'कोई मंत्री ऐसी जगहों पर अपने जानवर भी नहीं रखेगा': अभिजीत दीपके ने किया कॉकरोच पार्टी के नए अभियान का ऐलान
सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच तेजी से चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने नए जन-अभियान की आधिकारिक घोषणा कर दी है। 'स्कूल ठीक करो' मुहिम के बाद अब पार्टी ने आदिवासी बहुल इलाकों के सरकारी व आश्रम स्कूलों की बदहाली को केंद्र में रखते हुए 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने विभिन्न राज्यों की सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के 80 साल बीत जाने के बाद भी आदिवासी बच्चों के स्कूलों की स्थिति बेहद दयनीय है और कोई भी मंत्री ऐसी जगहों पर अपने जानवर भी नहीं रखेगा, जहां इन मासूम बच्चों को पढ़ने और रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
'आदिवासी स्कूल ठीक करो': जमीनी स्तर पर स्कूलों की जांच करेगी पार्टी
अभिजीत दीपके ने नए अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता और युवा स्वयंसेवक खुद आदिवासी अंचलों में जाएंगे:
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बुनियादी सुविधाओं की पड़ताल: पार्टी कार्यकर्ता दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित आश्रम स्कूलों और सरकारी प्राथमिक विद्यालयों का दौरा करेंगे। वहां बच्चों के बैठने की व्यवस्था, पीने का पानी, शौचालय और भोजन की गुणवत्ता की लाइव ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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सरकारी दावों की पोल खोलना: दीपके ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि आदिवासी बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकारों की प्रशासनिक उपेक्षा उन्हें पीछे धकेल रही है।
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जवाबदेही तय करने की मांग: पार्टी ने सभी राज्य सरकारों से अपील की है कि वे बजट की कागजी घोषणाओं से बाहर निकलकर इन स्कूलों की जर्जर इमारतों और व्यवस्थाओं को तुरंत दुरुस्त करें।
आश्रम स्कूलों में बच्चों की मौतों पर उठाए गंभीर सवाल
प्रेस वार्ता में अभिजीत दीपके ने आदिवासी इलाकों में बच्चों की असमय मौतों का दर्दनाक आंकड़ा सामने रखते हुए व्यवस्था पर मेडिकल लापरवाही के आरोप लगाए:
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महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों के आंकड़े: दीपके ने दावा किया कि पिछले दो सालों में महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में 590 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह आंकड़ा मुंबई या किसी बड़े महानगर से आता, तो देश भर में हड़कंप मच जाता, लेकिन क्या आदिवासी बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं है?
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खराब खाना और जमीन पर सोने की मजबूरी: उन्होंने आरोप लगाया कि कई आवासीय आश्रम स्कूलों में बच्चों को बेहद घटिया स्तर का खाना दिया जाता है। बेड और गद्दों की कमी के कारण बच्चों को फर्श पर सोना पड़ता है, जिससे उन्हें जहरीले कीड़े और सांप काटने (Snake Bite) की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
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मध्य प्रदेश के बालाघाट का मामला: हाल ही में बालाघाट दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां कई बच्चों की संक्रामक बीमारियों से मौत हुई है, लेकिन सरकारी तंत्र इसे दबाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी व्यवस्थागत लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
MPSC पेपर लीक के खिलाफ भी अल्टीमेटम
'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान के साथ-साथ कॉकरोच जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं (MPSC) की तैयारी कर रहे छात्रों के आंदोलन को भी अपना समर्थन दिया है।
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पार्टी ने ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के मामलों को लेकर MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग की है।
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दीपके ने अधिकारियों के इस्तीफे के लिए 24 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो पार्टी छात्रों के साथ मिलकर पूरे महाराष्ट्र में राज्यव्यापी विरोध दौरा शुरू करेगी।
व्यवस्थागत भ्रष्टाचार और सरकारी स्कूलों की खस्ताहाली को मुद्दा बनाकर शुरू किया गया यह नया अभियान अब विपक्षी और प्रशासनिक गलियारों में नई सियासी बहस छेड़ने लगा है।