Meerut SSP Transfer Controversy: दलितों पर थप्पड़ बरसाने वाले मेरठ एसएसपी IPS अविनाश पांडेय 5 महीने में ही विदा; जाते-जाते जुड़ा नया विवाद
उत्तर प्रदेश के संवेदनशील और प्रमुख जिलों में शुमार मेरठ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के पद पर तैनात 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी अविनाश पांडेय का कार्यकाल महज 5 महीने के भीतर ही समाप्त हो गया है। शासन द्वारा जारी किए गए देर रात के प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें मेरठ एसएसपी के पद से हटाकर पुलिस महानिदेशक (DGP) मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध (वेटिंग लिस्ट) कर दिया गया है। अविनाश पांडेय का यह संक्षिप्त कार्यकाल शुरू से ही विवादों, जन-आक्रोश और प्रशासनिक असहजताओं के साए में रहा। उनके हटने के पीछे जहां पूर्व में दलित युवकों के साथ हुई अभद्रता और थप्पड़ कांड को लेकर सरकार की किरकिरी को मुख्य वजह माना जा रहा है, वहीं जिले से विदाई के अंतिम दिनों में भी उनके नाम के साथ एक नया प्रशासनिक विवाद जुड़ गया।
दलित युवकों पर थप्पड़ कांड: जब शासन तक गूंजा था मामला
अविनाश पांडेय के कार्यकाल का सबसे चर्चित और विवादित वाकया उस समय सामने आया था, जब एक मामले में पैरवी और ज्ञापन देने आए दलित समुदाय के युवकों के साथ एसएसपी कार्यालय परिसर में पुलिसिया सख्ती और कथित थप्पड़बाजी का मामला गरमा गया था।
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आरोप और वीडियो वायरल: घटना के दौरान पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि कप्तान ने उनकी फरियाद सुनने के बजाय उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर हाथ उठाया।
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राजनीतिक और सामाजिक उबाल: इस मामले को लेकर विपक्ष, भीम आर्मी और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मेरठ से लेकर लखनऊ तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। राजनीतिक दबाव और सामाजिक असंतोष के चलते शासन स्तर पर पुलिस विभाग की छवि को भारी धक्का लगा था।
महज 5 माह में विदाई और डीजीपी मुख्यालय से संबद्धता
सामान्य तौर पर किसी भी बड़े जिले में कप्तान को कानून-व्यवस्था नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है, लेकिन अविनाश पांडेय को किसी अन्य जिले की कमान सौंपने के बजाय सीधे डीजीपी मुख्यालय लखनऊ से अटैच किया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि शीर्ष नेतृत्व उनके कार्यशैली और विवादों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं था। अपराध नियंत्रण में ढिलाई, फरियादियों की शिकायतों पर संवेदनशीलता की कमी और लगातार बनते विवादों की गोपनीय रिपोर्ट गृह विभाग तक पहुंच रही थी, जिसके बाद यह कठोर प्रशासनिक फैसला लिया गया।
जाते-जाते विदाई के समय जुड़ा नया विवाद
मेरठ से तबादले के आदेश जारी होने के ऐन पहले भी जिले के कुछ संवेदनशील स्थानीय मामलों के निस्तारण और विभागीय फेरबदल को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया। स्थानीय स्तर पर आरोप लगे कि अंतिम समय में भी कुछ पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर और संवेदनशील केसों की विवेचनाओं में मनमाने फैसले लिए गए, जिसने विभागीय तालमेल में दरार पैदा की। इस नए गतिरोध ने उनके विदाई के माहौल को और अधिक असहज बना दिया।
बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति को मिली मेरठ की कमान
अविनाश पांडेय के तबादले के बाद शासन ने झांसी के तेजतर्रार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बी.बी.जी.टी.एस. मूर्ति को मेरठ का नया पुलिस कप्तान नियुक्त किया है। मेरठ जैसे बड़े और रणनीतिक रूप से अहम जिले में नए एसएसपी के सामने कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने, जनता में पुलिस का भरोसा बहाल करने और लंबित विवादों को सुलझाने की बड़ी चुनौती होगी।