बेटे के जन्म के बाद पोस्टपार्टम डिप्रेशन से जूझीं करिश्मा तन्ना, बयां किया छलकता दर्द
टेलीविजन और बॉलीवुड जगत में अपनी सशक्त पहचान बनाने वाली मशहूर अभिनेत्री करिश्मा तन्ना ने हाल ही में अपनी निजी जिंदगी के एक बेहद नाजुक और अनदेखे पहलू पर खुलकर बात की है। आमतौर पर पर्दे पर मुस्कुराती और ग्लैमरस नजर आने वाली अभिनेत्रियों की जिंदगी जितनी खूबसूरत बाहर से दिखती है, अंदरूनी संघर्ष कभी-कभी उससे कहीं ज्यादा जटिल होता है। करिश्मा ने एक बातचीत के दौरान खुलासा किया कि बेटे के जन्म के बाद का समय उनके लिए सिर्फ मातृत्व के सुख का नहीं, बल्कि गंभीर मानसिक उथल-पुथल का भी दौर था। डिलीवरी के बाद वे पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) की गिरफ्त में आ गई थीं, जिसने उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था।
अचानक आंसू छलकना और खुद पर काबू न रहने का खौफनाक दौर
करिश्मा तन्ना ने अपने उस मुश्किल वक्त को याद करते हुए बताया कि जब घर में नन्हे मेहमान के आने की खुशियां मनाई जा रही थीं, तब वे अंदर ही अंदर एक अजीब खालीपन और बेचैनी से जूझ रही थीं। उन्होंने साझा किया कि कई बार बिना किसी वजह या बात के उनकी आंखों से लगातार आंसू बहने लगते थे। वे समझ ही नहीं पाती थीं कि जब उनके पास सब कुछ है, परिवार का साथ है और गोद में उनका बच्चा है, तो फिर उनका दिल इतना भारी और उदास क्यों है। बिना किसी कारण के रोना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ाहट महसूस होना और भावनाओं पर से नियंत्रण खो जाना उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका था। करिश्मा के मुताबिक, यह स्थिति इतनी डरावनी थी कि वे खुद अपने ही व्यवहार को नहीं समझ पा रही थीं।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन को लेकर महिलाओं की चुप्पी और सामाजिक समझ
अभिनेत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हमारे समाज में मां बनने के बाद महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य पर तो पूरा ध्यान दिया जाता है, लेकिन उनके मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हार्मोनल बदलाव, नींद की लगातार कमी, नई जिम्मेदारियों का भारी दबाव और शरीर में आए अचानक बदलाव महिलाओं के भीतर गहरा डिप्रेशन पैदा कर देते हैं। ज्यादातर महिलाएं समाज के डर या शर्म की वजह से इस बारे में बात करने से कतराती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उदासी जाहिर करने पर लोग उन्हें एक 'बुरी मां' समझेंगे। करिश्मा ने स्पष्ट किया कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन पूरी तरह से एक मेडिकल और बायोलॉजिकल स्थिति है, जिसे स्वीकार करना और समय पर डॉक्टरी मदद या काउंसलिंग लेना बेहद जरूरी है।
पति और परिवार के मजबूत सपोर्ट सिस्टम से मिली नई जिंदगी
इस मुश्किल और अंधकार भरे दौर से बाहर निकलने में करिश्मा के पति और उनके परिवार ने सबसे अहम भूमिका निभाई। करिश्मा ने बताया कि जब वे अपनी भावनाओं को संभाल नहीं पा रही थीं, तब उनके पार्टनर ने बिना किसी जजमेंट के उन्हें समझा, सहारा दिया और धैर्य बनाए रखा। धीरे-धीरे थेरेपी, सही खान-पान, अपनों के प्यार और सकारात्मक माहौल की बदौलत वे उस मानसिक भंवर से बाहर निकल पाईं। करिश्मा तन्ना के इस बेबाक खुलासे ने एक बार फिर नए माता-पिता के बीच मातृत्व के बाद होने वाले मानसिक तनाव और डिप्रेशन पर एक जरूरी संवाद छेड़ दिया है, जिससे कई अन्य महिलाओं को अपनी बात खुलकर रखने की हिम्मत मिलेगी।