मक्का के पास ड्रोन गिरा, फिर F-15 पर वार! हूतियों के दावे से भड़का सऊदी-यमन तनाव; 'मक्का रक्षा समझौते' की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा

मक्का के पास ड्रोन गिरा, फिर F-15 पर वार! हूतियों के दावे से भड़का सऊदी-यमन तनाव; 'मक्का रक्षा समझौते' की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा

मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) के अशांत भू-राजनीतिक परिदृश्य में तनाव एक बार फिर चरम सीमा पर पहुंच गया है। इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास एक संदिग्ध ड्रोन को सऊदी अरब की एयर डिफेंस प्रणाली द्वारा मार गिराए जाने के कुछ ही घंटों बाद, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अत्याधुनिक F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराने का सनसनीखेज दावा ठोक दिया है।

इस दोहरे घटनाक्रम के बाद लाल सागर से लेकर रियाद तक जंग के बादल मंडराने लगे हैं। सऊदी अरब ने जहां मक्का और पवित्र स्थलों की सुरक्षा को किसी भी समझौते से परे 'रेड लाइन' (लक्ष्मण रेखा) करार दिया है, वहीं हूतियों के दावों ने हाल ही में अस्तित्व में आए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' (Makkah Joint Defence Agreement) की पहली बड़ी परीक्षा शुरू कर दी है।

मक्का के पास ड्रोन इंटरसेप्ट, सऊदी ने कहा- 'पवित्र शहर हमारी रेड लाइन'

सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की के अनुसार, मंगलवार शाम मक्का के दक्षिण में आ रहे एक विस्फोटक ड्रोन को सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया।

  • गठबंधन का कहना है कि जुलाई 2017 के बाद यह दूसरा मौका है जब विद्रोहियों ने सीधे तौर पर पवित्र शहर मक्का की दिशा में हमला करने की हिमाकत की है।

  • सऊदी अरब ने देशभर में हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि इस आतंकी और आक्रामक कृत्य का मुंहतोड़ व निर्णायक जवाब दिया जाएगा।

इधर, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का पर ड्रोन हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे दुनिया भर के मुसलमानों की आस्था पर हमला बताया है। हालांकि, हूतियों के राजनीतिक ब्यूरो ने मक्का को निशाना बनाने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सऊदी अरब का 'घिसा-पिटा झूठ' करार दिया है। हूतियों का कहना है कि उनके निशाने पर केवल सऊदी तेल ठिकाने और सैन्य ठिकाने हैं, पवित्र स्थल नहीं।

F-15 फाइटर जेट पर वार: मारिब में मार गिराने का हूतियों का दावा

मक्का ड्रोन घटना के तुरंत बाद हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी (Yahya Saree) ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने यमन के मारिब प्रांत के हवाई क्षेत्र में सऊदी रॉयल एयरफोर्स के एक F-15 लड़ाकू विमान को स्वदेशी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) से मार गिराया है।

हूती प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सऊदी लड़ाकू विमान उनके ठिकानों पर भारी बमबारी कर रहे थे और पिछले एक सप्ताह में 450 से ज्यादा हवाई हमले किए गए हैं। हूतियों ने यह भी दावा किया कि मलबे की तलाश में आए सऊदी टाइफून और F-15 के दो फॉर्मेशनों को भी उनकी मिसाइलों ने वापस खदेड़ दिया। हालांकि, स्वतंत्र स्रोतों और सऊदी रक्षा मंत्रालय ने अभी तक अपने किसी फाइटर जेट के दुर्घटनाग्रस्त होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

'मक्का रक्षा समझौते' पर टिकीं निगाहें, पाकिस्तान की हिचकिचाहट

इस ताजा हमले ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। पिछले महीने ही सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' हुआ था, जिसके तहत किसी एक देश पर हुए सशस्त्र हमले को तीनों पर हमला माना जाना तय हुआ था।

  • मक्का के पास हुए हमले के बाद यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या पाकिस्तान या सहयोगी देश हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य एक्शन में उतरेंगे?

  • हालांकि, इस्लामाबाद ने फिलहाल प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप या सेना की नई तैनाती से दूरी बनाए रखी है और बातचीत के जरिए संयम बरतने की अपील की है।

  • वहीं, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से संपर्क साधकर लाल सागर की सुरक्षा के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक समर्थन मांगा है।

बाब अल-मंडेब पर कब्जा और 3 मोर्चों पर भड़की जंग

जमीनी हालात इसलिए भी अधिक विस्फोटक हो चुके हैं क्योंकि हाल के दिनों में हूती लड़ाकों ने यमन के पश्चिमी तट पर मोखा बंदरगाह और रणनीतिक रूप से संवेदनशील पेरिम द्वीप (Mayun Island) पर अपना कब्जा जमा लिया है।

बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के मुहाने पर हूतियों की मजबूत पकड़ ने लाल सागर से गुजरने वाले सऊदी तेल टैंकरों और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को भारी खतरे में डाल दिया है। सऊदी अरब द्वारा अपनी एक प्रमुख तेल पाइपलाइन को बंद करने और जवाबी हवाई हमलों के बाद दोनों पक्षों के बीच पुराना अनौपचारिक युद्धविराम पूरी तरह बिखर चुका है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि दोनों पक्षों में सीधी जमीनी और हवाई भिड़ंत बढ़ी, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और समुद्री सप्लाई चेन पर देखने को मिलेगा।

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