गोविंदा के पतन के लिए सिद्धिविनायक से हाजी अली तक पैदल मन्नत मांगने वाली रहस्यमयी औरत का सच
बॉलीवुड के 90 के दशक के बेताज बादशाह और 'कॉमेडी किंग' गोविंदा का स्टारडम एक समय ऐसा था कि बड़े-बड़े सितारे उनके सामने अपनी फिल्में रिलीज करने से कतराते थे। फर्श से अर्श तक का सफर अपनी मेहनत, डांस और स्वाभाविक अभिनय के दम पर तय करने वाले गोविंदा ने जितना प्यार और शोहरत कमाई, उतना ही गहरा अंधेरा उन्होंने अपने करियर के ढलान पर देखा। लेकिन क्या किसी की बर्बादी के पीछे सिर्फ गलत फैसले या वक्त का फेर होता है, या फिर इसके पीछे किसी की घोर नफरत और बददुआएं भी काम करती हैं? गोविंदा ने खुद अपने एक पुराने और चौंकाने वाले इंटरव्यू में इस बात का सनसनीखेज खुलासा किया था कि एक महिला उनके करियर और जीवन को तबाह करने के लिए इस हद तक पागल थी कि वह उनके पतन की दुआ मांगते हुए मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर से हाजी अली दरगाह तक नंगे पैर पैदल जाया करती थी।
खुद गोविंदा ने किया था उस महिला और उसकी बददुआओं का खुलासा
यह चौंकाने वाला किस्सा तब सामने आया जब गोविंदा ने एक प्रमुख टीवी शो और साक्षात्कार के दौरान अपने करियर में अचानक आई गिरावट और मुश्किल दिनों पर खुलकर बात की थी। गोविंदा ने बताया था कि जब वे सफलता के शीर्ष पर थे, तब फिल्म इंडस्ट्री के अंदर और बाहर कुछ ऐसे लोग भी थे जो उनकी कामयाबी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। अभिनेता के मुताबिक, उन्हें अपने करीबी सूत्रों और जानने वालों से यह बात पता चली थी कि एक महिला उनसे इतनी ज्यादा नफरत करने लगी थी कि उसने गोविंदा के सर्वनाश का संकल्प ले लिया था। वह महिला नियमित रूप से प्रभादेवी स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक गणपति मंदिर जाती थी और वहां से पैदल चलकर वर्ली स्थित हाजी अली दरगाह तक जाती थी, सिर्फ और सिर्फ यह मन्नत मांगने के लिए कि "गोविंदा पूरी तरह बर्बाद हो जाएं और उनका नामो-निशान मिट जाए।"
कौन थी वो महिला और क्यों थी गोविंदा से इतनी नफरत?
गोविंदा ने मर्यादा और कानूनी पेचीदगियों के चलते कभी भी उस महिला के नाम का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया। हालांकि, उनके बयानों और उस दौर के बॉलीवुड के घटनाक्रमों को जोड़ने वाले विश्लेषकों का मानना है कि यह महिला फिल्म इंडस्ट्री के ही किसी बेहद प्रभावशाली परिवार या प्रोडक्शन हाउस से ताल्लुक रखती थी। 90 के दशक के आखिर और 2000 की शुरुआत में गोविंदा की कार्यशैली, सेट पर घंटों देरी से पहुंचने की आदत और कई निर्माताओं के साथ हुए तीखे मतभेदों की वजह से कई लोग उनके खिलाफ हो गए थे। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कयास लगाए गए कि यह किसी निजी संबंध, एकतरफा लगाव या किसी बड़े व्यावसायिक धोखे के चलते उपजी व्यक्तिगत रंजिश थी। गोविंदा ने बस इतना स्पष्ट किया था कि वह कोई अनजान सड़क चलती महिला नहीं थी, बल्कि उनकी जिंदगी और सर्कल से जुड़ी ऐसी शख्सियत थी जो उनसे बेहद नाराज और आहत थी।
क्या सच में उस नफरत और तंत्र-मंत्र का गोविंदा के करियर पर पड़ा असर?
गोविंदा खुद को बेहद धार्मिक और आध्यात्मिक इंसान मानते हैं। उन्होंने कई मौकों पर स्वीकार किया कि जब कोई आपके खिलाफ इतनी नकारात्मक ऊर्जा और बददुआएं भेजता है, तो उसका असर आपकी जिंदगी पर जरूर पड़ता है। साल 2000 के बाद गोविंदा का करियर अचानक ऐसी ढलान पर आया जहां से वापसी करना उनके लिए नामुमकिन सा हो गया। उनकी कई बड़ी फिल्में लगातार फ्लॉप हुईं, निर्माता-निर्देशकों ने उनसे किनारा कर लिया और वे गहरे वित्तीय संकट में घिर गए। गोविंदा ने एक बार कहा था, "जब आपके अपने और आपके आसपास के लोग ही आपके खात्मे की दुआएं मांगने लगें, तो इंसान अंदर से टूटने लगता है। मेरे साथ कई अजीब और मनहूस घटनाएं हुईं जिनका कोई तार्किक जवाब नहीं था।"
मां की प्रार्थनाओं ने बनाया रक्षा कवच
गोविंदा ने हमेशा यह माना कि अगर वे उस दौर के भयंकर षड्यंत्रों, नफरत और मानसिक तनाव से जिंदा बचकर बाहर निकल पाए, तो इसके पीछे उनकी स्वर्गीय मां निर्मला देवी का आशीर्वाद और उनकी साधना थी। गोविंदा ने कहा, "एक तरफ वो औरत थी जो मेरी बर्बादी के लिए मंदिर और दरगाहों के चक्कर काट रही थी, तो दूसरी तरफ मेरी मां की अखंड प्रार्थनाएं और गायत्री मंत्र का जाप था। ऊपर वाले की अदालत में सच की ही जीत होती है। मुझ पर जितने भी वार किए गए, ऊपर वाले ने मुझे हर बार गिरने के बाद दोबारा खड़ा होने की हिम्मत दी।" यह वाकया बॉलीवुड की चकाचौंध के पीछे छिपे काले सच, ईर्ष्या और नफरत की एक ऐसी डरावनी तस्वीर पेश करता है जिसे सुनकर आज भी फैंस दंग रह जाते हैं।