संसद में भारी हंगामा: लोकसभा ने बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित किया 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026', राज्यसभा से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

संसद में भारी हंगामा: लोकसभा ने बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित किया 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026', राज्यसभा से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी

संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के बाद अब लोकसभा में भी जन्म और मृत्यु के पंजीकरण संबंधी कानून में बड़ा संशोधन करने वाला विधेयक पारित कर दिया गया है, हालांकि यह प्रक्रिया भारी राजनीतिक हंगामे और विरोध के साए में पूरी हुई। शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों के तीखे हंगामे और नारेबाजी के बीच 'जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' को बिना किसी चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इससे पहले बीते 29 जुलाई को राज्यसभा में इस विधेयक को मंजूरी मिल चुकी थी, जिसके बाद इसे लोकसभा में पास कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। सदन में इस महत्वपूर्ण कानून को पारित कराने के लिए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने प्रस्ताव पेश किया, लेकिन विपक्षी सांसदों के भारी विरोध और वेल में आकर नारेबाजी करने के कारण सदन का माहौल पूरी तरह गरमाया रहा और बिना किसी विस्तृत बहस के ही विधेयक को हरी झंडी दे दी गई।

बीते 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस अहम विधेयक को अपनी औपचारिक मंजूरी दी थी, जिसके बाद सरकार ने इसे संसद के मौजूदा सत्र में पारित कराने के लिए तेजी से कदम उठाए। इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में जन्म और मृत्यु के आंकड़ों के पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत (Integrated) बनाना है ताकि नागरिकों को प्रमाण पत्र बनवाने में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अड़चन का सामना न करना पड़े। सरकार का मानना है कि इस नए संशोधन के लागू होने के बाद डिजिटल डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी, जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और डेमोग्राफिक मैपिंग में अभूतपूर्व सुधार आएगा। हालांकि, इस कानून के दूरगामी प्रशासनिक फायदों पर चर्चा होने के बजाय पूरा सदन विपक्षी दलों के राजनीतिक विरोध और तीखे हंगामे का अखाड़ा बन गया, जिसके कारण बिना एक भी संशोधन या बहस के इस विधेयक को कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ा दिया गया।

लोकसभा में इस विधेयक को पारित किए जाने के दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार को घेरने के लिए कई ज्वलंत मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। विपक्षी सदस्य दिल्ली में हाल ही में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के विरोध में लगातार नारेबाजी कर रहे थे, जिसका सीधा कनेक्शन देश की राजधानी में चल रहे युवा आंदोलनों और राजनीतिक सरगर्मियों से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, विपक्षी खेमे ने राम मंदिर के चढ़ावे और दान में हुई कथित चोरी के मामलों को लेकर भी सदन के भीतर जमकर हंगामा किया और सरकार से तीखे जवाब की मांग की। विपक्षी दलों के इन तीखे तेवरों और लगातार हो रहे शोर-शराबे के कारण पीठासीन अधिकारी के बार-बार अनुरोध के बावजूद शांति स्थापित नहीं हो सकी, जिसके चलते सरकार ने बिना किसी चर्चा या बहस के ही ध्वनिमत के जरिए इस विधेयक को पारित कराने का मार्ग चुन लिया।

विपक्षी सांसदों ने विधेयक पर अपने किसी भी प्रकार के संशोधन प्रस्ताव (Amendments) तक सदन में पेश नहीं किए, जिससे यह साफ हो गया कि विपक्ष इस सत्र में विधायी कामकाज में भाग लेने के बजाय सरकार के खिलाफ राजनीतिक विरोध दर्ज कराने पर अधिक केंद्रित था। यही कारण है कि देश के प्रशासनिक ढांचे और जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण व्यवस्था से जुड़े इस बड़े कानूनी संशोधन को बिना किसी समीक्षात्मक बहस के ही पास कर दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संशोधन विधेयक के कानून बन जाने के बाद देश में जन्म और मृत्यु के डेटा का केंद्रीकरण राष्ट्रीय स्तर पर सुगम हो जाएगा, जिससे भविष्य में मतदाता सूची तैयार करने, आधार कार्ड से डेटा जोड़ने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान करने में भारी मदद मिलेगी।

बहरहाल, संसद के दोनों सदनों से इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद अब यह राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा, जिसके बाद यह आधिकारिक रूप से देश का नया कानून बन जाएगा। एक तरफ जहां सरकार इसे डिजिटल इंडिया और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष का बिना चर्चा के इस तरह बिल पास कराए जाने को लेकर सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप जारी है। आने वाले दिनों में इस कानून के धरातल पर उतरने के बाद जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया कितनी सरल होती है और राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस में इसका क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा, लेकिन संसद के भीतर जिस तरह से हंगामे के बीच इसे पारित किया गया, उसने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव को उजागर कर दिया है।

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