बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का कड़ा एक्शन, पुलिस वेलफेयर बोर्ड को किया भंग
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के 'पुलिस वेलफेयर बोर्ड' (Police Welfare Board) को तत्काल प्रभाव से भंग करने का एलान कर दिया है। सीएम के इस बड़े कदम से राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
'शासकों का कानून' खत्म, अब होगा 'कानून का शासन'
समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साफ और कड़े शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में अब कानून व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने पूर्ववर्ती व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा, "पहले बंगाल में शासकों का कानून (Law of the rulers) चलता था, लेकिन अब राज्य में केवल कानून का शासन (Rule of the law) स्थापित होगा।" मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्दीधारी सुरक्षाकर्मियों और कानून लागू करने वाले पुलिसकर्मियों पर किसी भी तरह का हमला या अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजनीतिक अखाड़ा बन चुका था पुलिस वेलफेयर बोर्ड
पुलिस वेलफेयर बोर्ड को भंग करने की मुख्य वजह बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बोर्ड का गठन तो बेहद नेक इरादे और पुलिसकर्मियों के कल्याण के लिए किया गया था, लेकिन समय के साथ यह अपने मूल उद्देश्य से भटक गया। सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि यह बोर्ड धीरे-धीरे एक राजनीतिक दल के फ्रंटल संगठन या शाखा की तरह काम करने लगा था। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि इससे आम पुलिसकर्मियों का कितना भला हुआ, लेकिन यह कुछ लोगों के लिए अवैध रूप से नौकरी का विस्तार (Extension) पाने का जरिया जरूर बन गया था। कई लोगों ने इससे व्यक्तिगत लाभ उठाए। इसी वजह से आज हम इस बोर्ड को पूरी तरह से भंग कर रहे हैं।"
महिला पुलिसकर्मियों को होम डिस्ट्रिक्ट में पोस्टिंग की सौगात
इस कड़े फैसले के साथ ही मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग की महिला कर्मियों के लिए एक बेहद संवेदनशील और बड़ा ऐलान भी किया। उन्होंने घोषणा की कि महिला पुलिसकर्मियों को उनके गृह जिलों (Home Districts) में पोस्टिंग के दौरान प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले के पीछे का उद्देश्य यह है कि महिला पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों और पारिवारिक दायित्वों के बीच बेहतर संतुलन बना सकें।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ के खिलाफ सख्त निर्देश
सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने इस वर्चुअल और फिजिकल मोड में आयोजित बैठक में राज्य भर के आला अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित नदी क्षेत्रों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी को और अधिक मजबूत करने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने पुलिस को विशेष रूप से निर्देश दिया कि वे सीमा पार से होने वाली किसी भी प्रकार की घुसपैठ को रोकने के लिए चौबीसों घंटे पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद रहें।
जबरन वसूली और अवैध उगाही पर लगेगा पूरी तरह लगाम
आम जनता को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री ने तोतो (ई-रिक्शा) और ऑटो चालकों से होने वाली अवैध वसूली पर भी कड़ा रुख अपनाया है। सुवेंदु अधिकारी ने दो टूक कहा कि ऑटो और ई-रिक्शा चालकों से किसी भी तरह की अवैध पैसों की उगाही तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने आम जनता से अपील की कि यदि कोई भी व्यक्ति जबरन वसूली या अवैध उगाही में शामिल है, तो उसकी शिकायत तुरंत पुलिस से करें। पुलिस इन शिकायतों की गहनता से जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ बिना किसी देरी के सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।