अभिजीत दीपके के घर उमड़ी वीआईपी नेताओं की भीड़: पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने की फोन पर बात, मातोश्री का दिया न्योता; सुरक्षा पर भी चर्चा

अभिजीत दीपके के घर उमड़ी वीआईपी नेताओं की भीड़: पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने की फोन पर बात, मातोश्री का दिया न्योता; सुरक्षा पर भी चर्चा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मजबूत हुंकार से केंद्र की सत्ता को हिला देने वाले और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का कारण बनने वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके अब राष्ट्रीय राजनीति के नए केंद्रबिंदु बनते जा रहे हैं। नीट पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ चले ऐतिहासिक छात्र आंदोलन का सफलतापूर्वक नेतृत्व करने के बाद, अभिजीत दीपके दिल्ली में टायफाइड से उबरने के बाद आखिरकार अपने गृहनगर छत्रपति संभाजीनगर पहुंच चुके हैं। उनके घर वापसी के साथ ही महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त हलचल मच गई है और उनसे मिलने के लिए एक के बाद एक दिग्गज नेताओं, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों का तांता लग गया है। यह नजारा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश के युवाओं के बीच खड़ा हुआ यह चेहरा अब एक बहुत बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर चुका है, जिसे नजरअंदाज करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए संभव नहीं रह गया है।

उद्धव ठाकरे से हुई फोन पर बातचीत, चंद्रकांत खैरे ने पहुंचाई बधाई और दिया 'मातोश्री' का न्योता

इस राजनीतिक मुलाकातों के सिलसिले की सबसे बड़ी और खास कड़ी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे की अभिजीत दीपके के आवास पर हुई मुलाकात रही। मुलाकात के दौरान खैरे ने न केवल दीपके को इस अभूतपूर्व आंदोलन की सफलता के लिए बधाई दी, बल्कि मौके पर ही फोन मिलाकर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी उनकी बात कराई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फोन पर बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके के सफल नेतृत्व और उनके साहसिक कदमों की जमकर तारीफ की, उनके स्वास्थ्य और परिवार का हाल-चाल जाना, और साथ ही उन्हें मुंबई स्थित अपने प्रतिष्ठित आवास 'मातोश्री' आने का आधिकारिक निमंत्रण भी दिया। इस पर दीपके ने भी पूरे सम्मान के साथ जवाब देते हुए कहा कि वह सभी से मिलना चाहेंगे और जरूरत पड़ने पर निश्चित रूप से 'मातोश्री' पहुंचेंगे, जिसने राजनीतिक हलकों में नए समीकरणों और चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

मंत्री संजय शिरसाट ने जताई सुरक्षा की चिंता, सीएम फडणवीस से बात करने का दिया भरोसा

राजनीतिक मुलाकातों के इस दौर में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संजय शिरसाट भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने दीपके से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी ली। मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए मंत्री शिरसाट ने बताया कि वह लंबे समय से दीपके के परिवार को जानते हैं और वे उनके पारिवारिक सदस्यों की तरह हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जानबूझकर पहले मिलने नहीं गए थे ताकि इस मुलाकात को किसी राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए और इसका गलत अर्थ न निकाला जाए। इसके साथ ही, मंत्री शिरसाट ने अभिजीत दीपके की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके माता-पिता अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं, इसलिए महाराष्ट्र लौटने पर उन्हें तुरंत पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए, और इस संबंध में वह राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से व्यक्तिगत रूप से चर्चा करेंगे ताकि उनकी सुरक्षा पुख्ता की जा सके।

बच्चु कडू की व्यक्तिगत मुलाकात और आंदोलनकारियों का आपसी मेल

इसके अलावा, शिवसेना के बागी और चर्चित विधायक बच्चु कडू ने भी अभिजीत दीपके के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की, हालांकि उन्होंने इस मुलाकात को पूरी तरह से व्यक्तिगत और एक आंदोलनकारी की दूसरे आंदोलनकारी से मुलाकात बताया। बच्चु कडू ने स्पष्ट किया कि वह सरकार या किसी पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं आए हैं, बल्कि जंतर-मंतर पर डटकर एक सफल और ऐतिहासिक प्रदर्शन करने के लिए दीपके को बधाई देने आए हैं। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के हक के लिए लड़ने वाले ऐसे जुझारू नेताओं का समर्थन करना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।

राष्ट्रव्यापी असर और CJP का बढ़ता राजनीतिक कद

दिल्ली के इस छात्र आंदोलन के बाद जिस तरह से देश भर के राजनीतिक दल और दिग्गज नेता अभिजीत दीपके की ओर आकर्षित हो रहे हैं, उससे यह साफ हो गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' का यह सफर अब केवल एक छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा है। टायफाइड से पीड़ित होने के बावजूद अभिजीत दीपके के प्रति नेताओं का यह आकर्षण यह साबित करता है कि युवा शक्ति की यह चिंगारी अब मुख्यधारा की राजनीति को प्रभावित करने लगी है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या दीपके इन राजनीतिक न्योतों को स्वीकार कर चुनावी राजनीति की ओर कदम बढ़ाते हैं या फिर एक स्वतंत्र जन-आंदोलन के रूप में ही अपनी पैठ मजबूत रखते हैं, लेकिन इतना तय है कि इस एक आंदोलन ने देश की राजनीति के कई पुराने समीकरणों को हिलाकर रख दिया है।

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