'पाकिस्तान में गुलामी अभी खत्म नहीं हुई, सिर्फ तरीका बदला है': मौलाना फजलुर रहमान ने हुक्मरानों की उड़ाईं धज्जियां
आर्थिक दिवालियापन, राजनीतिक अस्थिरता और बेलगाम महंगाई से जूझ रहे पाकिस्तान में अब व्यवस्था और सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ बगावती सुर बेहद तीखे होते जा रहे हैं। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख और पाकिस्तान की राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी मौलाना फजलुर रहमान ने मुल्क के मौजूदा निजाम, हुक्मरानों और पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले सैन्य जनरलों की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं। एक बड़े सार्वजनिक जलसे को संबोधित करते हुए मौलाना ने ऐसा बयान दे डाला जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के जीएचक्यू (GHQ) तक हड़कंप मचा दिया है। मौलाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान की जनता यह गुमान छोड़ दे कि वह एक आजाद मुल्क में सांस ले रही है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा—"1947 में अंग्रेजों के जाने के बाद भी पाकिस्तान में गुलामी खत्म नहीं हुई है, केवल गुलामी का तरीका और हमारे आका बदल गए हैं।"
'गोरे अंग्रेजों की जगह काले अंग्रेजों ने ले ली': मौलाना का तीखा वार
मौलाना फजलुर रहमान ने देश की मौजूदा बदहाली का खाका खींचते हुए कहा कि आजादी के सात दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आम अवाम अपने बुनियादी अधिकारों के लिए तरस रही है। उन्होंने कहा कि मुल्क को ब्रिटिश हुकूमत से इसलिए आजाद कराया गया था ताकि यहां के लोग स्वतंत्र होकर अपनी मर्जी से फैसले ले सकें और संविधान का राज हो।
मौलाना ने गरजते हुए कहा, "हम खुद को एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र कहते हैं, लेकिन असलियत यह है कि हमने केवल गोरे अंग्रेजों से मुक्ति पाई थी। उनके जाने के बाद मुल्क की सत्ता पर ऐसे 'काले अंग्रेजों' और उनके एजेंटों का कब्जा हो गया जिन्होंने आवाम को पहले से भी बदतर गुलामी की जंजीरों में जकड़ दिया है। पहले लंदन से हुक्म आता था, आज वाशिंगटन और आईएमएफ (IMF) से फरमान जारी होते हैं। मुल्क का बजट हमारी संसद नहीं, बल्कि विदेशी साहूकार तय करते हैं। जब किसी देश की नीतियां, अदालतें और फैसले दूसरों के इशारों पर चलने लगें, तो उसे आजादी नहीं बल्कि आधुनिक गुलामी कहा जाता है।"
आईएमएफ के सामने घुटने टेकने और आर्थिक लाचारी पर उठाए सवाल
मौलाना ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बार-बार बेलआउट पैकेज मांगने की सरकार की नीति पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने कहा कि शाहबाज शरीफ की मौजूदा गठबंधन सरकार हो या कोई पूर्ववर्ती हुकूमत, सभी ने कर्ज लेकर मुल्क को गिरवी रखने का काम किया है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या एक 24 करोड़ की आबादी वाला परमाणु संपन्न मुल्क अपने नागरिकों को दो वक्त की रोटी देने में भी सक्षम नहीं है? मौलाना ने कहा कि बिजली, गैस और पेट्रोल की कीमतें तय करने का हक भी अब पाकिस्तानी हुकूमत के हाथ में नहीं रह गया है। गरीब जनता पर टैक्सों का भारी बोझ लादा जा रहा है, जबकि अभिजात्य वर्ग (Elite Class), भ्रष्ट राजनेता और सेना के बड़े अधिकारी ऐशो-आराम की जिंदगी बसर कर रहे हैं। जब आवाम की जेब पर डाका डालकर विदेशी कर्जदारों की किस्तें भरी जाएं, तो यह गुलामी का सबसे घिनौना रूप है।
चुनावी धांधली और सेना के राजनीतिक दखल पर साधा सीधा निशाना
अपने भाषण के दौरान मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान के हालिया चुनावों में हुई कथित धांधली और जनमत की चोरी को लेकर भी सीधे तौर पर 'एस्टैब्लिशमेंट' (पाकिस्तानी सेना) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र केवल एक दिखावा बनकर रह गया है।
मौलाना ने कहा, "संसद को रबर स्टैंप बना दिया गया है। जब अवाम के वोटों की कोई अहमियत नहीं है और किसे प्रधानमंत्री बनाना है यह कुछ बंद कमरों में तय होता है, तो फिर इस संविधान और जम्हूरियत का क्या मतलब रह जाता है? आज पाकिस्तान में अदालतों को डराया-धमकाया जाता है, मीडिया की जुबान पर ताले लगा दिए गए हैं और सच बोलने वाले सियासतदानों को जेलों में ठूंस दिया जाता है। यह कैसी आजादी है जहां नागरिक अपने हक की बात भी नहीं कर सकता?"
जनता से अपने हक के लिए उठ खड़े होने का आह्वान
मौलाना फजलुर रहमान ने सभा में मौजूद हजारों समर्थकों और देश की युवा पीढ़ी से अपील की कि वे इस 'बदली हुई गुलामी' के खिलाफ खामोश न बैठें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आज पाकिस्तानी आवाम ने अपने हकों, वोट की हिफाजत और मुल्क की संप्रभुता के लिए आवाज नहीं उठाई, तो आने वाली नस्लें भी इसी तरह अंतरराष्ट्रीय ताकतों और मुल्क के अंदर बैठे चंद मठाधीशों की गुलाम बनी रहेंगी।
मौलाना का यह भाषण सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुका है और विपक्षी दलों के साथ-साथ आम पाकिस्तानी नागरिक भी उनके बयानों को मौजूदा कड़वी हकीकत मानकर उनका समर्थन कर रहे हैं। पाकिस्तान के बिगड़ते हालात के बीच मौलाना की यह गर्जना आने वाले दिनों में सरकार और सेना के लिए एक बहुत बड़े जन-आंदोलन का संकेत मानी जा रही है।