सावन पूर्णिमा पर स्नान-दान और व्रत की सही तारीख जानिए, क्या रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का पड़ेगा कोई साया?
सनातन धर्म में सावन मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष आध्यात्मिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व है। श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान शिव और जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। इसी दिन पवित्र नदियों में स्नान, सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य और भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व भी मनाया जाता है। इस वर्ष सावन पूर्णिमा की तिथि और उसी दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों के मन में कई प्रकार के सवाल हैं कि व्रत किस दिन रखा जाए, स्नान-दान कब करें और क्या ग्रहण के कारण सूतक काल के नियम लागू होंगे।
ज्योतिष शास्त्र और वैदिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि पर किए गए सत्कर्म, दान और व्रत से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि व आरोग्य का वास होता है। आइए विस्तार से जानते हैं सावन पूर्णिमा की सटीक तिथि, स्नान-दान का शुभ समय और चंद्र ग्रहण से जुड़े सभी महत्वपूर्ण नियम।
सावन पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान की सही तारीख व समय
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त (गुरुवार) को सुबह 09:08 बजे से होगा और इसका समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को सुबह 09:50 बजे होगा।
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पूर्णिमा व्रत: जो भक्त चंद्र दर्शन और पूर्णिमा का उपवास रखते हैं, उनके लिए प्रदोष काल और चंद्रोदय व्यापिनी तिथि का महत्व होता है। इसलिए पूर्णिमा व्रत 27 अगस्त (गुरुवार) को रखा जाएगा।
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स्नान-दान और रक्षाबंधन: सनातन परंपरा में उदयातिथि का विशेष महत्व है। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण, दान-पुण्य और रक्षाबंधन का महापर्व 28 अगस्त (शुक्रवार) को ही मनाया जाएगा।
क्या 28 अगस्त को लगने वाले चंद्र ग्रहण का पड़ेगा कोई प्रभाव?
श्रावण पूर्णिमा यानी 28 अगस्त को खंडग्रास चंद्र ग्रहण की खगोलीय घटना घटित होने जा रही है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह लगभग 06:53 AM से दोपहर 12:32 PM तक रहेगा।
भारत में सूतक काल और धार्मिक प्रभाव के नियम:
ज्योतिष शास्त्र का स्पष्ट नियम है कि किसी भी ग्रहण का धार्मिक प्रभाव, सूतक काल और निषेध नियम केवल वहीं मान्य होते हैं जहां वह ग्रहण नंगी आंखों से प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे।
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यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान (Visible) नहीं होगा क्योंकि इस दौरान भारत में दिन का समय रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा।
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भारत में दृश्य न होने के कारण इसका कोई भी सूतक काल मान्य नहीं होगा।
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मंदिर के कपाट खुले रहेंगे, सभी नियमित पूजा-पाठ, जप-तप, स्नान-दान और रक्षाबंधन के कार्य बिना किसी रोक-टोक और बाधा के सामान्य रूप से संपन्न किए जा सकेंगे।
सावन पूर्णिमा पर स्नान-दान और पूजा की विधि
सावन पूर्णिमा के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर में ही नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के उपरांत सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और पितरों के निमित्त तर्पण करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा कर उन्हें पंचामृत, तुलसी दल और मौसमी फलों का भोग लगाएं।
इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को सफेद वस्तुएं जैसे दूध, दही, चावल, चीनी, चांदी या सफेद वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।