मायावती की केंद्र को नसीहत: पेपर लीक और बेरोजगारी पर रोक लगे तो नहीं होंगे छात्रों के आंदोलन
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के अवसर पर केंद्र सरकार को गंभीर मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक हालात बेहद नाजुक हैं। सड़कों से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक टकराव का माहौल है, जिसे सरकार को सूझबूझ और संवेदनशीलता के साथ संभालना चाहिए।
भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक पर अफसरों की जवाबदेही तय करने की मांग
बसपा प्रमुख ने मेडिकल और अन्य ऑल इंडिया तथा राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक और धांधली पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं रद्द होने से देश के युवाओं और बेरोजगारों में भारी आक्रोश है। मायावती ने मांग की है कि पेपर लीक के दोषियों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि तंत्र पारदर्शी बन सके।
सरकारी शिक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं की समस्याओं का संवेदनशील समाधान जरूरी
सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में गिरते शिक्षा स्तर पर चिंता जताते हुए मायावती ने कहा कि गुणवत्ता की कमी के कारण निजी कोचिंग संस्थानों का धंधा फल-फूल रहा है। उन्होंने सरकार से सरकारी शिक्षा में पर्याप्त बजट आवंटित करने, कोचिंग सेंटरों पर निगरानी रखने और युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं तो युवा पीढ़ी को सड़कों या जंतर-मंतर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।