क्या है केंद्र सरकार की 'परिवर्तन' योजना? दिल्ली-एनसीआर से हटाए जाएंगे 2 लाख से अधिक पुराने ट्रक और बसें

क्या है केंद्र सरकार की 'परिवर्तन' योजना? दिल्ली-एनसीआर से हटाए जाएंगे 2 लाख से अधिक पुराने ट्रक और बसें

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में हर साल सर्दियों के दौरान दमघोंटू धुंध और जहरीले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी नीतिगत कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने संयुक्त रूप से दिल्ली-एनसीआर के 37 जिलों में पंजीकृत 2 लाख से अधिक पुराने व प्रदूषणकारी कमर्शियल ट्रकों और बसों को सड़कों से हटाने के लिए महत्वाकांक्षी 'परिवर्तन' (PARIVARTAN) योजना शुरू की है। इस योजना का पूरा नाम 'प्रोग्राम फॉर एक्सीलरेटेड रिन्यूअल एंड इंसेंटिवाइजेशन ऑफ व्हीकल एसेट्स फॉर रिड्यूसिंग ट्रांसपोर्ट एयर पॉल्यूशन एंड नेटवर्क इमिशन्स' (PARIVARTAN) है। योजना के तहत भारत स्टेज-4 (BS-IV) और उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले भारी व मध्यम वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह अत्याधुनिक बीएस-6 (BS-VI), सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने ₹9,585 करोड़ का भारी-भरकम वित्तीय पैकेज मंजूर किया है, जिसमें से ₹5,041 करोड़ की सीधी बजटीय सहायता केंद्र सरकार प्रदान कर रही है।

क्या है 'परिवर्तन' (PARIVARTAN) योजना और क्यों पड़ी इसकी तत्काल जरूरत?

दिल्ली और इसके आसपास के उपनगरीय शहरों में सर्दियों की शुरुआत होते ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर 400 से 500 के पार 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में पहुंच जाता है। विभिन्न वैज्ञानिक और पर्यावरणीय अध्ययनों से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर के पूरे वाहन बेड़े (Vehicle Fleet) में भारी ट्रकों और बसों की संख्या मात्र 3 प्रतिशत है, लेकिन परिवहन क्षेत्र से निकलने वाले कुल जहरीले कणों (PM 2.5) में इनकी हिस्सेदारी लगभग 36 प्रतिशत है। इसके अलावा, वाहनों से होने वाले कुल नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) उत्सर्जन में 63 प्रतिशत और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) में 40 प्रतिशत का योगदान इन्हीं पुराने वाणिज्यिक डीजल वाहनों का है।

वर्षों पुरानी तकनीक पर चल रहे बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और बीएस-4 इंजन अत्यधिक धुआं और नैनो पार्टिकल्स छोड़ते हैं, जिससे राजधानी में वायु प्रदूषण का संकट लाइलाज बना हुआ था। इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने केवल दंडात्मक कार्रवाई या प्रतिबंध लगाने के बजाय वाहन मालिकों को वित्तीय प्रोत्साहन देकर स्वेच्छा से अपने पुराने वाहनों को बदलने के लिए यह योजना बनाई है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि एक वर्ष के भीतर योजना के सभी पात्र 2 लाख से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा कराकर स्वच्छ वाहनों को सड़कों पर उतारा जाए।

10 साल तक 100% टैक्स छूट, 5% ब्याज सब्सिडी और 8% डिस्काउंट: वाहन मालिकों को बंपर फायदे

'परिवर्तन' योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें पुराने ट्रक और बस मालिकों पर कोई आर्थिक बोझ डाले बिना नए और आधुनिक वाहन खरीदने के लिए एक बहुस्तरीय वित्तीय सहायता पैकेज तैयार किया गया है, जो नए वाहन की एक्स-शोरूम कीमत का लगभग 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है:

  • 10 साल तक रोड टैक्स में 100% छूट: योजना के तहत नया बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने और पंजीकृत कराने पर भागीदार राज्य सरकारें (दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान) अगले 10 वर्षों के लिए मोटर व्हीकल टैक्स (रोड टैक्स) पूरी तरह माफ करेंगी। यदि कोई मालिक पुरानी इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ी खरीदता है, तब भी उसे 10 साल तक 50% टैक्स छूट मिलेगी।

  • 5 वर्षों तक 5% ब्याज सब्सिडी: नए कमर्शियल वाहन की खरीद के लिए बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) से लिए गए ऑटो लोन पर केंद्र सरकार 5 साल तक ब्याज दर में 5 प्रतिशत अंक (5 Percentage Points) की सीधी सब्सिडी देगी, जिससे मासिक ईएमआई का बोझ बेहद कम हो जाएगा।

  • ऑटो कंपनियों से 8% का सीधा डिस्काउंट: योजना में शामिल सभी प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता (OEMs) नए ट्रकों और बसों की एक्स-शोरूम कीमत पर न्यूनतम 8 प्रतिशत की सीधी छूट उपलब्ध कराएंगे।

  • रजिस्ट्रेशन फीस में 100% छूट: नए वाहन के पंजीयन पर लगने वाला सरकारी रजिस्ट्रेशन शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा। साथ ही पुराने वाहनों पर राज्यों द्वारा लंबित पिछली देनदारियां और जुर्माने भी शिथिल किए जाएंगे।

5 साल तक मासिक फ्यूल वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहनों पर ₹2.56 लाख तक का एकमुश्त इंसेंटिव

योजना में वाहन मालिकों की दैनिक परिचालन लागत (Operational Cost) को घटाने के लिए भी व्यापक प्रावधान किए गए हैं। जो वाहन मालिक नया बीएस-6 डीजल या सीएनजी ट्रक/बस खरीदेंगे, उन्हें वाहन की क्षमता और श्रेणी (लाइट, मीडियम, हेवी) के आधार पर अगले 5 वर्षों तक प्रति माह ₹1,200 से लेकर ₹4,800 तक के डिजिटल फ्यूल वाउचर दिए जाएंगे, जिन्हें वे पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे।

वहीं, जो ऑपरेटर जीरो-एमिशन वाले पूर्ण इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने का विकल्प चुनेंगे, उन्हें मासिक फ्यूल वाउचर की जगह गाड़ी की डिलीवरी लेते ही ₹64,000 से लेकर ₹2.56 लाख तक का एकमुश्त नकद वित्तीय इंसेंटिव सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। आधिकारिक गणना के अनुसार, एक हेवी गुड्स व्हीकल (HGV) ट्रक बदलने पर मालिक को कुल मिलाकर लगभग ₹11.10 लाख तक के विभिन्न वित्तीय लाभ मिलते हैं, जबकि हेवी पैसेंजर बस (HPV) इलेक्ट्रिक में बदलने पर यह कुल इंसेंटिव पैकेज ₹37.45 लाख तक पहुंच जाता है।

दिल्ली-एनसीआर के 37 जिले दायरे में: 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसों को मिलेगा नया जीवन

'परिवर्तन' योजना का भौगोलिक दायरा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) के तहत आने वाले चारों राज्यों के कुल 37 जिलों और प्रशासनिक क्षेत्रों में लागू किया गया है:

  • दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के सभी 13 राजस्व जिले।

  • हरियाणा: गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, रोहतक, झज्जर, नूंह, रेवाड़ी, पलवल, करनाल, मेरठ सीमा से लगे जिले समेत कुल 14 जिले।

  • उत्तर प्रदेश: गौतमबुद्ध नगर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा), गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली सहित 8 प्रमुख एनसीआर जिले।

  • राजस्थान: अलवर और भरतपुर के 2 जिले।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक इन 37 जिलों में पंजीकृत कुल 2,31,961 पुराने वाणिज्यिक वाहनों में से लगभग 2.07 लाख वाहन सीधे तौर पर इस योजना के तहत लाभान्वित होने के योग्य पाए गए हैं। इनमें करीब 1,91,000 मालवाहक ट्रक और 16,329 यात्री बसें शामिल हैं।

पुराने वाहन को स्क्रैप या बाहर बेचने की छूट: वाहन मालिकों के लिए नियम

सरकार ने योजना को व्यावहारिक और लचीला बनाने के लिए नियमों में विशेष ढील दी है ताकि ट्रांसपोर्टर्स को किसी प्रकार की आर्थिक हानि न हो। बीएस-3 या उससे पुराने अत्यधिक प्रदूषणकारी वाहनों को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) में स्क्रैप कराना अनिवार्य होगा, जिसके बाद वाहन मालिक को 'सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट' (स्क्रैप सर्टिफिकेट) जारी किया जाएगा।

वहीं, बीएस-4 वाहनों के मालिकों को यह बड़ी राहत दी गई है कि उन्हें अपनी गाड़ी हर हाल में नष्ट (स्क्रैप) कराने की बाध्यता नहीं होगी। वे अपने बीएस-4 ट्रक या बस को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं से बाहर देश के अन्य गैर-एनसीएपी (Non-NCAP) शहरों और कस्बों में कानूनी रूप से बेच सकते हैं, जहां प्रदूषण का स्तर गंभीर नहीं है। वाहन का ट्रांसफर पूरा करने के बाद वे एनसीआर में नए बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन के पंजीयन पर 'परिवर्तन' योजना के समस्त वित्तीय लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राजधानी दिल्ली के लिए विशेष नियम यह है कि हल्के मालवाहक वाहनों (LGV) को केवल इलेक्ट्रिक में बदला जा सकेगा, जबकि बसों को सीएनजी या पूर्ण इलेक्ट्रिक में बदलना अनिवार्य होगा।

सिंगल-विंडो डिजिटल पोर्टल और रियल-टाइम निगरानी व्यवस्था

'परिवर्तन' योजना की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, बिचौलिया-मुक्त और तेज बनाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक अत्याधुनिक एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया है। इस पोर्टल पर अब तक देश के 42 प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंक/एनबीएफसी और 15 बड़े वाहन निर्माता (Tata Motors, Ashok Leyland, Eicher, Mahindra आदि) ऑनबोर्ड हो चुके हैं।

वाहन मालिक को सबसे पहले पोर्टल पर अपना वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज कर पात्रता की जांच करनी होती है। इसके बाद पुराने वाहन को अधिकृत सेंटर पर स्क्रैप या बाहर ट्रांसफर करने का प्रमाण पत्र अपलोड करते ही सिस्टम डिजिटल अप्रूवल जारी कर देता है। ब्याज सब्सिडी, टैक्स छूट और फ्यूल वाउचर का वितरण सीधे आधार और बैंक खाते से जुड़े डिजिटल माध्यम से किया जाता है।

योजना की राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक अधिकार प्राप्त समिति (Empowered Committee) बनाई गई है, जिसमें नीति आयोग और चारों राज्यों के मुख्य सचिव शामिल हैं। वहीं, जमीनी स्तर पर जिलों के डीएम और आरटीओ अधिकारियों को इसके त्वरित क्रियान्वयन का जिम्मा सौंपा गया है। योजना लागू होने के शुरुआती हफ्तों में ही 1,300 से अधिक ट्रांसपोर्टर्स अपना पंजीकरण करा चुके हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह योजना दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा को स्वच्छ बनाने और परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण में गेम-चेंजर साबित होने जा रही है।

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