राम मंदिर दान गणना सिस्टम में बड़ा बदलाव: गणना प्रभारी हटे, कर्मचारियों की ड्रेस नीली से हुई 'भगवा', क्लोन चेक एंगल की भी जांच
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के बड़े खुलासे के बाद ट्रस्ट प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियों ने दान गणना (Donation Counting System) की पूरी व्यवस्था को नए सिरे से बदल दिया है। मंदिर में पारदर्शिता बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गणना प्रभारी को हटाकर नए अधिकारी की तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा, गणना कर्मचारियों के ड्रेस कोड में भी बदलाव करते हुए अब भगवा रंग की जेब-रहित यूनिफॉर्म लागू कर दी गई है।
नीली से 'भगवा' हुई ड्रेस: जानिए क्यों बदला गया कपड़ा?
चढ़ावा चोरी कांड सामने आने के बाद शुरुआती दौर में कर्मचारियों के लिए जेब-रहित नीले रंग की वन-पीस यूनिफॉर्म लागू की गई थी ताकि कोई जेब में पैसे न छिपा सके। हालांकि, कर्मचारियों द्वारा कपड़े के मोटे होने और बैठने में आ रही दिक्कतों की शिकायत के बाद ट्रस्ट ने नई व्यवस्था लागू की:
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सूती भगवा ड्रेस: अब कर्मचारियों को पतले सूती कपड़े की भगवा रंग की जेब-रहित यूनिफॉर्म दी गई है, जिससे दो दिनों से कर्मचारी काम कर रहे हैं।
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मोजे पहनने पर पाबंदी: एसआईटी और पुलिस जांच में सामने आया था कि आरोपी कर्मचारी मोजे और पैंट की जेबों में पैसे चुराते थे। इसी कारण अब गणना के दौरान मोजा पहनने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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सख्त गाइडलाइन: बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि एसआईटी (SIT) जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कोई भी टिप्पणी नहीं करेगा।
जांच में 'क्लोन चेक' एंगल की एंट्री: क्या बैंकिंग धोखाधड़ी की भी हुई कोशिश?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के बीच अब एक नया और गंभीर पहलू सामने आया है। पुलिस और जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं मंदिर ट्रस्ट के तीन प्रमुख बैंक खातों से 'क्लोन चेक' (Cloned Cheque) के जरिए वित्तीय अनियमितता की कोशिश तो नहीं की गई।
बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल: यदि जांच में फर्जी चेक के जरिए पैसे निकालने की कोशिश साबित होती है, तो यह मामला सिर्फ परिसर के भीतर चढ़ावा चोरी तक सीमित न रहकर मल्टी-स्टेट बैंकिंग फ्रॉड और बड़ी वित्तीय सुरक्षा में सेंध का रूप ले लेगा।
2020 में भी हो चुका है राम मंदिर ट्रस्ट के साथ चेक फ्रॉड
यह पहली बार नहीं है जब राम मंदिर ट्रस्ट के खातों पर जालसाजों की नजर पड़ी हो। इससे पहले सितंबर 2020 में भी क्लोन चेक के जरिए धोखाधड़ी की गई थी:
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सितंबर 2020 की घटना: जालसाजों ने क्लोन चेक का इस्तेमाल कर ट्रस्ट के खाते से 2.50 लाख रुपये और 3.50 लाख रुपये निकाल लिए थे।
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तीसरे प्रयास में भंडाफोड़: जब 9.86 लाख रुपये का तीसरा फर्जी चेक बैंक में जमा किया गया, तब स्टेट बैंक (SBI) ने पुष्टि के लिए तत्कालीन महासचिव चंपत राय से संपर्क किया, जिससे पूरे फ्रॉड का खुलासा हुआ।
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पैसे की वापसी: बाद में पुलिस कार्रवाई के जरिए एसबीआइ खाते से निकाले गए 6 लाख रुपये ट्रस्ट को वापस मिल गए थे, जिसके बाद ट्रस्ट ने चेक सिस्टम को छोड़कर ज्यादातर लेनदेन डिजिटल माध्यम व RTGS से करने का निर्णय लिया था।