अमेरिका-ईरान जंग में अब तक का सबसे बड़ा और खतरनाक मोड़: तेहरान का दावा- जॉर्डन के एयर बेस पर मिसाइल हमलों से तबाह हुए अमेरिका के 3 एडवांस्ड F-35 फाइटर जेट
अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में छिड़ी जंग अब बेहद खतरनाक और विनाशकारी चरण में प्रवेश कर चुकी है। दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और परोक्ष संघर्ष अब सीधे और बड़े सैन्य टकराव में बदल गया है, जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। इस बीच तेहरान की ओर से एक ऐसा सनसनीखेज और चौंकाने वाला दावा सामने आया है, जिसने वैश्विक रक्षा गलियारों में भूचाल ला दिया है। ईरानी शासन और उसकी सेना के बयानों के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन की धरती पर बने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अल-अजराक एयर बेस पर कड़ा और सटीक प्रहार किया है। इस हमले में अमेरिकी सेना को भारी भरकम नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनातनी अपने चरम पर पहुंच गई है।
ईरान का बड़ा दावा: जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर मिसाइल हमला और F-35 जेट्स की तबाही
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक और विस्तृत बयानों के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में स्थित अल-अजराक एयर बेस को निशाना बनाकर कई उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस ऑपरेशन में सीधे तौर पर अमेरिकी वायुसेना के सबसे आधुनिक और मारक माने जाने वाले F-35 फाइटर एयरक्राफ्ट के डिप्लॉयमेंट रैंप और वहां मौजूद अत्याधुनिक मेंटेनेंस सुविधाओं को टारगेट किया गया। आईआरजीसी ने दावा किया है कि इस भीषण और अचूक मिसाइल हमले में अमेरिका के तीन अत्याधुनिक F-35 फाइटर जेट पूरी तरह से जलकर खाक हो गए हैं, जबकि तीन अन्य विमानों को गंभीर क्षति पहुंची है। इतना ही नहीं, इस हमले में कई अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ तकनीकी और मेंटेनेंस कार्यों से जुड़े कर्मचारी भी मारे गए हैं, जिससे अमेरिकी सेना को रणनीतिक रूप से बड़ा झटका लगा है।
केशम द्वीप पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक और बंकर बस्टर बमों का खौफनाक बदला
तेहरान की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अल-अजराक एयर बेस पर किया गया यह विध्वंसक हमला कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि यह बुधवार रात को केशम द्वीप पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमलों का सीधा और आक्रामक जवाब था। आईआरजीसी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जॉर्डन स्थित इसी एयर बेस से संचालित होने वाले अमेरिकी युद्धक विमानों ने बंकर बस्टर जैसे घातक बमों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के केशम द्वीप पर दो रिहायशी घरों को निशाना बनाया था। इस बर्बर अमेरिकी एयरस्ट्राइक में एक मासूम बच्चे समेत एक ही परिवार के तीन निर्दोष सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ईरान ने अपनी इस जवाबी कार्रवाई को पूरी तरह जायज ठहराते हुए कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और नागरिकों पर हुए हर एक हमले का मुंहतोड़ जवाब देने का पूरा हक रखता है।
दक्षिणी ईरान में विस्फोट और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को लेकर तेहरान की दो टूक चेतावनी
इस बीच, बंदर अब्बास और लोकप्रिय पर्यटन स्थल किश द्वीप सहित दक्षिणी ईरान के कई प्रमुख इलाकों में जोरदार धमाकों और विस्फोटों की आवाजें सुने जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे क्षेत्रीय नागरिकों में भारी दहशत का माहौल है। अल-अजराक एयर बेस पर हमले का दावा करने से ठीक पहले, आईआरजीसी ने एक अत्यंत कड़ा और स्पष्ट संदेश जारी करते हुए चेतावनी दी थी कि जो भी देश अमेरिका की सैन्य गतिविधियों में मदद कर रहे हैं या उसका साथ दे रहे हैं, उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके साथ ही, दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज' को लेकर ईरान ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यह जलडमरूमध्य अब पूरी तरह से उसकी नौसेना के नियंत्रण में है। ईरान ने कसम खाई है कि जब तक अमेरिका अपनी धमकियों और क्षेत्र के समुद्री आवागमन में हस्तक्षेप करना बंद नहीं करता, तब तक होर्मुज के रास्ते को दोबारा नहीं खोला जाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के संकट में पड़ने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का पलटवार और ईरान के भीतर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने आधिकारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक बड़ा बयान जारी किया है। सेंटकॉम की घोषणा के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर गहराई तक स्थित आईआरजीसी के दर्जनों प्रमुख सैन्य ठिकानों और अड्डों पर बड़े पैमाने पर विनाशकारी हमले किए हैं। अमेरिकी सेना ने 29 जुलाई (बुधवार) को रात लगभग 10 बजे ईटी (Eastern Time) पर इन सुनियोजित हमलों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार को अमेरिकी सैन्य बलों पर ईरानी सेना द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों की नाकाम कोशिश का सीधा और जरूरी पलटवार थी। अमेरिकी सेना ने साफ किया कि इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में सक्रिय ईरान और उसके प्रॉक्सी आतंकवादी समूहों की उन क्षमताओं को नेस्तनाबूद करना था, जिनसे अमेरिकी सैनिकों, वाणिज्यिक शिपिंग जहाजों और खाड़ी के पड़ोसी देशों की सुरक्षा को लगातार गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।
मध्य पूर्व में मंडराते वैश्विक युद्ध के काले बादल और गहराता मानवीय संकट
सेंटकॉम के आधिकारिक बयान में यह भी विस्तार से बताया गया कि अमेरिकी सेना ने जिन दर्जनों ठिकानों को जमींदोज किया है, उनमें अत्याधुनिक कमांड सेंटर, उन्नत मिसाइल और ड्रोन भंडारण सुविधाएं, तटीय निगरानी व रक्षा स्थल तथा रणनीतिक समुद्री क्षमताएं शामिल हैं। हालांकि अमेरिकी सेना ने यह दावा किया था कि 28 जुलाई को मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए दागी गई सभी ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम द्वारा सफलतापूर्वक बीच हवा में ही रोक लिया गया था, लेकिन इसके बाद दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई सीधी सैन्य भिड़ंत ने यह साबित कर दिया है कि यह संघर्ष अब किसी एक मोर्चे तक सीमित नहीं रहने वाला है। जॉर्डन के एयर बेस पर ईरान के दावे और अमेरिका द्वारा ईरान के भीतर किए गए बमबारी के दौर ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इस बात की गहरी चिंता जताई जा रही है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह खूनी संघर्ष और अधिक बढ़ता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए एक विकराल आपदा का रूप ले सकता है, जिससे पूरी दुनिया की निगाहें अब इस सुलगते हुए रणक्षेत्र पर टिकी हुई हैं।