प्राइम वीडियो पर ट्रेंड कर रही हॉरर-मिस्ट्री 'घबाड़-कुंड' उड़ा देगी होश, 'तुम्बाड' जैसी खौफनाक लोककथा पर आधारित है प्लॉट
भारतीय सिनेमा में जब भी पौराणिक लोककथा, अंधविश्वास, लालच और खौफ के मिश्रण की बात होती है, तो सोहम शाह की ब्लॉकबस्टर हॉरर फिल्म 'तुम्बाड' (Tumbbad) का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। महाराष्ट्र की मिट्टी से जुड़ी लोककथाओं और रहस्यों का जादू अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक बार फिर दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। अमेजन प्राइम वीडियो पर हाल ही में रिलीज हुई मराठी भाषा की हॉरर-थ्रिलर फिल्म 'घबाड़-कुंड' (Ghabad-Kund) इस समय तेजी से ट्रेंड कर रही है।
मराठी भाषा में 'घबाड़' का अर्थ अचानक मिला गुप्त खजाना और 'कुंड' का अर्थ गहरा कुआं या जलाशय होता है। एक शापित कुआं, उसके अंदर गड़ा हुआ अथाह सोना, एक भयानक चुड़ैल और इंसानी लालच के इर्द-गिर्द बुनी गई इस फिल्म की कहानी बिल्कुल 'तुम्बाड' की तरह दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।
शुरुआत से ही रोंगटे खड़े कर देती है कहानी
फिल्म 'घबाड़-कुंड' की शुरुआत एक अय्याश और अमीर जमींदार की हवेली से होती है। एक रात हवेली पर डाकुओं का एक खूंखार गिरोह हमला कर देता है और रक्षकों को मारकर सारा कीमती सामान व सोने के गहने लूट लेता है। डाकुओं की इस टोली में 'धूरा' नाम का एक बेहद चालाक डाकू भी शामिल होता है, जो अपने ही सरदार को धोखे से मारकर सोने की भारी पोटली लेकर फरार हो जाता है।
भागते समय धूरा जंगल के रास्ते एक गहरे कुएं के पास पहुंचता है और सोने की पोटली उस सूखे कुएं में फेंक देता है। तभी कुएं के भीतर से एक भयानक चीख सुनाई देती है और एक अदृश्य साया धूरा को खींचकर कुएं के अंदर ले जाकर मार डालता है। इसके बाद वह कुआं हमेशा के लिए शापित हो जाता है, जहां खजाने की रखवाली एक चुड़ैल और एक विशाल नाग करते हैं।
दिलीप की एंट्री और कुएं से जिंदा बचने का रहस्य
वर्षों बाद कहानी में मुख्य किरदार दिलीप की एंट्री होती है, जो बेहद गरीब और सीधा-साधा किसान है। उसकी पत्नी और लालची साला उसे हर समय तानों से परेशान करते रहते हैं। एक रात पारिवारिक कलह से तंग आकर दिलीप जब खेत की तरफ भागता है, तो जंगली कुत्तों के हमले से बचने के चक्कर में वह उसी शापित कुएं में गिर जाता है।
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, पूरे गांव के इतिहास में दिलीप अकेला ऐसा इंसान होता है जो उस कुएं से सही-सलामत जिंदा बाहर निकल आता है। जब यह खबर फैलती है, तो खंगरी नाम का एक तांत्रिक सक्रिय हो जाता है, जो सालों से उस कुएं का खजाना लूटना चाहता था। तांत्रिक को पता चलता है कि दिलीप ही उस खजाने से जुड़ा एकमात्र जीवित वंशज है।
पूर्णिमा की रात खजाने की तलाश और चौंकाने वाला क्लाइमेक्स
तांत्रिक, दिलीप के लालची साले और पत्नी पर दबाव बनाकर उसे पूर्णिमा की रात कुएं में उतरने के लिए मजबूर करता है। इस अनुष्ठान के लिए एक बच्ची और बकरी की बलि का इंतजाम भी किया जाता है। जब दिलीप कुएं में उतरता है, तो उसे उस रहस्यमयी महिला की आवाज सुनाई देती है जो केवल उसे ही महसूस होती है।
क्लाइमेक्स में यह चौंकाने वाला खुलासा होता है कि लूट वाली रात धूरा डाकू ने जिस गर्भवती महिला की निर्मम हत्या की थी, उसी ने मरने से पहले एक बच्चे को जन्म दिया था और दिलीप उसी बच्चे का वंशज है। वह आत्मा अपने वंशज की रक्षा करने और धूरा की आत्मा से अपना प्रतिशोध पूरा करने के लिए वहां मौजूद थी।
मराठी सिनेमा का पहला हॉरर यूनिवर्स
निर्देशक प्रीतम एस. के. पाटील के निर्देशन में बनी इस फिल्म को IMDb पर 7.5 की शानदार रेटिंग मिली है। निर्माताओं के अनुसार 'घबाड़-कुंड' मराठी सिनेमा के पहले इंटरकनेक्टेड हॉरर-मिस्ट्री यूनिवर्स की शुरुआत है, जिसकी अगली कड़ियां भविष्य में रिलीज की जाएंगी। अगर आपको लोककथाओं पर आधारित डार्क, मिस्टीरियस और खौफनाक सिनेमा पसंद है, तो प्राइम वीडियो पर मौजूद यह फिल्म आपको एक अलग ही रोमांच का अनुभव कराएगी।