मणिपुर में दोनों डिप्टी सीएम के बीच टकराव: कुकी-नागा विवाद में आमने-सामने आए नेता, अमित शाह तक पहुंची बात और समर्थन वापसी की चेतावनी

मणिपुर में दोनों डिप्टी सीएम के बीच टकराव: कुकी-नागा विवाद में आमने-सामने आए नेता, अमित शाह तक पहुंची बात और समर्थन वापसी की चेतावनी

जातीय हिंसा की आग से उबरने की कोशिश कर रहे पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक नया और गंभीर सियासी संकट खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति शासन हटने के बाद राज्य में सामाजिक संतुलन साधने के लिए बनाए गए दोनों उप-मुख्यमंत्री ही अब खुलकर एक-दूसरे के खिलाफ आमने-सामने आ गए हैं। राज्य की कुकी समुदाय से आने वाली उप-मुख्यमंत्री नेमचा किपगेन और नागा समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले उप-मुख्यमंत्री लोसी दिखो के बीच छिड़े इस तीखे विवाद ने न केवल भाजपा नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को हिलाकर रख दिया है, बल्कि मैतेई-कुकी संघर्ष के बीच अब कुकी और नागा समुदायों के बीच भी टकराव की एक नई आग भड़का दी है।

अमित शाह को पत्र: नागा विधायकों का गंभीर आरोप और समर्थन वापसी की धमकी

विवाद की शुरुआत 1 सितंबर को हुई, जब नागा उप-मुख्यमंत्री लोसी दिखो और 8 अन्य नागा विधायकों ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक औपचारिक पत्र भेजा।

इस पत्र में नागा नेताओं ने अपनी ही सरकार की सहयोगी और कुकी उप-मुख्यमंत्री नेमचा किपगेन पर बेहद संगीन आरोप लगाए:

  • उग्रवादियों को शह देने का आरोप: पत्र में आरोप लगाया गया कि किपगेन और उनके पति थंगबोई (जो कुकी नेशनल फ्रंट - KNF के प्रमुख हैं) कुकी उग्रवादी समूहों को परोक्ष समर्थन दे रहे हैं और शांति प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं।

  • नागा नागरिकों के अपहरण और हत्या में चुप्पी: नागा विधायकों ने दावा किया कि जब कुकी उग्रवादियों ने नागा नागरिकों का अपहरण किया था, उस दौरान किपगेन ने अपना फोन बंद कर लिया था और बंधकों की हत्या में उनकी परोक्ष भूमिका रही।

  • समर्थन वापस लेने की चेतावनी: नागा विधायकों ने साफ कर दिया कि यदि केंद्र सरकार ने किपगेन के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, तो वे मणिपुर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेंगे, जिससे वाई. खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के सामने बहुमत का संकट खड़ा हो सकता है।

'मुझे पद से हटाने की साजिश': नेमचा किपगेन का पलटवार और सफाई

नागा विधायकों के आरोपों पर उप-मुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने बेहद तल्ख पलटवार किया है। उन्होंने इन दावों को बिना जांचे-परखे, तथ्यहीन और दो समुदायों के बीच पहले से नाजुक भरोसे को तोड़ने वाला करार दिया।

किपगेन ने सिलसिलेवार ढंग से जवाब देते हुए कहा:

  • फोन बंद रखने पर सफाई: किपगेन ने बताया कि 13 मई को जब तीन चर्च नेताओं की हत्या हुई थी और तनाव भड़का था, तब वे फ्लाइट में सफर कर रही थीं। लैंड करने के बाद मिस्ड कॉल देखते ही उन्होंने तुरंत मुख्यमंत्री और नागरिक संगठनों (CSOs) से संपर्क साधा।

  • बंधकों की सुरक्षित रिहाई का हवाला: उन्होंने याद दिलाया कि 11 मार्च को 21 तांगखुल नागा यात्रियों को और 15 मई को 18 नागा बंधकों को उनके ही निजी हस्तक्षेप और प्रयासों से बिना शर्त सुरक्षित छुड़वाया गया था।

  • साजिश का अंदेशा: किपगेन ने सवाल उठाया, "मैं यह सोचने पर मजबूर हूं कि मेरे उप-मुख्यमंत्री बनने के बाद ही नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव इतनी तेजी से क्यों भड़का? कुछ समूह जानबूझकर शांतिपूर्ण कांगपोकपी जिले और मुझे व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने के लिए हिंसा भड़का रहे हैं।"

  • पति के संगठन पर जवाब: पति के संगठन 'केएनएफ' को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समूह केंद्र सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते के तहत आता है, जिसकी निगरानी सीधे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करती हैं।

मणिपुर में क्यों बनाया गया था 'एक सीएम और दो डिप्टी सीएम' का फॉर्मूला?

मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे और लंबे राष्ट्रपति शासन के बाद केंद्र सरकार ने राज्य के तीनों प्रमुख समुदायों—मैतेई, कुकी और नागा के बीच शक्ति संतुलन बनाने के लिए यह विशेष राजनीतिक फॉर्मूला तैयार किया था:

  • मुख्यमंत्री: मैतेई समुदाय से आने वाले वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह को कमान सौंपी गई।

  • पहला डिप्टी सीएम: कुकी समुदाय को साधने और प्रतिनिधित्व देने के लिए पूर्व मंत्री नेमचा किपगेन को बनाया गया। (सुरक्षा कारणों से उन्होंने दिल्ली से वर्चुअली शपथ ली थी और वे इंफाल के बजाय कांगपोकपी से ही कामकाज देख रही हैं)।

  • दूसरा डिप्टी सीएम: पहाड़ी क्षेत्रों के नागा समुदाय का विश्वास जीतने के लिए लोसी दिखो को उप-मुख्यमंत्री का दायित्व दिया गया।

नए कुकी-नागा संघर्ष ने बढ़ाई भाजपा आलाकमान की टेंशन

राज्य में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच खूनी संघर्ष चल रहा था, लेकिन फरवरी 2026 से एक नया मोर्चा खुल गया है—कुकी और नागा संघर्ष। पिछले कुछ महीनों में हुए हिंसक टकरावों में दोनों पक्षों के कुल 36 लोग (18 नागा और 18 कुकी) अपनी जान गंवा चुके हैं।

दोनों समुदायों के बीच जमीनी स्तर पर फैली इस नफरत की लपटें अब सीधे सरकार की कैबिनेट तक पहुंच गई हैं। एक ही गठबंधन सरकार के दोनों उप-मुख्यमंत्रियों का एक-दूसरे पर उग्रवाद को बढ़ावा देने और हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगाना यह साबित करता है कि मणिपुर में सामाजिक विभाजन किस कदर गहरा चुका है। नई दिल्ली में गृह मंत्रालय और भाजपा आलाकमान के लिए अब यह चुनौती बन गई है कि वे सरकार को गिरने से कैसे बचाएं और दोनों समुदायों के नेताओं को एक मेज पर लाकर शांति कैसे बहाल करें।

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