राम मंदिर ट्रस्ट में प्रशासनिक फेरबदल: ज्वाइंट व डिप्टी CEO की होगी जल्द नियुक्ति, दिल्ली मेट्रो के सीनियर इंजीनियर को मिल सकती है कमान

राम मंदिर ट्रस्ट में प्रशासनिक फेरबदल: ज्वाइंट व डिप्टी CEO की होगी जल्द नियुक्ति, दिल्ली मेट्रो के सीनियर इंजीनियर को मिल सकती है कमान

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि परिसर के संपूर्ण विस्तार, परकोटा निर्माण, भव्य सप्तमंडपम और श्रद्धालुओं की दैनिक सुविधाओं के संचालन को नई गति देने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक तंत्र को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने का फैसला किया है। भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपरांत अयोध्या में रोजाना उमड़ रही लाखों रामभक्तों की भीड़ और 70 एकड़ के विशाल राम जन्मभूमि परिसर में चल रहे बहुआयामी निर्माण कार्यों के कुशल प्रबंधन के लिए ट्रस्ट जल्द ही नए उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां करने जा रहा है। प्रशासनिक रूपरेखा को कॉरपोरेट और विश्वस्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की तर्ज पर ढालने के उद्देश्य से ट्रस्ट में अब ज्वाइंट चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (Joint CEO) और डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (Deputy CEO) के पदों का सृजन कर उन पर अनुभवी विशेषज्ञों की तैनाती की तैयारी पूरी कर ली गई है।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के अनुभवी इंजीनियर को मिल सकती है कमान

इस फेरबदल से जुड़ा सबसे अहम और बड़ा पहलू यह है कि ज्वाइंट अथवा डिप्टी सीईओ के तकनीकी पद के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) से जुड़े एक वरिष्ठ और बेहद अनुभवी सिविल व प्रोजेक्ट इंजीनियर का नाम सबसे आगे चल रहा है। दिल्ली मेट्रो जैसी जटिल, समयबद्ध और मेगा इंजीनियरिंग परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का दशकों लंबा अनुभव रखने वाले इस विशेषज्ञ को राम मंदिर परिसर के तकनीकी कार्यों और परकोटा निर्माण की देखरेख की अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

ट्रस्ट के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह नागर शैली में तराशा गया एक ऐसा वास्तुशिल्प और इंजीनियरिंग चमत्कार है जिसे अगले एक हजार वर्षों तक बिना किसी मरम्मत के अक्षुण्ण रहना है। ऐसे में परिसर के भीतर सिविल स्ट्रक्चर, ड्रेनेज, वाटर ट्रीटमेंट, फायर फाइटिंग सिस्टम, सब-स्टेशन और इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी नेटवर्क जैसी जटिल इंजीनियरिंग जरूरतों को संभालने के लिए दिल्ली मेट्रो जैसी कार्यप्रणाली वाले पेशेवर इंजीनियर की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद बढ़ा प्रशासनिक और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का दायरा

जनवरी 2024 में रामलला के भव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही अयोध्या आने वाले दर्शनार्थियों की संख्या में कई गुना उछाल आया है। रोजाना 1 से 2 लाख श्रद्धालु गर्भगृह के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि विशेष पर्वों और त्योहारों पर यह आंकड़ा 5 लाख के पार चला जाता है। वर्तमान में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और ट्रस्टीज की अगुवाई में पूरा प्रबंधन संचालित हो रहा है।

हालांकि, मुख्य मंदिर के शिखर के निर्माण, 70 एकड़ के परिसर में 14 पूरक मंदिरों के निर्माण, श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक पिलग्रिम फैसिलिटेशन सेंटर (PFC), सुरक्षा स्कैनर लॉबी, सुगम दर्शन व्यवस्था, प्रसाद वितरण और डिजिटलाइज्ड अकाउंट्स के दैनिक संचालन का दायरा इतना विस्तृत हो चुका है कि एक स्थायी और पूर्णकालिक प्रशासनिक विंग (Executive Body) की जरूरत अनिवार्य बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए आईएएस, राज्य प्रशासनिक सेवा (PCS) या बड़े सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) से सेवानिवृत्त या प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों को इन महत्वपूर्ण पदों पर तैनात करने की फाइल तैयार की गई है।

ज्वाइंट और डिप्टी सीईओ की क्या होंगी मुख्य जिम्मेदारियां?

ट्रस्ट के नए सांगठनिक ढांचे के अनुसार ज्वाइंट और डिप्टी सीईओ के अधिकार और कार्यक्षेत्र बेहद स्पष्ट और रणनीतिक होंगे। इनके अंतर्गत निर्माण और मंदिर प्रबंधन के दो अलग-अलग प्रमुख वर्टिकल्स को बांटा जाएगा:

  • तकनीकी और इन्फ्रास्ट्रक्चर विंग: मंदिर निर्माण समिति और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) तथा टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) के साथ सीधा समन्वय स्थापित करना। परिसर में बन रहे परकोटा, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, लिफ्ट्स, सुरक्षा दीवारों और लैंडस्केपिंग के कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा सुनिश्चित करना।

  • क्राउड मैनेजमेंट और श्रद्धालु सुविधाएं: श्रद्धालुओं के लिए सुगम कतार प्रबंधन, व्हीलचेयर सुविधा, लॉकर मैनेजमेंट, चिकित्सा इमरजेंसी सेवाएं, पेयजल आपूर्ति और प्रसाद निर्माण इकाइयों का चौबीसों घंटे पारदर्शी संचालन।

  • डिजिटल और लीगल ऑपरेशंस: राम मंदिर ट्रस्ट को देश-विदेश से मिलने वाले ऑनलाइन व ऑफलाइन दान (Donations), टैक्स छूट, वित्तीय ऑडिट, साइबर सुरक्षा और ट्रस्ट की अचल संपत्तियों की कानूनी सुरक्षा का संपूर्ण ब्योरा दुरुस्त रखना।

निर्माण समिति की आगामी बैठक में लग सकती है अंतिम मुहर

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में अयोध्या में होने वाली आगामी नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इन प्रशासनिक नियुक्तियों के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। ट्रस्ट की इस बैठक में वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) के वैज्ञानिक और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। अंतिम नाम तय होते ही आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी, जिसके बाद नवनियुक्त अधिकारी अयोध्या में ही कैंप कार्यालय बनाकर सीधे ग्राउंड जीरो से कामकाज संभालेंगे। इस संगठनात्मक विस्तार से जहां निर्माण कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे होंगे, वहीं देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भविष्य में और भी अधिक सुलभ, सुरक्षित और आधुनिक दर्शन का दिव्य अनुभव प्राप्त होगा।

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