सिर्फ क्रिमिनल रिकॉर्ड होने से जब्त नहीं होगी प्रॉपर्टी! गैंगस्टर एक्ट में संपत्ति कुर्की को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सिर्फ क्रिमिनल रिकॉर्ड होने से जब्त नहीं होगी प्रॉपर्टी! गैंगस्टर एक्ट में संपत्ति कुर्की को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट के तहत होने वाली संपत्तियों की जब्ती और कुर्की की कार्रवाइयों के बीच देश की प्रतिष्ठित अदालत इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक बेहद बड़ा और नजीर बनने वाला कानूनी फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कानूनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल किसी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास (Criminal History) होने मात्र से ही उसकी चल-अचल संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि जब तक राज्य सरकार या पुलिस ठोस और विश्वसनीय वित्तीय साक्ष्यों के जरिए यह साबित न कर दे कि संबंधित संपत्ति अपराध से कमाए गए पैसों से ही खरीदी गई है, तब तक कुर्की का कोई भी सरकारी आदेश कानून की कसौटी पर वैध नहीं माना जा सकता।

गोरखपुर के विशेष जज का आदेश संशोधित: हाईकोर्ट ने मकान और गाड़ियां तुरंत मुक्त करने का दिया निर्देश

यह महत्वपूर्ण निर्णय न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने अर्जुन जायसवाल और तीन अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल की गई आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता वाजिद अली की दलीलों और उनके द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों को पूरी तरह सही माना। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) द्वारा 19 नवंबर 2022 को पारित किए गए कुर्की के आदेश में बड़ा संशोधन कर दिया है।

अदालत ने विवादित गाटा संख्या-206 पर बने पक्के मकान और दो अन्य वाहनों की कुर्की को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि इन संपत्तियों को उनके वास्तविक और वैध स्वामियों को तुरंत सौंप दिया जाए। हालांकि, मामले से जुड़े एक अन्य वाहन की कुर्की को कोर्ट ने बरकरार रखा है, क्योंकि उसके पंजीकृत स्वामी रामशरण निषाद ने समय रहते न तो कोई कानूनी आपत्ति दर्ज कराई थी और न ही कोर्ट में अपना दावा पेश किया था।

पैतृक जमीन और नेशनल हाईवे का मुआवजा; कागजों ने खोली जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की पोल

इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2021 में हुई थी, जब जिला मजिस्ट्रेट (DM), गोरखपुर ने गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए अर्जुन जायसवाल की संपत्तियों को 'अपराध से अर्जित' मानते हुए जब्त करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया था। इसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की शरण ली।

अदालत में अपीलकर्ताओं ने अकाट्य दस्तावेज पेश करते हुए साबित किया कि उनका मकान और अधिकांश संपत्तियां पूरी तरह पैतृक (Ancestral Property) हैं। इसके अलावा, उनके परिवार की कुछ कृषि भूमि को राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) के निर्माण के लिए अधिग्रहित किया गया था, जिसके बदले में सरकार से उन्हें एक मोटी रकम मुआवजे के रूप में मिली थी। वाहनों की खरीद भी पूरी तरह से बैंक लोन और उनकी वैध कृषि व व्यापारिक आय से की गई थी। इन दावों की सत्यता साबित करने के लिए याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष खतौनी, बैंक स्टेटमेंट, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR), कृषि आय के प्रमाण पत्र और वाहन ऋण से जुड़े सभी कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिन्हें अभियोजन पक्ष झूठा साबित नहीं कर सका।

केवल संदेह या मुकदमों के आधार पर कुर्की करना गैरकानूनी, राज्य को साबित करना होगा वित्तीय कनेक्शन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 के तहत किसी नागरिक की निजी संपत्ति को कुर्क करना एक 'असाधारण शक्ति' है। इस शक्ति का प्रयोग बेहद संभलकर और तभी किया जा सकता है जब संपत्ति की खरीद और अपराध की कमाई के बीच एक स्पष्ट, प्रत्यक्ष और अटूट संबंध (Financial Trail) स्थापित हो।

अदालत ने कड़े लहजे में कहा कि केवल संदेह, अनुमान या आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज मुकदमों की संख्या के आधार पर किसी भी संपत्ति को 'अपराध की कमाई' (Proceeds of Crime) मान लेना पूरी तरह से गैरकानूनी और कानून की स्थापित व्यवस्था के खिलाफ है। अभियोजन पक्ष या पुलिस ने इस मामले में धन के वैध स्रोतों की कोई स्वतंत्र जांच नहीं की और न ही कोई वित्तीय कड़ी साबित की। विशेष न्यायाधीश का पुराना फैसला महज अनुमानों पर आधारित था, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने कुर्की के आदेश को अवैध ठहराते हुए याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया।

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