PM मोदी की अपील के बाद पेट्रोल-डीजल पर आया बड़ा अपडेट, क्या फिर बढ़ेंगे दाम? जानें सरकार का पूरा प्लान
Up kiran, Digital Desk : देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर मची हलचल के बीच केंद्र सरकार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और देश की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ़ कर दिया है कि भारत के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण ग्राहकों को जल्द ही कीमतों का बड़ा झटका लग सकता है।
ईंधन की किल्लत की खबरों पर लगा पूर्ण विराम
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय बाजारों में ईंधन की कमी यानी 'ड्राई आउट' को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ रही थीं। इन अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 'CII एनुअल बिजनेस समिट 2026' में देशवासियों को आश्वस्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के पास कच्चे तेल, गैस और LPG का इतना स्टॉक मौजूद है कि किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सकता है। सरकार ने रसोई गैस (LPG) के उत्पादन में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है।
भारत के पास कितना है तेल और गैस का बैकअप?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की एनर्जी सिक्योरिटी फिलहाल काफी मजबूत स्थिति में है। वर्तमान में देश के पास 60 दिनों की जरूरतों के बराबर कच्चा तेल (Crude Oil) और उतनी ही मात्रा में LNG का भंडार सुरक्षित है। वहीं, रसोई गैस यानी LPG का 45 दिनों का बफर स्टॉक मौजूद है। मंत्री ने बताया कि LPG का उत्पादन 35,000 टन से बढ़ाकर अब 55,000-56,000 टन कर दिया गया है, इसलिए नागरिकों को किल्लत से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
तेल कंपनियों को हो रहा है 1000 करोड़ का दैनिक घाटा
राहत भरी खबरों के बीच एक चिंताजनक पहलू तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत का है। हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया कि सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) इस समय गहरे संकट में हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। मंत्री के मुताबिक, तेल कंपनियां वर्तमान में लगभग ₹1,000 करोड़ प्रतिदिन का भारी घाटा उठा रही हैं। पिछले साल कमाया गया सारा मुनाफा इस घाटे की भेंट चढ़ चुका है, और इस तिमाही में कुल नुकसान ₹1 लाख करोड़ के पार पहुँचने का अनुमान है।
क्या आपकी जेब पर बढ़ने वाला है बोझ?
जब मंत्री से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले शब्दों में कड़े संकेत दिए। उन्होंने साफ़ कहा कि कीमतों का चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि तेल कंपनियों की सहनशक्ति की एक सीमा है और अगर वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ, तो देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने के लिए कीमतों में संशोधन अनिवार्य हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील का जिक्र करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि सरकार उपभोक्ताओं को झटकों से बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।