पानी की एक घूंट पीते ही भागना पड़ता है टॉयलेट? कहीं शुगर या इन्फेक्शन तो नहीं वजह...
दिन भर में पर्याप्त पानी पीना सेहत के लिए वरदान माना जाता है, लेकिन अगर पानी की एक घूंट हलक से नीचे उतरते ही आपको सीधे वॉशरूम की तरफ भागना पड़ता है, तो यह स्थिति सामान्य नहीं है। कई लोग इसे केवल यह सोचकर टाल देते हैं कि वे पानी ज्यादा पी रहे हैं, इसलिए पेशाब भी ज्यादा आ रही है। मगर जब यह समस्या इतनी बढ़ जाए कि हर आधे घंटे में टॉयलेट जाना पड़े, ऑफिस मीटिंग्स या सफर के दौरान बेचैनी होने लगे और रात को बार-बार पेशाब के दबाव से नींद टूटने लगे, तो सतर्क होना बेहद जरूरी है। हमारे शरीर में ब्लैडर यानी मूत्राशय का काम पेशाब को कुछ घंटों तक आराम से रोक कर रखना होता है। अगर पानी पीते ही तुरंत तेज दबाव महसूस होने लगे, तो इसका साफ मतलब है कि शरीर का यूरिनरी सिस्टम किसी अंदरूनी गड़बड़ी की तरफ इशारा कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या लाइफस्टाइल में अत्यधिक कैफीन के सेवन से लेकर खून में बढ़ी हुई शुगर, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी यूटीआई या फिर प्रोस्टेट और किडनी के असंतुलन से जुड़ी हो सकती है। इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सही मेडिकल जांच कराना ही बुद्धिमानी है।
डायबिटीज का प्राथमिक अलार्म: कहीं खून में अनियंत्रित तो नहीं हो गई है शुगर
बार-बार पेशाब आने की सबसे बड़ी और आम वजहों में से एक है अनियंत्रित ब्लड शुगर या डायबिटीज। जब शरीर के खून में ग्लूकोज की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो किडनी पर उस अतिरिक्त शुगर को फिल्टर करके बाहर निकालने का भारी दबाव पड़ता है। इस प्रक्रिया में किडनी शरीर के टिश्यूज से पानी खींचकर पेशाब के रास्ते शुगर को बाहर फेंकने लगती है, जिसे मेडिकल भाषा में पॉलीयूरिया कहा जाता है। इसके चलते मरीज को बार-बार तेज पेशाब लगती है और शरीर में पानी की कमी होने से बार-बार गला सूखने और तेज प्यास लगने की समस्या भी पैदा हो जाती है। अगर आपको पेशाब की फ्रीक्वेंसी बढ़ने के साथ-साथ असामान्य प्यास, अचानक वजन घटना या दिन भर थकान महसूस हो रही है, तो सबसे पहले डायबिटीज की जांच करानी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर मुख्य रूप से फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्ट प्रैंडियल शुगर और सबसे अहम HbA1c टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। HbA1c टेस्ट से यह साफ हो जाता है कि पिछले दो से तीन महीनों में आपके शरीर का औसत शुगर लेवल क्या रहा है। समय पर इस टेस्ट को करा लेने से प्रीडायबिटीज के दौर में ही बीमारी को पकड़कर जीवनशैली में बदलाव से संभाला जा सकता है।
यूरिन इन्फेक्शन और कमजोर धार: यूरिन रूटीन और यूरोफ्लोमेट्री टेस्ट से पकड़ें जड़
अगर बार-बार पेशाब आने के साथ आपको निचले पेट में भारीपन, पेशाब करते समय तेज जलन, चुभन, तीखी बदबू या बूंद-बूंद करके यूरिन आने की शिकायत हो रही है, तो यह सीधा यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी यूटीआई का संकेत है। बैक्टीरिया के संक्रमण की वजह से ब्लैडर की भीतरी परत में सूजन आ जाती है, जिससे थोड़ा सा पेशाब इकट्ठा होते ही दिमाग को तेज संकेत जाने लगता है। ऐसे में डॉक्टर सबसे पहले यूरिन रूटीन एंड माइक्रोस्कोपी टेस्ट कराने को कहते हैं, जिससे मवाद की कोशिकाओं यानी पस सेल्स और इन्फेक्शन की तीव्रता का पता चलता है। यदि इन्फेक्शन बार-बार लौट रहा हो, तो यूरिन कल्चर टेस्ट किया जाता है ताकि यह पता चले कि कौन सा बैक्टीरिया मौजूद है और उस पर कौन सी सटीक एंटीबायोटिक असर करेगी। इसके अलावा कई मरीजों, खासकर 45-50 साल से ऊपर के पुरुषों में यह देखा जाता है कि वे यूरिन पास करने जाते हैं लेकिन धार बहुत कमजोर होती है और बाहर आने के बाद भी लगता है कि पेट पूरी तरह खाली नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में यूरोलॉजिस्ट यूरोफ्लोमेट्री टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के जरिए पोस्ट-वॉयड रेजिडुअल यूरिन की जांच करते हैं, जिससे यह साफ होता है कि कहीं प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने या मूत्र नली में रुकावट के कारण ब्लैडर में यूरिन अटक तो नहीं रहा।
किडनी की कार्यप्रणाली पर नजर: चेहरे और पैरों की सूजन को कतई न करें अनदेखा
अक्सर लोगों के मन में यह डर बैठ जाता है कि बार-बार पेशाब आने का मतलब उनकी किडनी खराब हो चुकी है, जबकि हर मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। फिर भी, किडनी हमारे शरीर का मुख्य फिल्टर प्लांट है, इसलिए उसकी सेहत की तस्दीक करना बेहद आवश्यक है। यदि बार-बार पेशाब आने के साथ-साथ सुबह उठने पर आपकी आंखों के नीचे भारीपन, चेहरे पर सूजन, टखनों या पैरों में सूजन नजर आ रही हो, या पेशाब में बहुत ज्यादा झाग बन रहा हो, तो तुरंत किडनी फंक्शन टेस्ट यानी केएफटी कराया जाना चाहिए। इस ब्लड टेस्ट में सीरम क्रिएटिनिन, ब्लड यूरिया और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच की जाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों किडनियां खून को ठीक से साफ कर पा रही हैं या नहीं। अल्ट्रासाउंड केयूबी के जरिए किडनी के आकार और उसमें किसी पथरी या रुकावट की मौजूदगी की भी पुष्टि हो जाती है। घबराने या बिना सोचे-समझे इंटरनेट से दवाएं खोजने के बजाय इन बुनियादी जांचों की रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाना ही सुरक्षित रास्ता है।
डॉक्टर के पास जाने से पहले तैयार करें अपनी यूरिन डायरी, ये लक्षण दिखें तो तुरंत लें इमरजेंसी मदद
जब भी आप किसी फिजिशियन या यूरोलॉजिस्ट के पास जाएं, तो केवल यह कहने के बजाय कि पेशाब ज्यादा आती है, अपनी आदतों का एक सटीक ब्योरा साथ रखें। आप दिन भर में लगभग कितने गिलास पानी, चाय या कॉफी पीते हैं, 24 घंटे में कितनी बार टॉयलेट जाते हैं और क्या रात में नींद से उठकर दो से ज्यादा बार जाना पड़ता है—यह छोटी-छोटी बातें डॉक्टर को सही डायग्नोसिस तक पहुंचने में बहुत मदद करती हैं। खुद से मेडिकल स्टोर से कोई भी ओवर-द-काउंटर एंटीबायोटिक या देसी काढ़ा शुरू न करें, क्योंकि गलत दवाओं से बैक्टीरिया में रेजिस्टेंस पैदा हो सकता है। इसके साथ ही कुछ बेहद गंभीर रेड-फ्लैग लक्षणों के प्रति हमेशा सतर्क रहें। अगर पेशाब में लाल या गुलाबी रंग का खून दिखाई दे, तेज कंपकंपी के साथ बुखार चढ़ जाए, कमर के निचले हिस्से में असहनीय दर्द उठे या पेशाब का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाए और तीव्र दबाव के बावजूद बूंद भी न निकले, तो इसे बिल्कुल न टालें और तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में संपर्क करें।