'आप नहीं जानते हम कितने अड़ियल हैं, हमें डरा नहीं सकते': जजों के खिलाफ गुमनाम शिकायतों पर बिल्डरों पर भड़का सुप्रीम कोर्ट
रियल एस्टेट सेक्टर में सबवेंशन स्कीम के नाम पर हजारों मासूम घर खरीदारों (Homebuyers) को ठगने वाले बिल्डरों और बैंक अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा जैसे-जैसे कस रहा है, वैसे-वैसे न्यायिक प्रक्रिया पर दबाव बनाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। मामलों की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के जजों, अदालत के सलाहकारों (Amicus Curiae) और वकीलों के खिलाफ बड़ी संख्या में भेजी जा रही फर्जी और गुमनाम शिकायतों पर देश की शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने रियल एस्टेट बिल्डरों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका को इस तरह के हथकंडों से डराया या झुकाया नहीं जा सकता। अदालत ने इन शिकायतों के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं।
'आप नहीं जानते कि हम कितने अड़ियल लोग हैं' — सीजेआई की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने बिल्डरों और बैंक अफसरों के गठजोड़ पर सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इसी दौरान पीठ के सामने जजों और न्याय मित्रों के खिलाफ भेजी जा रही गुमनाम शिकायतों का मामला सामने आया।
इस पर नाराज चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने बिल्डरों की ओर इशारा करते हुए सख्त लहजे में कहा:
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"इन मामलों में बिल्डरों की तरफ से कौन वकील पेश हो रहे हैं? आप लोगों ने अब हमें गुमनाम शिकायतें भेजनी शुरू कर दी हैं? आप लोग शायद नहीं जानते कि हम कितने अड़ियल किस्म के लोग हैं।"
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पीठ ने आगे कहा, "क्या आपको लगता है कि हम इन हरकतों से डर जाएंगे या दबाव में आ जाएंगे? हम इन सभी शिकायतों को पकड़ेंगे। हम सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने और मामले की पूरी जांच करने का निर्देश देंगे। हम इसे इसके तार्किक नतीजे तक पहुंचाएंगे।"
अगली सुनवाई पर CBI को सौंपा जाएगा शिकायतों का पूरा पुलिंदा
मुख्य न्यायाधीश ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को निर्देश दिया कि वे इन शिकायतों की तह तक जाएं। पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई की तारीख पर अदालत सीबीआई को इन गुमनाम पत्रों और शिकायतों का एक और सेट सौंपेगी।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी यह पता लगाए कि इन पत्रों को लिखने और भेजने के लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं। पीठ ने संदेह जताते हुए टिप्पणी की कि इनमें से ज्यादातर निश्चित रूप से वही बिल्डर होंगे जो जांच के घेरे में हैं, और उनके साथ कुछ ऐसे वकील भी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने उन्हें ऐसी गलत कानूनी सलाह दी है।
क्या है सबवेंशन स्कीम घोटाला और CBI जांच का दायरा?
यह पूरा विवाद बिल्डरों और बैंकों की मिलीभगत से हुए सबवेंशन एग्रीमेंट घोटाले से जुड़ा है:
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होमबायर्स के साथ धोखा: सबवेंशन स्कीम के तहत घर खरीदारों से वादा किया गया था कि जब तक उन्हें फ्लैट का पजेशन (कब्जा) नहीं मिल जाता, तब तक लोन की ईएमआई बिल्डर भरेगा।
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बैंकों की सांठगांठ: बैंक अधिकारियों ने जमीन पर बिना काम हुए ही बिल्डरों के खातों में 60% से 80% तक लोन का पैसा जारी कर दिया। बाद में प्रोजेक्ट्स ठप हो गए, बिल्डर फरार हो गए या हाथ खड़े कर दिए, और बैंकों ने आम खरीदारों के सिबिल स्कोर खराब करने और उनसे ईएमआई वसूलने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
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सीबीआई की अब तक की कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई अब तक 50 से अधिक एफआईआर दर्ज कर चुकी है। इनमें से 18 मामलों की जांच पूरी कर 17 चार्जशीट सक्षम अदालतों में दाखिल की जा चुकी हैं।
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बैंक अधिकारियों पर शिकंजा: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के कई अधिकारियों को बिल्डरों के साथ मिलीभगत का आरोपी पाया गया है। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इन अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी है।
इन बड़े रियल एस्टेट समूहों पर सुप्रीम कोर्ट की सीधी नजर
सुप्रीम कोर्ट ने देश के कई बड़े बिल्डर समूहों के प्रोजेक्ट्स और फंड डायवर्जन की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं:
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ओजोन ग्रुप (Ozone Group): कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के प्रोजेक्ट्स।
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विवांशा (Vivansaa): बेंगलुरु स्थित प्रोजेक्ट्स।
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रुद्रा बिल्डवेल (Rudra Buildwell): ग्रेटर नोएडा के अधूरे प्रोजेक्ट्स।
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ओमेक्स ग्रुप (Omaxe Group): चंडीगढ़ और आसपास के प्रोजेक्ट्स।
शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित करने या जजों का मनोबल गिराने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।