हुए खुद को सौभाग्यशाली नागरिक बताया था।
ऑपरेशन सफेद सागर क्या था? जब करगिल की चोटियों पर गरजी थी वायुसेना
अभय वर्मा के इस बयान ने देशवासियों को एक बार फिर 1999 के करगिल युद्ध के उस गौरवशाली अध्याय की याद दिला दी, जिसे 'ऑपरेशन सफेद सागर' के नाम से जाना जाता है। मई 1999 में जब पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों ने करगिल, द्रास, तोलोलिंग और बटालिक की 16,000 से 18,000 फीट ऊंची बर्फीली चोटियों पर बंकर बनाकर कब्जा कर लिया था, तब भारतीय वायुसेना ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' का आगाज किया था।
यह दुनिया के सैन्य इतिहास में पहली बार था जब इतनी अत्यधिक ऊंचाई (Extreme High Altitude) और बेहद पतली हवा में लड़ाकू विमानों से सटीक लेजर-गाइडेड बमबारी की गई थी। इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में:
-
भारतीय वायुसेना के मिग-21 (MiG-21), मिराज-2000 (Mirage 2000) और मिग-27 (MiG-27) विमानों ने दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था।
-
टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर बनी दुश्मन की मुख्य सप्लाई लाइनों को सटीक एयरस्ट्राइक से तबाह कर दिया गया था।
-
मिग-21 के जांबाज पायलटों ने माइनस तापमान और दुर्गम घाटियों के बीच कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर दुश्मन के बंकरों की सटीक लोकेशन खोजी थी।
-
इस ऑपरेशन ने थल सेना के जांबाज सैनिकों के लिए चोटियों को पुनः फतह करने का रास्ता साफ किया और करगिल विजय की नींव रखी।
'मुंज्या' से स्टारडम तक: अभय वर्मा का मेथड एक्टिंग के प्रति समर्पण
हरियाणा के पानीपत से ताल्लुक रखने वाले अभय वर्मा ने बेहद कम उम्र में अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर हिंदी सिनेमा में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई है। फिल्म 'मुंज्या' में उनके सहज और हास्य-भावुक अभिनय ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ से अधिक का कारोबार कर सबको चौंका दिया था।
अभय उन अभिनेताओं में शुमार हैं जो किसी भी किरदार को केवल सतही तौर पर नहीं निभाते, बल्कि उसकी आत्मा में उतरने के लिए महीनों तक जमीनी स्तर पर मेहनत करते हैं। चाहे देशभक्ति से जुड़ा कोई गंभीर किरदार हो या किसी ऐतिहासिक घटना पर आधारित भूमिका, अभय उसके तकनीकी पहलुओं, बॉडी लैंग्वेज और मानसिक स्थिति को समझने के लिए गहन शोध करते हैं। वायुसेना और युद्ध के विषयों के प्रति उनका यह गहरा लगाव उनकी अभिनय कला को पर्दे पर और अधिक प्रामाणिक बनाता है।
सिनेमा में रियलिज्म का नया दौर: एक्टर्स ले रहे हैं रियल मिलिट्री ट्रेनिंग
अभय वर्मा का यह अनुभव इस बात को भी दर्शाता है कि आज के भारतीय सिनेमा में युद्ध और सेना से जुड़ी फिल्मों को बनाने के तौर-तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। अब फिल्मों में केवल ग्रीन स्क्रीन या वीएफएक्स (VFX) के भरोसे काम नहीं चलाया जाता, बल्कि कलाकारों को वास्तविक सैन्य अकादमियों और बेस पर जाकर हफ्तों की ट्रेनिंग दी जाती है।
ऋतिक रोशन ('फाइटर'), विक्की कौशल ('उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' और 'सैम मानेकशॉ'), कंगना रनौत ('तेजस') और जाह्नवी कपूर ('गुंजन सक्सेना') जैसे कई सितारों ने अपनी फिल्मों से पहले वायुसेना और थलसेना के ट्रेनिंग कैंप्स में समय बिताया है, ताकि वे सैन्य अनुशासन, विमान की कार्यप्रणाली और पायलटों के हाव-भाव को पर्दे पर हूबहू उतार सकें। अभय वर्मा की यह तैयारी भी भारतीय सेना और वायुसेना के पराक्रम को स्क्रीन पर पूरी गरिमा और सच्चाई के साथ पेश करने की इसी नई सिनेमाई क्रांति का हिस्सा है।
अभय वर्मा का यह बयान न केवल उनके अभिनय के प्रति समर्पण को दर्शाता है, बल्कि 1999 के उन वीर वायु योद्धाओं के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि भी है जिन्होंने अपने पराक्रम से करगिल की चोटियों पर तिरंगा लहराया था। उनके इस खुलासे ने दर्शकों के भीतर उनके आगामी प्रोजेक्ट्स और किरदारों को लेकर उत्सुकता को चरम पर पहुंचा दिया है।