बारिश के मौसम में आपका बच्चा भी हो रहा है बार-बार बीमार? डॉक्टर से जानें ये 7 असरदार पैरेंटिंग टिप्स जो बच्चे को रखेंगे बीमारियों से दूर
मानसून की बारिश जहां एक तरफ भीषण गर्मी और उमस से राहत दिलाती है, वहीं दूसरी तरफ यह मौसम अपने साथ ढेरों बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस मौसम में वातावरण में नमी और आर्द्रता (Humidity) का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण हवा, पानी और भोजन में बैक्टीरिया, वायरस तथा फंगस तेजी से पनपने लगते हैं। इस मौसम का सबसे ज्यादा और सीधा असर छोटे बच्चों की सेहत पर देखने को मिलता है। चूंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वयस्कों की तुलना में कम विकसित और नाजुक होता है, इसलिए वे बारिश के दिनों में बहुत जल्दी इंफेक्शन की चपेट में आ जाते हैं। मानसून के आते ही बच्चों में सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, पेट में दर्द, दस्त, उल्टी, डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी समस्याओं के मामले अस्पतालों और क्लिनिकों में तेजी से बढ़ने लगते हैं। यदि आपका बच्चा भी इस मानसूनी मौसम में बार-बार बीमार पड़ रहा है, तो आपको घबराने के बजाय अपनी दिनचर्या और बच्चे की देखभाल के तरीकों में थोड़ा बदलाव करने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) के अनुसार, कुछ छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर माता-पिता अपने बच्चों को बारिश के दिनों में भी पूरी तरह से स्वस्थ, एक्टिव और तंदुरुस्त रख सकते हैं। आइए जानते हैं वे 7 सबसे कारगर और जरूरी बातें जिनका ध्यान हर माता-पिता को बारिश के मौसम में जरूर रखना चाहिए।
1. हमेशा उबला या फ़िल्टर किया हुआ शुद्ध पानी ही पिलाएं
बारिश के मौसम में पानी से पैदा होने वाली बीमारियों (Water-borne diseases) का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। मानसूनी बारिश के दौरान पीने के पानी के मुख्य स्रोतों में सीवर या गंदे नाले का पानी मिलने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे जल में ई-कोलाई, साल्मोनेला जैसे खतरनाक जीवाणु आ जाते हैं। यही गंदा पानी बच्चों में टाइफाइड, हैजा, पीलिया (Jaundice) और गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का इंफेक्शन) का मुख्य कारण बनता है। इसलिए बारिश के पूरे मौसम में बच्चे को कभी भी सीधे नल का पानी न पिलाएं। पानी को हमेशा कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह उबालें और फिर उसे ठंडा करके छानकर ही बच्चे को पीने के लिए दें। उबला हुआ पानी पानी में मौजूद सभी तरह के हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को पूरी तरह खत्म कर देता है। यदि आप कहीं बाहर भी जा रहे हैं, तो अपने घर से ही उबला हुआ पानी बोतल में साथ लेकर निकलें ताकि बच्चे को बाहर का दूषित पानी न पीना पड़े।
2. बाहर के बासी भोजन और कटे हुए फलों से पूरी तरह परहेज रखें
मानसून में नमी के कारण भोजन बहुत जल्दी खराब होने लगता है और उसमें फंगस व बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इस मौसम में सड़क किनारे मिलने वाले खुले स्ट्रीट फूड, चाट-पकोड़े, गोलगप्पे, खुले में बिकने वाले जूस और कटे हुए फलों का सेवन बच्चों की सेहत के लिए घातक साबित हो सकता है। रास्ते में मिलने वाले कटे हुए फलों पर मक्खियां बैठती हैं, जो हैजा और दस्त के बैक्टीरिया फैलाती हैं। बच्चे को हमेशा घर का बना हुआ गरमा-गरम और ताजा सात्विक भोजन ही खाने को दें। फ्रिज में लंबे समय तक रखा हुआ बासी खाना या रात की बची हुई सब्जियों को दोबारा गर्म करके बच्चे को देने से बचें। इसके अलावा, बच्चे के टिफिन में भी ऐसी चीजें रखें जो लंबे समय तक ताजी रह सकें और नमी के कारण खराब न हों।
3. मच्छरों से सुरक्षा और घर के आसपास जलभराव न होने दें
बारिश के पानी का जगह-जगह इकट्ठा होना मच्छरों के पनपने के लिए सबसे मुफीद माहौल तैयार करता है। डेंगू, मलेरिया और चिकगुनिया जैसी गंभीर बीमारियां केवल मच्छरों के काटने से ही फैलती हैं। बच्चों की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है और मच्छर उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। इसलिए माता-पिता की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे घर के आसपास, गमलें, कूलर, पुरानी टंकियों या टायरों में पानी जमा न होने दें। बच्चे को बाहर खेलने भेजते समय हमेशा पूरी आस्तीन वाले (फुल स्लीव) सूती कपड़े ही पहनाएं। इसके साथ ही, बच्चों के लिए सुरक्षित मॉस्किटो रिपेलेंट पैच, रोल-ऑन या फैब्रिक रोल का इस्तेमाल करें। रात में सोते समय बच्चे के बिस्तर पर मच्छरदानी का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित और बेहतरीन तरीका है।
4. गीले कपड़ों, सीलन और फंगल इंफेक्शन से बचाएं
मानसून के दिनों में बच्चे अक्सर बारिश में भीगना पसंद करते हैं या खेल-कूद के दौरान उनके कपड़े पसीने और नमी से गीले हो जाते हैं। गीले कपड़ों में लंबे समय तक रहने से शरीर का तापमान तेजी से गिरता है, जिससे बच्चे को तुरंत ठंड लग जाती है और वह सर्दी-जुकाम या निमोनिया का शिकार हो सकता है। इसके अलावा, त्वचा पर नमी बने रहने से जांघों, कांख और उंगलियों के बीच फंगल इंफेक्शन (Ringworm, Rash) होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए बारिश में भीगने के तुरंत बाद बच्चे को सादे पानी से नहलाएं, उसके शरीर को तौलिए से अच्छी तरह सुखाएं और बिल्कुल सूखे व साफ कपड़े पहनाएं। बच्चे के जूतों और मोजों पर भी विशेष ध्यान दें; गीले जूते-मोजे पहनाने से बच्चे के पैरों में इंफेक्शन और त्वचा की रंगत खराब होने का खतरा रहता है।
5. व्यक्तिगत स्वच्छता और हैंड हाइजीन की आदत डालें
बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए पर्सनल हाइजीन सबसे मजबूत ढाल का काम करती है। छोटे बच्चे खेलते समय हर तरह की चीजों को छूते हैं और फिर उन्हीं गंदे हाथों से खाना खा लेते हैं या चेहरे, नाक और आंखों को छूते हैं। इससे हाथों में चिपके लाखों रोगाणु सीधे बच्चे के पेट और श्वसन तंत्र में प्रवेश कर जाते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चे को नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने की आदत डालें। विशेष रूप से खाना खाने से पहले, बाहर से खेल कर आने के बाद और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना अनिवार्य बनाएं। बच्चे के नाखूनों को हर हफ्ते छोटा रखें और नियमित रूप से काटें, क्योंकि कटे हुए नाखूनों के अंदर जमी गंदगी में बैक्टीरिया आसानी से पनपते हैं।
6. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने वाला पोषण दें
यदि बच्चे की आंतरिक इम्युनिटी मजबूत होगी, तो उसका शरीर मौसमी बैक्टीरिया और वायरस से खुद-ब-खुद लड़ लेगा। बारिश के दिनों में बच्चे की डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें जो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं। बच्चे को सुबह या रात में सोने से पहले हल्का गर्म हल्दी वाला दूध (Turmeric Milk) दें। हल्दी में मौजूद कुरकुमिन तत्व एक प्राकृतिक एंटी-बायोटिक की तरह काम करता है जो गले के इंफेक्शन और सर्दी-जुकाम से बचाव करता है। इसके अलावा, मौसमी ताजे फल जैसे सेब, अनार, पपीता और नाशपाती का सेवन कराएं। सूप, तुलसी का काढ़ा, मुनक्का, बादाम और ताजी हरी सब्जियों (जिन्हें गर्म पानी और नमक से अच्छी तरह धोया गया हो) को आहार का हिस्सा बनाएं। खट्टे फल जैसे संतरा और नीम्बू में मौजूद विटामिन-सी (Vitamin C) बच्चे के शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत प्रदान करता है।
7. लक्षण दिखने पर सही समय पर डॉक्टर की सलाह लें, खुद दवा न दें
मानसून के दौरान कई बार माता-पिता बच्चे को बुखार, दस्त या खांसी होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही मेडिकल स्टोर से लाकर एंटीबायोटिक या कोई अन्य सिरप पिला देते हैं। यह तरीका बच्चे की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। हर बुखार साधारण वायरल नहीं होता; यह डेंगू या टाइफाइड की शुरुआत भी हो सकती है। यदि आपके बच्चे को 100 डिग्री से अधिक तेज बुखार है, वह लगातार उल्टी कर रहा है, सुस्त पड़ गया है, खाना-पीना पूरी तरह छोड़ चुका है या उसकी सांस तेज चल रही है, तो बिना एक मिनट का समय गंवाए तुरंत किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से संपर्क करें। समय पर सही डायग्नोसिस और इलाज बच्चे को किसी भी बड़ी चिकित्सकीय जटिलता (Medical Complication) से बचा सकता है।